छत्तीसगढ़ कांग्रेस के 20 नेताओं का निष्कासन रद्द, कुकरेजा-डोंगरे-ऋतिक सिन्हा समेत कई दिग्गजों की वापसी का रास्ता साफ; अमित-रेणु जोगी पर फैसला बाकी
Expulsion of 20 Chhattisgarh Congress leaders revoked; path cleared for the return of several prominent figures, including Kukreja, Dongre, and Ritik Sinha; decision regarding Amit and Renu Jogi still pending.
रायपुर : छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अलग-अलग जिलों के 20 निष्कासित कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का निष्कासन रद्द कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति की 18 सितंबर को हुई बैठक में लिए गए फैसले के बाद रविवार को इस बारे में आदेश जारी किया गया. लिस्ट में तीन बार के पार्षद और पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष ऋतिक सिन्हा का निष्कासन भी रद्द करदिया गया है.
तत्काल प्रभाव से हुई वापसी
प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री संगठन एवं प्रशासन मलकित सिंह गैदू की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि निष्कासन तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है. जिन नेताओं-कार्यकर्ताओं का निष्कासन रद्द किया गया है, उनमें आनंद कुकरेजा, विनय चोपड़ा पार्षद, पूनम पाण्डेय, विशाल रजानी, गोपाल सिन्हा, राघव महाडिक, भविष्य प्रधान, ऋतिक सिन्हा, भानुप्रताप साहू, सुशील सोनी, सगीर खान, सिद्धार्थ डोंगरे, राजेश गुप्ता, जितेश सिमनकर, सतकुर चौहान, सुनील सिन्हा, आशीष सोनकर, शशांक डोंगरे, श्यामवती सिन्हा और अंजू बंजारे शामिल हैं. इनमें रायपुर, मुंगेली, गरियाबंद, कोंडागांव और राजनांदगांव जिले के नेता-कार्यकर्ता शामिल हैं.
अनुशासन समिति ने 18 सितंबर को लिया था फैसला
प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति ने 18 सितंबर की बैठक में पार्टी में वापसी से जुड़े आवेदनों पर विचार किया था. इसके दो दिन बाद 20 सितंबर को 20 लोगों का निष्कासन खत्म करने का औपचारिक आदेश जारी किया गया. आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा.
बता दें कि तीन बार के पार्षद और पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष लेखराम सिन्हा (ऋतिक सिन्हा) का निष्कासन भी रद्द कर दिया गया है. कांग्रेस में ऋतिक सिन्हा की यह वापसी गरियाबंद नगर की राजनीति में बड़ी घटना मानी जा रही है. वे तीन बार पार्षद रहे, शहर कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली और लंबे समय से वार्ड और शहर की राजनीति में सक्रिय हैं. ऐसे में उनकी वापसी का असर पार्टी संगठन और नगर की राजनीति, दोनों पर दिखेगा.
तीन बार पार्षद रहने से बना मजबूत जनाधार
ऋतिक सिन्हा की राजनीतिक पहचान गरियाबंद के वार्ड स्तर से बनी है. तीन बार पार्षद रहते हुए उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं और लोगों की जरूरतों पर सीधे काम किया. पार्षद का कार्यकाल खत्म होने और पिछले चुनाव में जीत न मिलने के बाद भी वार्डवासियों और स्थानीय लोगों से उनका संपर्क बना रहा. वे लगातार लोगों के बीच रहे और सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी बनाए रखी. यही जमीनी जुड़ाव उनकी स्थानीय पहचान का अहम हिस्सा है. उनके कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों को वार्ड के लोग आज भी याद करते हैं.
संगठन मजबूत होने और जनाधार बढ़ने की उम्मीद
ऋतिक सिन्हा की कांग्रेस में वापसी का पहला बड़ा असर पार्टी के स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क पर दिख रहा है. तीन बार पार्षद और पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष रहने के कारण उनका शहर के अलग-अलग वार्डों के कार्यकर्ताओं और लोगों से पुराना संपर्क है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में काम करने का अनुभव उन्हें गरियाबंद के विभिन्न वार्डों के राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरणों की जानकारी देता है.
उनकी वापसी से लंबे समय से उनसे जुड़े कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह है. पुराने कार्यकर्ताओं के साथ उनका फिर से सक्रिय होना स्थानीय संगठन को नई ऊर्जा देने वाला कदम माना जा रहा है.
हर वार्ड की राजनीति की समझ
शहर कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाने और तीन बार पार्षद रहने के कारण ऋतिक सिन्हा को नगर के वार्ड स्तर की राजनीति, स्थानीय मुद्दों और कार्यकर्ता नेटवर्क का सीधा अनुभव है. कांग्रेस में वापसी से यह अनुभव अब पार्टी संगठन के काम आएगा.
आने वाली नगरीय राजनीति पर भी पड़ेगा असर
ऋतिक सिन्हा की वापसी का असर सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं है. इसका असर नगर पालिका और आने वाली स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में भी दिख सकता है. नगर के विभिन्न वार्डों में स्थानीय मुद्दों, मतदाताओं की अपेक्षाओं और जमीनी हालात से उनका पुराना जुड़ाव है. उनकी वापसी के बाद पार्टी की स्थानीय राजनीति में वार्ड स्तर पर सक्रियता बढ़ने और पुराने कार्यकर्ता नेटवर्क के फिर से सक्रिय होने की उम्मीद जताई जा रही है.
स्थानीय समीकरणों में नया संतुलन
किसी लंबे समय से सक्रिय स्थानीय नेता की पार्टी में वापसी का असर संगठन के अंदर भी पड़ता है. ऋतिक सिन्हा के मामले में भी उनकी वापसी से स्थानीय नेतृत्व और संगठनात्मक समीकरणों में नया संतुलन बनना स्वाभाविक है. निष्कासन खत्म होने के बाद अब मुख्यधारा में लौटने से संगठन के अलग-अलग स्तरों पर उनकी भूमिका को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होना स्वाभाविक है.
अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में ऋतिक सिन्हा को संगठन में कौन-सी भूमिका मिलती है और उनकी वापसी के बाद गरियाबंद नगर कांग्रेस की स्थानीय राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है.
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