सरकारी कार्यक्रम में स्थानीय विधायक को आमंत्रित नही करना क्षेत्र की जनता के जनादेश का अपमान-अटल श्रीवास्तव, लोकतंत्र के लिए अच्छी परंपरा नहीं
Not inviting local MLA to government program is an insult to the mandate of the people of the area Atal Srivastava not a good tradition for democracy
बिलासपुर : कोटा विधानसभा के कोटा नगर पंचायत में कई योजनाओं के अंतर्गत सौदर्यीकरण उन्नयन एवं निर्माण कार्य लागत राशि 673.43 लाख का भूमि पूजन और लोकार्पण कार्यक्रम अरुण साव उपमुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण नगरीय प्रशासन मंत्री के मुख्य आतिथ्य में आयोजित किया गया. जिसका कार्ड वितरण हुआ तो उक्त कार्यक्रम में अतिथि की लिस्ट में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव का नाम नहीं देख कर कांग्रेस जनों में आकोश फैल गया.
जिसको लेकर ब्लॉक कांगेस कमेंटी अध्यक्ष आदित्य दीक्षित विधायक प्रतिनिधि नगर पंचायत कोटा कुलवंत सिंह ने ज्ञापन सौपकर अनुभागीय अधिकारी राजस्व अनुभाग कोटा के सामने विरोध दर्ज कराया और नाम नहीं जोड़ने पर धरना प्रदर्शन की चेतावनी भी दी.
ब्लॉक कांग्रेस कमेंटी ने कोटा चौक पर ब्लॉक अध्यक्ष आदित्य दीक्षित, रतनपुर ग्रामीण अध्यक्ष यासीन खान, विधायक प्रतिनिधि कुलवंत सिंह, आनंद जायसवाल, सुभाष अग्रवाल, शीतल जायसवाल, रियाज खोखर आदि के संयुक्त नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन एवं धरना दिया.
विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा कि नगर पंचायत कोटा के सरकारी कार्यक्रम में स्थानीय विधायक को आमंत्रित नहीं करना कोटा की मतदाताओं द्वारा दिये गए जनादेश का अपमान है. अटल श्रीवास्तव ने कहा कि मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री अरुण साव को यह ध्यान देना चाहिए कि अधिकारी किसके आदेश पर काम कर रहे हैं. और उपमुख्यमंत्री को यह भी ध्यान देना चाहिए कि सरकारी कार्यक्रमों का भाजपाईकरण न हो.
अटल श्रीवासतव ने कहा कि भाजपा नेताओं का नाम अतिथि के रुप में रखा गया जिसमें प्रदेश मंत्री भाजपा, जिलाध्यक्ष भाजपा, महामंत्री, उपाध्यक्ष और मण्डल अध्यक्ष के भी नाम रखे गये. लेकिन विधायक को अतिथि नहीं बनाया गया. आखिर अधिकारी किसके दबाव में काम कर रहे हैं? किसके आदेश पर विधायक की उपेक्षा की जा रही है? यह लोकतंत्र के लिए अच्छी परंपरा नहीं है.
विधायक अटल श्रीवास्तव ने बताया कि इस घटना को लेकर मैने विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह को पत्र लिखा है. घटना की जानकारी प्रदान की है और विशेषाधिकार के हनन की बात उठाई है. पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष चरण दास मंहत को भी प्रेषित किया है.
कार्यक्रम में विधायक को अतिथि के रूप में नहीं बुलाये जाने की कांग्रेस जनों ने भी निंदा की है. जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष प्रमोद नायक ने कहा कि तत्तकालीन कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार ने किसी भी सरकारी कार्यक्रम में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा नहीं कि सभी कार्यक्रमों में सरपंच, पार्षद, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य, विधायक एवं सांसदो को अतिथि बनाया जाता रहा है.
कोटा ब्लॉक अध्यक्ष आदित्य दीक्षित ने भी बताया कि कोटा विधानसभा में गौरव का क्षण था. उपमुख्यमंत्री अरुण साव जन्मदिन के अवसर पर कोटा पधारकर भूमि पूजन कर रहे थे. हम सब भी उनको बधाई देते. लेकिन पूर्वाग्रह से ग्रस्त कुछ नेताओ की वजह से अधिकारियों पर दबाव बनाकर स्थानीय विधायक की उपेक्षा की गई. इसलिए हमें विरोध करना पड़ा. आगे अगर ऐसी कार्यवाईयां जारी रही तो विरोध भी जारी रहेगा.
