बंसल बंधुओं पर 11 करोड़ फर्जीवाड़ा का आरोप, जान से मारने की धमकी, रिजर्व फारेस्ट में अवैध सड़क निर्माण, अब एक और FIR
Bansal brothers accused of fraud of 11 crores, death threats, illegal road construction in reserve forest, now another FIR
रायगढ़ : रायगढ़ के प्रसिद्ध व्यवसायी बंसल बंधु इन दिनों कानूनी शिकंजे में बुरी तरह फंसे हुए नजर आ रहे हैं. एक के बाद एक आपराधिक मामलों में नाम सामने आने से जिले में सनसनी फैल गई है. डोलोमाइट खनन से लेकर जंगल में अवैध सड़क निर्माण और धमकी जैसे मामलों में अब तक तीन गंभीर मामले बंसल बंधुओं के नाम दर्ज हो चुके हैं.
छत्तीसगढ़ के हाई प्रोफाइल ठगी मामले के आरोपीगण गुरु श्री मिनरल के मालिक, हजारों लाखों टन डोलोमाइट पत्थरों की निकासी में हेराफेरी कर खनिज, जीएसटी एवं अन्य विभागों को चूना लगाने वाले नानक बंसल और मुकेश बंसल ने अवैध तरीके से शेयर मार्केटिंग एवं डोलोमाइट खदान की आड़ करोड़ों रुपए इकठ्ठा कर दूसरों के पैसे पर आलीशान महल जैसा घर बनवाकर, कई लग्जरी कारें खरीद कर खुद को रायगढ़ का बहुत बड़े आदमी समझने लगे थे और हवा में उड़ने लगे थे.
कुछ इसी तरह का काम हुआ कि बंसल बंधुओं की उल्टी गिनती शुरु हो गई. इन्होंने रसूखदार, पहुंच वाले, राजनीति में पहुंच रखने वाले कुछ व्यापारियों को बाराद्वार के पास साढ़े 17 एकड़ जमीन जमीन बेचकर 11 करोड रुपए ले लिए गए थे. जब जमीन की नपाई की गई तब वह जमीन 12:30 एकड़ निकली. जिस पर थाने में ठगी का मामला दर्ज हो चुका है.
बंसल बंधुओं की जमीन तक पहुंचने के लिए कुछ लोगों की जमीन बीच में आ रही थी. तब उन्होंने सबसे रास्ता निकालने का झांसा दिया गया. मगर हर किसी ने रास्ता देने से इनकार कर दिया तब बंसल बंसल बंधुओं ने वन मद की भूमि से रास्ता निकालने का वन विभाग में आवेदन दिया गया था. तत्कालीन वन मंडल अधिकारी (DFO ) ने उनका आवेदन रद्द कर दिया. मगर पैसे की गर्मी होने की वजह से बंसल बंधुओं ने वन मंडल अधिकारी के आदेश को दरकिनार करते हुए “नू ये स र” समझ कर जबरन सड़क बना लीजिए. जिसकी जानकारी मिलने पर वन मंडल अधिकारी ने वन विभाग को आदेश देकर पूरी सड़क उखड़वा दी गई और दोनों पर शासकीय संपत्ति का जबरन अधिग्रहण करने का आपराधिक मामला दर्ज करवा दिया गया. इस तरह से अब बंसल बंधुओं के खिलाफ मामले आने शुरु हो गए हैं और आगामी दिनों में और भी मामले सामने आने की पूरी उम्मीद है. समाचार लिखे जाने तक 0007 नंबर के शौकीन नानक और मुकेश पुलिस की पकड़ से बाहर है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सक्ती जिले की पुलिस इनकी टोह लेने में लगी हुई है. इन दोनों के मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो चुके हैं. संभवत ये लोग अपनी अगली जमानत के लिए हाथ पैर पटक रहे हैं लेकिन जमानत जेल दाखिल होने के बाद ही मिल सकेगी. बरहालपुरा मामला बिलासपुर रेंज आई जी, डीजीपी छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री,गृह मंत्री, वित्त मंत्री के संज्ञान में आ चुका है. इसलिए इन भाइयों को जेल जाना ही पड़ेगा.
डोलोमाइट खनन में शर्तों का उल्लंघन और जान से मारने की धमकी
विगत 17 जुलाई 2025 को रघुवीर सिंह सिसोदिया, निवासी रायगढ़, ने पुलिस से शिकायत किया कि मुकेश बंसल और नानक बंसल ने डोलोमाइट खनन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए उनके साथ छल किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी. इस पर थाना बाराद्वार में धारा 420 (धोखाधड़ी), 506 (धमकी) और 34 (साझा अपराध) के तहत मामला दर्ज हुआ.
अव्यवस्थित खदान संचालन और गाली-गलौज की धमकी
11 जुलाई को ग्राम जेठा निवासी गणेशराम चंद्रा ने पुलिस को बताया कि मंगल मिनरल्स की खदान, जिसका संचालन मुकेश बंसल द्वारा किया जा रहा था. उसे बिना सुरक्षा उपायों के अचानक बंद कर दिया गया. जब गणेश चंद्रा ने निर्मल अग्रवाल (मैनेजर) से संपर्क कर आपत्ति दर्ज की. तो उसे उक्त दोनों द्वारा गालियां दी गईं और जान से मारने की धमकी दी गई. इस मामले में बाराद्वार पुलिस ने धारा 296 (शांति भंग करना), 3(5) और 351(2) (आपराधिक बल) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया.
रिजर्व फॉरेस्ट में अवैध सड़क निर्माण
सबसे गंभीर मामला बंसल बंधुओं द्वारा रिजर्व फॉरेस्ट के भीतर अवैध तरीके से सड़क निर्माण का सामने आया है. बिना किसी वन विभागीय अनुमति के जंगल के अंदर से डोलोमाइट परिवहन करने के लिए सड़क बनवा दी गई. बताया जा रहा है कि पंचायत से अनुमति लेकर काम किया गया. लेकिन यह वन अधिनियम 1927 और वन संरक्षण अधिनियम 1980 का खुला उल्लंघन है. क्योंकि ग्राम पंचायत को रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि पर सड़क निर्माण की अनुमति देने का कोई अधिकार नहीं है.
जब वन विभाग को इस घपले की भनक लगी,.तो DFO ने खुद मौके पर पहुंचकर JCB से सड़क को खुदवा दिया. लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि – क्या सिर्फ सड़क को खोद देने से जंगल में पेड़ों की अवैध कटाई और खनिज परिवहन जैसे गंभीर अपराध माफ हो जाएंगे?
क्या डोलोमाइट खनन घोटाले में अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच होगी?
जंगल की भूमि पर अवैध कब्जे और सड़क निर्माण पर FRA और पर्यावरणीय नियमों के तहत कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए राजस्व, खनिज एवं वन विभाग की संयुक्त कमेटी गठित की जाएगी?
बंसल बंधुओं पर एक के बाद एक आपराधिक शिकंजा कसता जा रहा है. FIR, DFO की कार्रवाई और स्थानीय लोगों की शिकायतों से साफ हो गया कि मामला सिर्फ व्यवसायिक मतभेद का नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर वन एवं खनिज कानूनों के उल्लंघन का है. अगर अब भी प्रशासन ने सख्ती नहीं दिखाई तो भविष्य में ऐसे मामलों से वन संपदा और ग्रामीण सुरक्षा दोनों को भारी नुकसान हो सकता है.
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