छत्तीसगढ़ के नर्सिंग कॉलेजों में मनमाने तरीके से सीटों का आवंटन, बिना अस्पताल के हो रहा एडमिशन, 78 कॉलेज बगैर आईएनसी की मान्यता के संचालित
Arbitrary allocation of seats in nursing colleges of Chhattisgarh admission being done without hospital 78 colleges operating without INC recognition
छत्तीसगढ़ के नर्सिंग कॉलेजों की स्थिति पर रोज नए खुलासे हो रहे हैं. प्रदेश में कुल 150 नर्सिंग कॉलेज हैं. जिनमें से 78 कॉलेज इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) से मान्यता प्राप्त नहीं हैं. ये कॉलेज सिर्फ छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल की मान्यता के सहारे चल रहे हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक कॉलेजों में सीटें आवंटित करने के लिए तय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है. नियम के मुताबिक जितनी सीटें कॉलेज में हैं. उससे तीन गुना बेड की क्षमता वाला अस्पताल होना चाहिए. लेकिन कई कॉलेज ऐसे हैं जो बिना अस्पताल के ही बड़ी तादाद में सीटें आवंटित कर रहे हैं.
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सीटों का मनमाना आवंटन: सूची में शामिल कॉलेज
- निवेदिता कॉलेज ऑफ नर्सिंग, बिलासपुर
- बिना आईएनसी मान्यता के, अचानक कैसे मिली मान्यता, जाँच का विषय।
- श्री साई कॉलेज ऑफ नर्सिंग, गौरेला-पेंड्रा
- 60 सीटों पर दाखिला, लेकिन 180 बिस्तर का अस्पताल नहीं है।
- सूर्या कॉलेज ऑफ नर्सिंग, जांजगीर-चांपा
- 85 सीटों के लिए 255 बिस्तर का अस्पताल चाहिए, जो उपलब्ध नहीं है।
- सीएम नर्सिंग कॉलेज, नेहरू नगर, भिलाई
- 120 सीटें, लेकिन 360 बिस्तरों का अस्पताल नहीं है।
- अपोलो कॉलेज, दुर्ग
- 90 सीटों के लिए आईएनसी से स्वीकृत बैच साइज मान्य नहीं।
- पीजी कॉलेज, भिलाई
- 130 सीटों के लिए 390 बिस्तरों का अस्पताल चाहिए, जो उपलब्ध नहीं है।
- भारत इंस्टिट्यूट ऑफ नर्सिंग, बालोद
- 90 सीटों के लिए 270 बिस्तर चाहिए, लेकिन अस्पताल नहीं है।
- रस्तोगी कॉलेज, टेडेसरा, राजनांदगांव
- 90 सीटों पर दाखिला, लेकिन 270 बिस्तरों का अस्पताल नहीं।
- ग्रेशियस कॉलेज ऑफ नर्सिंग, अभनपुर
- 90 सीटों के लिए 270 बिस्तर चाहिए, लेकिन अस्पताल की सुविधा नहीं।
- रावतपुरा कॉलेज ऑफ नर्सिंग, धनेली, रायपुर
- 80 सीटों के लिए 240 बिस्तर का अस्पताल चाहिए, लेकिन अनुपलब्ध। छत्तीसगढ़ के नर्सिंग कॉलेजों में मनमाने तरीके से सीटों का आवंटन, बिना अस्पताल के हो रहा है दाखिल
इस तरह से नियमों का उल्लंघन करके बड़ी तादाद में सीटें आवंटित की जा रही हैं. इस पर प्रशासनिक कार्रवाई की मांग उठ रही है. ताकि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा सके.



