छात्र आंदोलन की गूंज पहुंची गांव-गांव और कस्बों तक, शिक्षा मंत्री’ धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’, सोनम वांगचुक के समर्थन में जंगी रैली, जमकर प्रदर्शन

The echoes of the student movement reached every village and town; calls for Education Minister Dharmendra Pradhan to resign, a massive rally in support of Sonam Wangchuk, and intense protests.

छात्र आंदोलन की गूंज पहुंची गांव-गांव और कस्बों तक, शिक्षा मंत्री’ धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’, सोनम वांगचुक के समर्थन में जंगी रैली, जमकर प्रदर्शन

गरियाबंद : सोनम वांगचुक के समर्थन में और दिल्ली में शांति पूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों पर बर्बरता पूर्वक लाठी चार्ज के विरोध में आज मंगलवार को तहसील मुख्यालय मैनपुर नगर में झमाझम बारिश के बीच संयुक्त छात्र संघ द्वारा जंगी रैली निकाल जमकर प्रदर्शन किया. सर्वप्रथम संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर चौक में पूजा अर्चना किया गया. उसके बाद रैली निकाली गई. भारी बारिश के बाद भी रैली में क्षेत्र भर से सैकड़ों की तादाद में छात्र और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ता ,राजनीतिक दलों के नेता वरिष्ठ जन शामिल हुए. अपना समर्थन दिया. रैली नारेबाजी करते हुए एसडीएम कार्यालय मैनपुर पहुंची. जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा कर तत्काल शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने की मांग की गई.
सौंपे गए ज्ञापन में मांग किया गया है कि देश में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता एवं युवाओं के भविष्य में जुड़े गंभीर प्रश्नों को लेकर श्री सोनम वांगचुक सहित अनेक छात्र एवं युवा अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके में आवाज़ उठा रहे हैं. हम भी लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप उनकी न्यायोचित मांगों का समर्थन करते हैं. नीट पेपर लीक जैसी घटनाओं ने देश के लाखों छात्रों और उनके परिवारों का विश्वास प्रभावित किया है. इस तरह की घटनाओं की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरुरी है. ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.
हमारी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:-
1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए इस्तीफा लिया जाए.
2. नीट पेपर लीक प्रकरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए.
3. पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा के लिए शिक्षा व्यवस्था में प्रभावी एवं पारदर्शी सुधार किए जाएं.
4. जिन छात्रों की मृत्यु इम मामले से संबंधितं परिस्थितियों के कारण हुई है. उनके मामलों की निष्पक्ष जांच कर पात्र होने की स्थिति में उनके परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता एवं न्याय प्रदान किया जाए.
इस धरना प्रदर्शन में रैली में प्रमुख रूप से जिला पंचायत सदस्य श्रीमती लोकेश्वरी नेताम, आदिवासी नेता महेंद्र नेताम, जनपद सदस्य प्रताप सिंह मरकाम, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव, महामंत्री गेंदु यादव, मैनपुर कल के सरपंच गज्जू नेगी सुभाष मरकाम, अमन बाम्बोड, देवराज साहू, गगन नेगी, यूवराज नेताम, दुलेन्द्र नेगी, देवकी तिरधारी, गणेश सांडे, अमित रामटेके, रोमन नेगी, भोलेश ध्रुव, चंद्रकांत नेताम, लोगेश नेगी, कोमेश्वरी नागेश, झरना मरकाम,जयचंद मरकाम, उमेंद्र नेताम, ईश्वर ध्रुव, विशु ध्रुव, देवराज साहू, चेतन सोनवानी, युगदास वैष्णव, धीरज सोनी, पिंटू मरकाम, लल्लू,युवराज नेताम, खिलेंद्री नेताम, लुकेश्वरी नागेश, चाँदनी तीरधारी, प्रकाश ध्रुव, भावेश सागर, थलजीत दीवान, भेवराज नेताम, बसंत ध्रुव, अय्यूब रजा, विजेंद्र नेताम, निश्चल सांडिल्य, पियुश ग्वाले सहित सैकड़ों की तादाद में छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता, राजनीतिक दल के नेता मौजूद थे.
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कोरबा में सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरे लोग, सुभाष चौक पर किया गया एक दिवसीय धरना प्रदर्शन
कोरबा : शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिल्ली में हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरना स्थल से हटाने को लेकर देश भर में विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है. इसी कड़ी में सोमवार को आवाज फाउंडेशन के बैनर तले सुभाष चौक निहारिका में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया जिसमें अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा छात्र छात्राएं भी शामिल हुए.
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं और कथित पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है और सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए सोनम वांगचुक को हटाने की भी निंदा की.
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और युवाओं के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने का विरोध करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर आघात बताया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई. कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर कदम उठाने की मांग की.
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