हाईकोर्ट में बृजमोहन अग्रवाल की चुनौती के बाद उप मुख्यमंत्री का दौरा रद्द, जंबूरी पर सरकार की सफाई- भारत स्काउट एंड गाइड का जेम में रजिस्ट्रेशन नहीं
Deputy Chief Minister's visit cancelled after Brijmohan Agrawal's challenge in the High Court; Government clarifies on Jamboree - Bharat Scouts and Guides not registered with GeM
रायपुर : छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के दो साल पूरे होते-होते पार्टी के भीतर अब तक का सबसे बड़ा और खुला टकराव सामने आ गया है। रायपुर सांसद और भाजपा के दिग्गज नेता बृजमोहन अग्रवाल ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी ही सरकार और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मामला अब बिलासपुर हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है और इसने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है.
यह विवाद सिर्फ पद या अधिकार का नहीं, बल्कि करीब 15 करोड़ रुपये के कथित फर्जी टेंडर, काम पहले कराने और बाद में टेंडर जारी करने तथा सरकारी धन के संदिग्ध लेन-देन से जुड़ा है. जिसको पहली बार मध्य भारत परिदृश्य ने उजागर किया था. इन्हीं आरोपों को आधार बनाकर बृजमोहन अग्रवाल ने सरकार को सीधे कठघरे में खड़ा किया है.
भारतीय स्काउट्स एंड गाइड्स की राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच गुरुवार को उस वक्त बड़ा राजनीतिक संकेत सामने आया. जब उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा का संशोधित प्रोटोकॉल जारी कर दिया गया
पहले जारी कार्यक्रम में जहां विजय शर्मा का शुक्रवार को बालोद के दुधली गांव पहुंचकर स्काउट एंड गाइड्स की राष्ट्रीय जंबूरी के उद्घाटन में शामिल होना तय था. वहीं संशोधित प्रोटोकॉल में उनका दुधली जाना पूरी तरह रद्द कर दिया गया.
सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का ऐन मौके पर इस विवादित आयोजन से पीछे हटना अब सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं. बल्कि भाजपा सरकार और पार्टी संगठन के भीतर चल रही पहली खुली लड़ाई को कम करने की नजर से देखा जा रहा है.
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा को लेकर गुरुवार को दो अलग-अलग आधिकारिक प्रोटोकॉल सामने आए. पहले प्रोटोकॉल के तहत विजय शर्मा का नया रायपुर से हेलीकॉप्टर द्वारा बालोद के दुधली गांव पहुंचना तय था. दुधली में राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने का उल्लेख भी था. फिर कार्यक्रम के बाद बलौदाबाजार और रायपुर वापसी का पूरा शेड्यूल था.
नए शेड्यूल में दुधली जाने का कार्यक्रम पूरी तरह हटाया गया. सिर्फ बलौदाबाजार (दमाखेड़ा) के प्रस्तावित मेले की बैठक में शामिल होने का उल्लेख.. जंबूरी से संबंधित किसी भी कार्यक्रम का नाम तक नहीं है.
राजनीतिक हलकों में इसे सरकार द्वारा विवाद से दूरी बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. क्योंकि इस आयोजन से पहले ही पार्टी ने दूरी बना ली थी. क्योंकि पिछले तीन दिनों से कांग्रेस लगातार जंबूरी को लेकर वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर घोटाले के आरोप लगा रही है. सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने आयोजन को स्थगित करने की घोषणा की. इसके बावजूद भाजपा के किसी भी प्रवक्ता का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया.
सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व पहले ही इस आयोजन से दूरी बना चुका है. यही वजह है कि विजय शर्मा के बाद अब संकेत मिल रहे हैं कि विभागीय मंत्री गजेंद्र यादव के अलावा कोई अन्य मंत्री मंच साझा नहीं करेगा.
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को बयान दिया, ‘जंबूरी शुरु हो रही है, यह प्रदेश के लिए गर्व की बात है.’
हालांकि मुख्यमंत्री के अलावा सरकार के किसी अन्य वरिष्ठ नेता का बयान सामने नहीं आया. क्योंकि बुधवार को सरकार के दो-दो मंत्री का इस आयोजन को लेकर बयान आया था और उन मंत्रियों ने यह दावा तक किया था कि विवाद सुलझ गया.
दरअसल इस आयोजन के टेंडर को लेकर पहले गड़बड़ियां सामने आईं. फिर यह पूरा विवाद तब और गहराया जब भारत स्काउट्स एंड गाइड्स की राज्य परिषद की बैठक में बृजमोहन अग्रवाल की अध्यक्षता में जंबूरी स्थगित करने का फैसला लिया गया. राज्य आयुक्त इंद्रजीत सिंह खालसा ने इसे भ्रामक बताते हुए जंबूरी तय समय पर होने का दावा किया.
गुरुवार को विजय शर्मा का प्रोटोकॉल बदले जाने की घटना के पीछे की वजह स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के स्काउट एंड गाइड्स के पदेन अध्यक्ष होने को हाईकोर्ट में चुनौती देना बताया जा रहा है और चुनौती भी किसी और ने नहीं बल्कि खुद सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने दी है. इसके बाद पार्टी और सरकार दोनों ने धीरे-धीरे अपने कदम पीछे खींचने शुरु कर दिए.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय शर्मा का संशोधित प्रोटोकॉल इसी बदले हुए समीकरण का नतीजा है.
पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने इस पूरे विवाद पर तीखा तंज कसते हुए कहा, ‘बृजमोहन जैसे वरिष्ठ नेताओं की हालत देखकर दुख होता है. ऐसा पहली बार हो रहा है कि भाजपा की सरकार रहते हुए उसके ही वरिष्ठ नेता को स्काउट एंड गाइड्स जैसे मामले में कोर्ट जाना पड़ रहा है.
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जंबूरी टेंडर घोटाला पर सरकार की नई सफाई, ‘भारत स्काउट्स एंड गाइड के पास जेम में नहीं है रजिस्ट्रेशन‘
नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी आयोजन में टेंडर गड़बड़ी पर राज्य सरकार ने अपनी बचाव के लिए नया तर्क दिया है. जिसमें कहा गया है कि भारत स्काउट एंड गाइड का जेम में रजिस्ट्रेशन नहीं है. इस कारण सारा काम एक समिति की स्वीकृति के जरिए करवाया जा रहा है. बता दें कि 4 दिन के इस आयोजन में 10 करोड़ रुपए खर्च होने हैं. जिस पर शुरुआती दिन से ही गड़बड़ी का आरोप लग रहा है. इस पर पहले स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने पहले कहा था कि एनएसएस के वार्षिक आयोजन का कैलेंन्डर साल भर के लिए तैयार होता है. इसलिए हड़बड़ी और गड़बड़ी का कोई सवाल ही नहीं उठता.
सवालों पर सरकार की हामी
बालोद जिले में आज से शुरु इस राष्ट्रीय आयोजन खर्च को लेकर उठे सवालों पर सरकार ने कबूल किया है कि इस आयोजन के लिए जेम के जरिए टेंडर नहीं किया गया. सरकार का तर्क है कि एनएसएस की राष्ट्रीय इकाई यानी भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की नेशनल बॉडी का जेम पोर्टल पर पंजीकरण नहीं होने के कारण यह प्रक्रिया अपनाना संभव नहीं था.
26 नवंबर 2025 को एनएसएस ने डीपीआई को पत्र लिखकर बता दिया था कि राष्ट्रीय संस्था का जेम आईडी पंजीकृत नहीं होने के कारण टेंडर प्रक्रिया में देरी हो रही है. ऐसे में व्यवस्थाओं के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, बालोद को अधिकृत करने का निवेदन किया गया. इसके बाद यह काम शुरु हुआ.
समिति के जरिए स्वीकृति
टेंडर प्रक्रिया को लेकर सरकार का कहना है कि टेंडर की शर्तों के निर्धारण के लिए कलेक्टर बालोद ने क्रय समिति गठित की है. इस समिति के अध्यक्ष अपर कलेक्टर, एडीएम बालोद हैं, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी सचिव के रूप में शामिल हैं. अध्यक्ष और सचिव सहित कुल नौ सदस्यीय समिति गठित की गई है. जो टेंडर से संबंधित सभी प्रक्रियाओं की निगरानी कर रही है.
10 करोड़ में आयोजन
दरअसल बालोद जिले के दुहली में 9 से 13 जनवरी तक आयोजित राष्ट्रीय जंबूरीे में करीब 12 हजार रोवर और रेंजर शामिल हो रहे हैं. इसके अलावा विदेशों से भी रोवर, रेंजर और ऑफिशियल्स के आने की सूचना है। इनके लिए बिजली, पानी, आवास सहित सभी जरुरी तैयारियां राज्य इकाई द्वारा की गई हैं. देश भर से करीब 1500 स्टाफ की तैनाती की गई है. शासन द्वारा जंबूरी के लिए कुल 10 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है. जिसमें से 5 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है. जबकि बाकी 5 करोड़ रुपये की मांग शासन से की गई है.
सवाल जस का तस
राज्य सरकार ने टेंडर विवाद पर सफाई तैयार कर ली है. लेकिन इस सफाई ने नया सवाल उठा दिया है। वह यह कि भारत स्काउट्स एंड गाइड 1969 की संस्था है. हर साल कई बड़े आयोजन करती है. सभी आयोजन में करोड़ों रुपए खर्च होते हैं. क्या उन सभी के लिए नियमों को दरकिनार कर खरीदी की जाती है?
कांग्रेस ने की जांच की मांग
कांग्रेस का मानना है कि बच्चों से जुड़े इस बड़े आयोजन में करप्शन आरोपों की गंभीर जांच होनी ही चाहिए. पहली बार कोई बीजेपी सांसद अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट गए हैं. जाहिर है ये स्थिति बीजेपी के लिए बड़ा चैलेंज बन चुकी है. सवाल है कि ये हालत क्यों बने? क्या वाकई कमीशन के लिए नेताओं की लड़ाई का खामियाजा जनता भुगत रही है?
जंबूरी में होंगी विविध गतिविधियां
5 दिवसीय इस आयोजन के दौरान प्रतिभागी कई सांस्कृतिक, बौद्धिक और साहसिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे-
मार्च पास्ट एवं क्लोजिंग सेरेमनी
एथेनिक फैशन शो
एडवेंचर एरिया और वॉटर स्पोर्ट्स
उप शिविर गतिविधियां व ओवरनाइट हाइक
कैप फायर, रोड कैम्प फायर
राज्य प्रदर्शनी और कैंप क्राफ्ट
आदिवासी कार्निवल और स्टेट गेट
राष्ट्रीय युवा दिवस कार्यक्रम
पायनियरिंग प्रोजेक्ट
मास ट्री प्लांटेशन
आपदा प्रबंधन एवं बैंड प्रतियोगिता
युवा सांसद, फॉक डांस, क्विज प्रतियोगिता
बैकवुडमैन कुकिंग आदि
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