भारतमाला मुआवजा घोटाले के मास्टरमाइंड गोपाल गांधी अभनपुर और विधायक अजय चंद्राकर के भाई के घर ED की छापेमारी, मचा हड़कंप
ED raids the homes of Bharatmala compensation scam mastermind Gopal Gandhi Abhanpur and MLA Ajay Chandrakar's brother, causing a stir.
अभनपुर : भारतमाला मुआवजा घोटाले में लंबे समय से घिरे नामों पर कार्रवाई की गाज गिरनी शुरू हो गई. अभनपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित तौर पर 13 करोड़ रुपए के मुआवजा घोटाले में शामिल गोपाल गांधी के ठिकानों पर छापेमारी कर पूरे मामले में हलचल मचा दी है. इधर ईडी की टीम ने अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र के ठिकानों पर छापेमारी की. इसके साथ ही पूर्व राइस मिल अध्यक्ष रोशन चंद्राकर के ठिकानों पर भी जांच एजेंसी की कार्रवाई जारी है. हालांकि अभी तक प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने रेड की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
ईडी की टीम ने गोपाल गांधी के नायकबांधा मार्ग स्थित आवास सहित रायपुर और धमतरी मार्ग पर स्थित दो दुकानों दो दुकानों पर एक साथ दबिश दी है. ईडी के अधिकारियों ने सुबह 6 बजे ही गोपाल गांधी के घर का दरवाजा खटखटाया है. फिलहाल अधिकारियों की टीम दस्तावेजों की जांच कर रही है और तलाशी अभियान भी जारी है.
यह वही घोटाला है जिसे पब्लिक स्वर ने साल 2023 से लगातार उजागर किया. लेकिन तब जिम्मेदारों ने आंखें मूंद रखी थीं. अब जब ED ने दस्तक दी है. तो कई बड़े नामों की नींद उड़ना तय है.
सूत्रों के मुताबिक गोपाल गांधी ने अपने ही परिवार के सदस्यों के नाम पर फर्जी तरीके से मुआवजा राशि निकालकर शासन को करीब 13 करोड़ रुपए की चपत लगाई. इस पूरे घोटाले में एक और बड़ा नाम अन्नू तारक का सामने आता रहा है. जिसे “मुख्य किरदार” बताया जाता है. लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. सबसे बड़ा सवाल:क्या राजनीतिक पनाह मिलते ही पाप धुल जाते हैं? क्या भाजपा में एंट्री लेने के बाद अन्नू तारक पर कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी?
अफसरों की भूमिका पर क्यों सन्नाटा?
घोटाले की जड़ें सिर्फ दलालों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि प्रशासनिक अफसरों की भूमिका भी गंभीर सवालों के घेरे में है.
1.पूर्व तहसीलदार कृष्ण कुमार साहू
2.अन्य संबंधित तहसीलदार
3.तत्कालीन SDM जगन्नाथ वर्मा
इन सभी पर कोलर क्षेत्र में पहले हुए घोटाले में अहम भूमिका के आरोप लगे. लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
ED की एंट्री से खुलेंगे कई राज
ED की जांच शुरू होते ही अब फाइलों में दबे सच बाहर आने की उम्मीद है. जिन लोगों ने सिस्टम का दुरुपयोग कर करोड़ों की बंदरबांट की. उनके खिलाफ क्या वाकई कड़ी कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी राजनीतिक दबाव में ठंडा पड़ जाएगा?
जनता का सवाल:कब होगी असली सफाई?
क्या सिर्फ छोटे खिलाड़ियों पर कार्रवाई होगी या असली “बड़े मगरमच्छ” भी कानून के शिकंजे में आएंगे?
पब्लिक स्वर लगातार इस घोटाले की परतें खोलता रहेगा… क्योंकि सवाल सिर्फ 13 करोड़ का नहीं, सिस्टम की साख का है.
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कुरुद : छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है. इस बार जांच की आंच पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक अजय चंद्राकर के परिवार तक पहुंच गई है. ईडी की टीम ने अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र के ठिकानों पर छापेमारी की। इसके साथ ही पूर्व राइस मिल अध्यक्ष रोशन चंद्राकर के ठिकानों पर भी जांच एजेंसी की कार्रवाई जारी है.
ईडी की टीम मौके पर मौजूद रहकर दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं. फिलहाल इस कार्रवाई ने प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है और सभी की नजरें आगे होने वाले खुलासों पर टिकी हुई हैं.
ED और EOW को मिली शिकायतों के मुताबिक भूपेंद्र चंद्राकार पर आरोप है कि उन्होंने न सिर्फ अभनपुर, बल्कि अन्य तहसीलों में भी अपने करीबियों के नाम पर करोड़ों रुपए का मुआवजा दिलवाया. विभागीय सूत्रों के मुताबिक अभनपुर के कायाबांधा में ही करोड़ों का मुआवजा प्राप्त किया गया. इसके अलावा दुर्ग, पाटन, राजनांदगांव के देवादा और मगरलोड तहसीलों में भी इसी तरह की अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं.
धमतरी में कुरूद के सरोजिनी चौक के पास भूपेंद्र चंद्राकर का घर है, जहां पर ईडी की टीम पहुंची हुई है. ईडी की टीम घर के अंदर जांच कर रही है. सुरक्षा के मद्देनजर सुरक्षाबल भी मौजूद हैं. घर के अंदर से ताला लगाया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति बाहर से अंदर ना जा सके.
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