इस धरना प्रदर्शन में प्रमुख रुप से अरुण त्रिवेदी पूर्व न.पा.अध्यक्ष, सुरेश सिंह चौहान, लक्ष्मीनारायण दुबे, वीना मसीह, अरूण त्रिवेदी, फूलचंद अग्रहरी, दिलीप श्रीवास, शैलेश गुप्ता, बबलू, अहिरवार, देवेन्द्र कौशिक, छोटू खान, राजू सिदार, संतोष बघेल, भरत पटेल, अली कश्यप, पावक सिंह, पंचराम साहू, सहदेव राज, सतीश जोशी, संतोष मिश्रा, मदन कहरा, दामोदर क्षत्रीय, संतोष साहू, मनोज साहू, लक्ष्मीन बिंझवार, मुन्नी निर्मलकर, विनीता साहू, शिवकुमारी श्रीवास, सोनू मानिकपुरी, नाजरा, कल्लू कश्यप, हरीश नामदेव, कान्हा गुप्ता, अंकुर वैष्णव, आनंद मिश्रा, सत्यम सोनी, विषेश गुप्ता, संजू सिंह, चोलाराम नायक, पवन जायसवाल, अश्वनी टोडर सालिक कैवर्त, घनश्याम श्रीवास, धनसिंह, शांतनू आर्मो, करन, प्रशांत अग्रहरि सहित सैकड़ो कार्यकर्ता मौजूद थे.
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अभयनारायण राय, पूर्व मण्डी अध्यक्ष राजेन्द्र शुक्ला, पूर्व प्रदेश सचिव महेश दुबे, शिव बालक कौशिक, राजेन्द्र साहू आदि ने भी स्थानीय विधायक को अतिथि नहीं बनाये जाने पर आपत्ति जताई है.
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कांग्रेसी नेता ने कहा कि इतिहास गवाह है ऐसी सोंच कांग्रेस की कभी नहीं रही. ये बात बहुत कम्लोगों को मालूम है कि 1988 में अटल बिहारी वाजपेयी किडनी की समस्या से जूझ रहे थे. डॉक्टरो ने उन्हें जांच और इलाज के लिए अमेरिका जाने की सलाह दी थी. क्योंकि देश में इलाज संभव नहीं था. अटल बिहारी वाजपेयी के पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अमेरिका जाकर अपना इलाज करा पाते. इलाज न कराने पर उनकी जान भी जा सकती थी.
इस दौरान राजीव गांधी को उनकी किडनी की समस्या के बारे में पता चला. तो उन्होंने सुनिश्चित किया कि अटल बिहारी वाजपेयी का अमेरिका में इलाज हो सके. इसके लिए राजीव गांधी ने संयुक्त राष्ट्र जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम भी शामिल कर दिया. इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी अमेरिका गए और इलाज कराने के बाद लौटे.
अटल बिहारी वाजपेयी ने खुद इस पूरी घटना को इंटरव्यू के दौरान बताया और कहा था कि वह राजीव गांधी की बदौलत जीवित हैं. जब राजीव गांधी ने अटल बिहारी वाजपेयी की मदद की थी, तब अटल राज्यसभा सदस्य थे.
कांग्रेस ने पॉलिटिक्स की लड़ाई से परे इंसानियत को भी महत्व दिया.
विचारों में मतभेद जरूर होते थे. लेकिन यह आपसी मनमुटाव तक नहीं पहुंचते थे. कट्टर विरोधी होने के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी का देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु को पंसद करते थे. अटल भी नेहरु को उतना ही सम्मान देते थे. यही परंपरा आगे भी जारी रही. जब इंदिरा गांधी के हाथों में देश की कमान आई. इंदिरा कई बड़े मसलों पर अटल से राय-मशविरा लेने से कतई कतराती नहीं थीं.
यह तस्वीर उसी की बानगी है. यह जनसंघ के दिनों की है. तब शिमला समझौते को लेकर जनसंघ तीखा विरोध कर रहा था. अटल बिहारी वाजपेयी उन दिनों जनसंघ के सबसे कद्दावर नेताओं में शुमार थे. इंदिरा ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया था. बंद कमरे के बजाय इंदिरा ने बाहर जाकर उनसे अकेले में बात करने का फैसला किया. अचानक बारिश शुरू हो गई. इंदिरा ने तब अटल के सिर पर अपना छाता रखा था.
ऑर्गनाइजर के पूर्व संपादक और जाने-माने लेखक शेषाद्रि चारी इस पूरे किस्से के बारे में एक टीवी चैनल से जिक्र किया था. शेषाद्रि को इस तस्वीर की कहानी अटल जी ने ही बताई थी. तस्वीर में अटल बिहारी वाजपेयी इंदिरा को कुछ समझाते हुए दिखते हैं. इंदिरा गांधी ने इस दौरान छाता पकड़ा हुआ है.
देश में कांग्रेस की सरकार थी और भाजपा के नेता अटल बिहारी वाजपेयी को प्रतिनिधि बनाकर जेनेवा भेजा गया था. वाजपेयी ने 1999 की चुनावी रैली में किस्सा सुनाया था.
अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि 40 साल तक हम विरोध में थे. कभी हमने मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया. जब नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे और वह भारत के दूत बनकर जेनेवा गए थे. यह नजारा देख पाकिस्तानी दंग रह गए थे. सरकार किसी दल की और प्रतिनिधि विपक्ष का आया था.
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