दो दिन में मेडिकल कॉलेज से बिना डिस्चार्ज 10 मरीज फरार, अस्पताल प्रबंधन की निगरानी में बड़ी लापरवाही उजागर

10 patients absconded from the medical college without being discharged in two days, major negligence exposed in the monitoring of hospital management

दो दिन में मेडिकल कॉलेज से बिना डिस्चार्ज 10 मरीज फरार, अस्पताल प्रबंधन की निगरानी में बड़ी लापरवाही उजागर

रायगढ़ : रायगढ़ जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल संत गुरु घासीदास मेडिकल कॉलेज अस्पताल में लापरवाही और अव्यवस्था की परतें एक बार फिर सामने आ गई हैं. बीते दो दिनों के भीतर इलाजरत 10 मरीज बिना डिस्चार्ज हुए अस्पताल से फरार हो गए. जिससे प्रबंधन की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
फरार मरीजों में से चार मरीज मेल मेडिकल वार्ड से थे. यह वही वार्ड है जहां मरीजों की निगरानी के लिए अलग से स्टाफ तैनात रहता है. लेकिन इसके बावजूद मरीजों का इस तरह भाग जाना यह दर्शाता है कि अस्पताल में 24 घंटे निगरानी के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं. अस्पताल प्रबंधन ने इन घटनाओं की सूचना चक्रधर नगर थाना में दर्ज कराई है. जिसमें फरार मरीजों की पहचान भी दी गई है. इनमें सुशीला साहू घरघोड़ा, शंकर आदित्य कबीर चौक, मोहन पटेल अंबेडकर आवास, संजय सोनवानी देवारपारा जूटमिल, श्याम कुमारी कोड़ातराई पुसौर, लोकेश खुंटे कुर्दा रायगढ़, आनंद, मंगतू, साहिल और कुशलदास शामिल हैं.
सूत्रों के मुताबिक अस्पताल में रात 10 बजे के बाद गार्ड, नर्स और वार्ड बॉय तक नींद में लीन हो जाते हैं. जिसकी वजह से कोई भी मरीज आसानी से बाहर निकल सकता है. अस्पताल में न तो सीसीटीवी कैमरों की पर्याप्त संख्या है. न ही कोई सख्त चेकिंग सिस्टम..
अस्पताल प्रबंधन की तरफ से इस मामले को हल्के में लिया जा रहा है. उनका कहना है कि कुछ मरीज मानसिक रुप से विक्षिप्त, नशे के आदी या पारिवारिक तनाव से ग्रसित हैं. इसलिए वे बिना बताए अस्पताल से चले जाते हैं. लेकिन यह तर्क लगातार बढ़ती घटनाओं के आगे टिक नहीं पा रहा है.
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले भी अस्पताल में इलाज के दौरान लापता हुए एक मरीज का शव अस्पताल के पीछे स्थित नाले के चेंबर में फंसा मिला था. उस घटना के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे. लेकिन व्यवस्थाओं में कोई ठोस सुधार नहीं किया गया. स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों में इस तरह की घटनाओं को लेकर गहरी चिंता है. अस्पताल की क्षमता भले ही बड़ी हो. लेकिन यहां की अव्यवस्थाएं मरीजों को असुरक्षित महसूस करवा रही हैं. जिसके कारण वे इलाज बीच में छोड़कर चले जाते हैं.
प्रशासन को चाहिए कि अस्पताल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए. रात्रिकालीन ड्यूटी में सख्ती हो. स्टाफ की नियमित निगरानी की जाए. आने-जाने वालों की पहचान और कारण पूछे बिना प्रवेश न दिया जाए. जब तक इन व्यवस्थाओं में सुधार नहीं होगा. ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी और आम जनता का भरोसा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से उठता जाएगा.
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