80 हजार लेकर नाबालिग की डील, एसपी का बड़ा एक्शन, हवलदार और आरक्षक सस्पेंड, TI को नोटिस जारी, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

A minor was struck for 80,000 rupees, leading to major police action by the Superintendent of Police (SP), who suspended a constable and a constable. A notice was issued to the TI, raising questions about police performance.

80 हजार लेकर नाबालिग की डील, एसपी का बड़ा एक्शन, हवलदार और आरक्षक सस्पेंड, TI को नोटिस जारी, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

बिलासपुर/कोटा : बिलासपुर जिला के कोटा थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. आरोप है कि गांजा बेचने के मामले में पकड़े गए एक 13 साल के नाबालिग आरोपी को थाने लाने के बाद कथित रुप से 80 हजार रुपये लेकर छोड़ दिया गया. मामले की जानकारी मिलते ही SSP ने प्रधान आरक्षक प्रकाश दुबे और आरक्षक  सोमेश्वर साहू को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है.
मिली जानकारी के मुताबिक शनिवार शाम को कोटा पुलिस की टीम ने रानीसागर क्षेत्र में दबिश दी थी. इस कार्रवाई के दौरान टीम ने एक नाबालिग को पकड़ा. जिस पर गांजा बिक्री से जुड़ा होने का शक था. उसे पूछताछ के लिए थाने लाया गया. बताया जा रहा है कि नाबालिग का पिता गांव में गांजा बेचने का काम करता है. बेटे के पकड़े जाने की खबर मिलते ही वह सक्रिय हो गया. 
आरोप है कि नाबालिग को छोड़ने के बदले में पुलिस जवानों ने पहले 2 लाख रुपये की मांग की. सौदेबाजी के बाद 80 हजार रुपये में सौदा तय हुआ. परिजनों ने गांव में ब्याज पर रकम की व्यवस्था कर पुलिसकर्मियों को सौंप दी. इसके बाद नाबालिग को छोड़ दिया गया.  
सूत्रों के मुताबिक कोटा के मुख्य चौक में एक जूता दुकान में रानीसागर पारा में रहने वाले नाबालिग के परिवार से यह सौदा हुआ. फिर नाबालिग को थाने से छोड़ा गया. 
इस मामले में शुरुआती जांच के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने कार्रवाई करते हुए प्रधान आरक्षक प्रकाश दुबे और आरक्षक सोमेश्वर साहू को सस्पेंड कर दिया है. उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे। उसके आधार पर आगे सख्त कार्रवाई की जाएगी.
वहीं इस मामले में थानेदार की लापरवाही और संलिप्तता के आरोपों पर कोटा टीआई नरेश चौहान को भी SSP ने स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. वहीँ टीआई नरेश चौहान इस मामले से खुद को पाक साफ बता रहे हैं.
लेकिन सूत्र कहते है कि फरार बंजारे के नाबालिग लड़के को छोड़ने दो लाख रुपए से डील शुरू हुई और 80 हजार रुपए में बात बनाते ही वसूली की रकम जैसे ही पुलिस कर्मियों के हाथ आई नाबालिग को थाने से चलता कर दिया गया. वही इस मामले में मोहनभाटा निवासी पेशेवर जुआरी और बिचौलिया किसी खांडे का नाम भी सामने आ रहा है. इस घटना की बू फैलते ही फुट वेयर शॉप का संचालक भी फरार बताया जा रहा है.
गौरतलब है कि वर्तमान कोटा थाना प्रभारी नरेश चौहान पर रतनपुर थाना के प्रभारी रहने के दौरान भी कोयला, शराब के अवैध कारोबारियों से मिली भगत के गंभीर आरोप लगे थे. इतनी शिकायतों के बाद कुछ दिन लाइन अटैच रख फिर से टीआई चौहान को कोटा थाना का चार्ज मिलने पर विभाग में अलग-अलग तरह की चर्चाएं चल रही है. इधर अब 80 हजार रुपए लेकर नाबालिग को थाने से छोड़े जाने के मामले में प्रहार पुलिसिंग की साख पर बट्टा लगने का आरोप है.
आरोप है कि इस पूरे मामले में जैसे तैसे कर टीआई चौहान ने खुद को बचा लिया और सारा ठीकरा प्रधान आरक्षक प्रकाश दुबे और आरक्षक सोमेश्वर पर मढ़ दोनों को बलि का बकरा बना दिया। जिले के पुलिस विभाग में एक बार फिर चर्चा छिड़ गई है कि आखिर छोटे कर्मचारियों पर ही कार्रवाई का डंडा क्यों चलता है. जबकि बिना थाना प्रभारी के इशारे के बिना कुछ भी करना संभव नहीं.
कोटा पुलिस पर लग रहे गंभीर आरोप को लेकर टीआई नरेश चौहान से 'मिडिया ने फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने कहा है नशे के खिलाफ अभियान के बीच सूचना के आधार पर पुलिस कर्मी आरोपी को पकड़ने गांव गए थे. लेकिन वह नहीं मिला तो दबाव बनाने उसके नाबालिग बेटे को थाने ले आए. जिस बात पर मैने स्टॉफ को खूब डांटा भी था. आपको बिना बताए इतना कुछ कैसे हो गया के सवाल पर टीआई चौहान ने बस इतना ही कहा जानकारी लगते ही मैने स्टॉफ को डांटा था.
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