गरियाबंद में जन्माष्टमी की रात शौच के लिए घर से बाहर निकली महिला से हैवानियत, इज्जत बचाने निर्वस्त्र भागने हुई मजबूर, आरोपी शंकर गिरफ्तार
In Gariaband, a woman who stepped out of her home to relieve herself on the night of Janmashtami was subjected to a barbaric assault; she was forced to flee naked to save her dignity. The accused, Shankar, has been arrested.
गरियाबंद/अमलीपदर/कोकड़ी माल : गरियाबंद जिले के अंतर्गत अमलीपदर थाना के कोकड़ी माल गांव में जन्माष्टमी की रात एक महिला के साथ हैवानियत का मामला सामने आया था, जिससे आरोपी ने महिला अपनी जान और सम्मान बचाने के लिए अपनी घर की तरफ निर्वस्त्र होकर भागने को मजबूर हुई. पुलिस ने इस मामले में आरोपी शंकर को गिरफ्तार कर लिया है.
मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार शाम करीब सात बजे महिला शौच होने के लिए घर से बाहर निकली थी. इसी दौरान दो युवक कथित तौर पर नशे की हालत में उसके साथ छीना-झपटी करने लगे. आरोप है कि महिला को सड़क से नीचे खींचकर ले जाया गया और उसके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया गया. पहनी हुई साड़ी और अन्य वस्त्र को जबरन उतार दिया गया. महिला किसी तरह वहां से बच निकली और बदहवास हालत में अपने घर पहुंची. उसने अपनी सास को घटना बताई. जिसके बाद ग्रामीणों को जानकारी हुई.
कथित घटनास्थल पर महिला के कपड़े और एक युवक के कपड़े, चप्पल और टॉर्च मिलने की बात भी सामने आई है. अब जरा सोचिए…अगर महिला जान बचाकर कई मीटर तक मुख्य सड़क से घर की तरफ भागी होगी. तो क्या उस रास्ते से वाहन नहीं गुजरे होंगे? क्या कोई राहगीर नहीं आया होगा? क्या किसी ने उसकी हालत नहीं देखी होगी? और अगर देखा होगा… तो क्या किसी ने एक कपड़ा दे दूं. क्यूँ नहीं सोचा ? कभी-कभी किसी की इज्जत ढकने के लिए अपना एक कपड़ा देना ही काफी होता है.
घटना की खबर पुलिस को दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया. इसके बाद बड़ी तादाद में ग्रामीण अमलीपदर थाना पहुंचे. पुलिस ने पूछताछ कर और बयान दर्ज किया. इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी शंकर नागेश पिता तिरपाल नागेश उम्र 26 साल निवासी माहौलपारा नवापारा को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 74, 73, 75, 64(1) और 115(1) के तहत कार्रवाई की गई और उसे न्यायिक हिरासत में जेल दाखिल कर दिया गया.
लेकिन सवाल अभी खत्म नहीं हुआ…सड़क पर गुजरने वाले लोग चुप क्यों थे?
एक आरोपी जेल पहुंच गया है. लेकिन क्या इससे महिलाओं के खिलाफ होने वाली हैवानियत रुक जाएगी? क्या क्षेत्र में बढ़ते नशे पर लगाम लगेगी? और क्या समाज अपराध का तमाशा देखने के बजाय पीड़ित की मदद के लिए आगे आएगा?
कृष्ण जन्माष्टमी हर साल आएगी… मंदिरों में घंटियां हर साल बजेंगी… लेकिन कोकड़ी माल की यह रात एक सवाल छोड़ गई- पुलिस ने कथित आरोपी को जेल भेज दिया है. अब जरुरत है कि समाज अपने भीतर के तमाशबीन को पहचाने.
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