सर्पदंश फर्जीवाड़े में बड़ा धमाका, डॉक्टर-बाबू के बाद अब सिम्स चौकी के 2 नगर सैनिक रामकुमार और रामेश्वर गिरफ्तार, पर्दे के पीछे चेहरा किसका?
Major breakthrough in the snakebite fraud case: following the arrest of the doctor, two Home Guard personnel from the SIMS police outpost—Ramkumar and Rameshwar—have now been arrested; who is the mastermind behind the scenes?
बिलासपुर : सिम्स अस्पताल के पुलिस चौकी की भारी बदनामी हो रही है. सालों से पदस्थ सिपाही अपनी अलग दुकानदारी डंके की चोट पर चलाते आ रहे थे. लाश में भी कमाई खोज लेने की कला ने आखिरकार उन्हें कानून के लंबे हाथों तक पहुंचा ही दिया. मिडिया ने सिम्स चौकी में हो रहे गोरखधंधे का खुलासा करते हुए आगाह किया था लेकिन आला अफसरों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और चौकी के पुलिस कर्मी बेखौफ होकर धंधेबाजी में लगे रहे. अब जबकि फर्जी सर्पदंश का मामला उजागर हुआ तो चौकी के दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार कर लिए गए.
रिमांड पर होगी पूछताछ
सिम्स चौकी के पुलिस कर्मी वकील हीरा खांडे गिरोह को शव आने की सूचना देते थे. मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिलाने के नाम पर पूरा गिरोह सक्रिय था. सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए SIMS पुलिस चौकी में घटना के दौरान एवं उसके बाद पदस्थ रहे दो पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है. दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी.
गिरफ्तार आरोपियों में रामकुमार पाटनवार उम्र 40 साल निवासी बंधवा पारा, सरकंडा और रामेश्वर भास्कर उम्र 53 साल निवासी सतनाम नगर, अमेरी शामिल हैं.
पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों पुलिसकर्मी हीरा खांडे गिरोह को SIMS अस्पताल में शव आने की सूचना उपलब्ध कराते थे. इसके बाद गिरोह का सदस्य मनहर अस्पताल पहुंचकर मृतकों के परिजनों को शासन से मिलने वाली सर्पदंश आपदा सहायता राशि का लालच देकर मौत की वजह सर्पदंश बताने के लिए तैयार करता था. जबकि कई मामलों में मौत दूसरी वजह से हुई थी.
दोनों पुलिसकर्मियों को गिरोह को सूचना देने तथा मृतकों के परिजनों को तैयार कराने में सहयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. मामले में पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए दोनों आरोपियों से पुलिस रिमांड के दौरान गहन पूछताछ की जाएगी. पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे भी वैधानिक कार्रवाई की आएगी.
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिर्फ छोटे-छोटे किरदार ही कानून के शिकंजे में आए हैं और इस पूरे खेल के बड़े चेहरे अभी भी बेखौफ हैं? जिन्होंने मुआवजा का आदेश जारी किया है. सूत्र बताते हैं कि अलग-अलग मामलों में कई डॉक्टरों से लगातार पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया व्यक्तिगत स्तर पर हुई या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था.
अब तक जिनकी गिरफ्तारी हुई उनमें शामिल हैं.
पूर्व डॉक्टर
अधिवक्ता
एसडीएम कार्यालय के रीडर
तहसीलदार कार्यालय के रीडर
बैंककर्मी
निगम से अटैच ड्राइवर
कथित वकील
मृतकों के परिजन
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