परिजनों और छात्रों ने स्कूल गेट पर जड़ा ताला, छप्पर के नीचे पढ़ने को मजबूर मासूम, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ फूटा गुस्सा, मिला आश्वासन

Family members and students locked the school gate; innocent children forced to study under a thatched roof; outrage erupted over the dismal state of the education system; assurances were received.

परिजनों और छात्रों ने स्कूल गेट पर जड़ा ताला, छप्पर के नीचे पढ़ने को मजबूर मासूम, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली के खिलाफ फूटा गुस्सा, मिला आश्वासन

सोनेसिली में जर्जर स्कूल पर फूटा गुस्सा, पालकों-छात्रों ने जड़ा ताला
अभनपुर-गोबरा नवापारा/सोनेसिली : विकासखंड अभनपुर के ग्राम सोनसिल्ली में जर्जर स्कूल भवन के विरोध में पालकों और छात्रों ने स्कूल पहुँचते ही स्कूल पर जड़ा ताला कर जमकर प्रदर्शन किया. अभनपुर ब्लॉक गोबरा नवापारा क्षेत्र के क्षेत्र के सोनेसिली मिडिल स्कूल में जर्जर भवन को लेकर पालकों और छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। सुरक्षा को खतरे में देखते हुए पालकों और छात्रों ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और नए भवन की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. इस पूरे प्रदर्शन के दौरान स्कूल के शिक्षक असहाय होकर कुछ दूरी पर मूकदर्शक बने रहे. मौके पर शिक्षा विभाग के अधिकारी पहुंचे.
सोनेसिली में वर्ष 2016 में प्राथमिक स्कूल भवन को जर्जर घोषित कर तोड़ तो दिया गया. लेकिन इसके बाद नए भवन का निर्माण नहीं किया गया. अब पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भवन भी पूरी तरह जर्जर हो चुका है. दीवारों और छत में दरारें आने से हर समय हादसे का खतरा बना हुआ है.
भवन की कमी की वजह से छात्र खुले में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. पालकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है. कई बार प्रशासन और शिक्षा विभाग से नए भवन की मांग की गई. लेकिन अब तक सर्फ आश्वासन ही मिला है. पालक आज सुबह स्कूल पहुंचे. स्कूल गेट में ताला जड़ दिए ताला जड़ने की खबर मिलते ही बीईओ और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे.
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक दोनों स्कूल एक ही परिसर में दो पाली में संचालित होते हैं। दोनों भवन जर्जर हो चुके हैं और कभी भी ढह सकते हैं. लगातार बारिश के कारण भवन की स्थिति और अधिक खतरनाक हो गई है. उनका कहना है कि यदि पढ़ाई के दौरान किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. जिससे मासूम बच्चों की जान जोखिम में पड़ जाएगी.
वहीं अभनपुर एसडीएम रवि सिंह ने कहा कि इस मामले में उनकी विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) से चर्चा हो चुकी है. उन्होंने आश्वस्त किया कि नए स्कूल भवन के निर्माण के लिए शीघ्र आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बच्चों को सुरक्षित स्कूल भवन कब मिलेगा. अब सभी की नजर शिक्षा विभाग और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है.
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एक साल से अधूरा स्कूल भवन, छप्पर के नीचे पढ़ने को मजबूर मासूम, प्रशासन की अनदेखी से ग्रामीणों में आक्रोश
गरियाबंद : गरियाबंद जिले के आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत बेगरपाला के आश्रित ग्राम पंडरीपानी में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सामने आई है. यहां प्राथमिक शाला भवन का निर्माण कार्य करीब एक साल से अधूरा पड़ा है. पुराने भवन की छत तो तोड़ दी गई लेकिन नया निर्माण शुरू नहीं होने से मासूम बच्चों को मजबूरी में अस्थायी छप्पर के नीचे पढ़ाई करनी पड़ रही है.
ग्रामीणों के मुताबिक भवन निर्माण के नाम पर पुराने स्कूल की छत हटाकर काम बीच में ही छोड़ दिया गया. स्कूल खुलने के बाद भी न तो नया भवन तैयार हुआ और न ही बच्चों के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की गई. ऐसे में शिक्षक और छात्र बारिश, गर्मी और अन्य विपरीत परिस्थितियों के बीच छप्पर के नीचे कक्षाएं संचालित करने को मजबूर हैं.
बरसात के मौसम में हालत और भी चिंताजनक हो जाती है. तेज बारिश और हवा की वजह से पढ़ाई बार-बार बाधित होती है. वहीं छप्पर के नीचे बैठने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में लगातार चिंता बनी हुई है. ग्रामीणों का कहना है कि इस बारे में कई बार संबंधित अधिकारियों और शिक्षा विभाग को शिकायत की जा चुकी है. लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया.
ग्रामीणों और पालकों ने जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग से मांग की है कि अधूरे पड़े विद्यालय भवन का निर्माण तत्काल शुरू कराया जाए. ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण में शिक्षा मिल सके. उनका कहना है कि शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड है.
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक साल से अधूरे पड़े इस स्कूल भवन पर प्रशासन कब संज्ञान लेगा और पंडरीपानी के मासूमों को छप्पर से पक्के स्कूल भवन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कब निभाई जाएगी.
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