जंतर मंतर में बच्चों की बेरहमी से पिटाई, सड़कों पर छात्र-परिजन, दो प्रमुख मांगें मंजूर, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर आज तक का अल्टीमेटम, सवालों के घेरे में सरकार

Children brutally beaten at Jantar Mantar; students and families take to the streets; two key demands accepted; ultimatum set for the Education Minister's resignation by today; government under fire.

जंतर मंतर में बच्चों की बेरहमी से पिटाई, सड़कों पर छात्र-परिजन, दो प्रमुख मांगें मंजूर, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर आज तक का अल्टीमेटम, सवालों के घेरे में सरकार

नई दिल्ली : कांग्रेस नेता राहुल गांधी  ने शुक्रवार को 10 जनपथ स्थित अपने आवास पर NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे घायल छात्रों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला किया और उनके इस्तीफे की मांग की. राहुल गांधी ने कहा,’धर्मेंद्र प्रधान एक अपराधी शिक्षा मंत्री हैं. वे हमारे शिक्षा तंत्र के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रतीक हैं. उन्हें इस्तीफा देना ही होगा. उन्हीं की वजह से हजारों युवा आज सड़कों पर उतर आए हैं.’
घायल छात्र की चोट दिखाई, पैलेट गन का जिक्र
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साहिल लोचाब नाम के 19 साल के छात्र को अपने साथ बिठाया. उन्होंने छात्र की हाथ, पीठ और छाती पर लगी चोटों को मीडिया को दिखाया. राहुल ने कहा, ‘यह मेरा छोटा भाई है. यह तिरंगा लेकर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहा था. लेकिन पुलिस की पैलेट गन से घायल हो गया.’
कौन हैं साहिल लोचाब?
साहिल लोचाब उम्र 19 साल दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ का रहने वाला है. दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) का छात्र 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान जंतर मंतर पर पुलिस की पैलेट गन से दाहिनी आंख में गंभीर चोट आई.
AIIMS के जयप्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में उसकी सर्जरी हुई है. डॉक्टरों के मुताबिक आंख की पुतली को गंभीर नुकसान पहुंचा है. रोशनी लौटने की संभावना सिर्फ 1% है। साहिल की मां ज्योति ने बताया कि उनका बेटा हमेशा से पुलिस अधिकारी बनना चाहता था. वह CJP के प्रदर्शनों में पहले भी शामिल हो चुका था.
20 जुलाई की घटना
20 जुलाई को NEET पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में “संसद चलो” मार्च निकाला गया था. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. जिसमें 100 से ज्यादा छात्र और पुलिसकर्मी घायल हो गए. राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान को हटाया नहीं जाता. तब तक वे सरकार के साथ कोई बातचीत या चर्चा नहीं करेंगे. उन्होंने संसद में अपनी बात रखने के दौरान माइक बंद किए जाने का भी जिक्र किया. राहुल ने कहा कि शिक्षा मंत्री की वजह से पूरा शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और युवा आंदोलन पर उतर आए हैं.
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नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं को लेकर जारी विवाद के बीच शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी के विट्ठलभाई पटेल हाउस में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच एक अहम बैठक हुई. स्थिति का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने के लिए यह दोनों पक्षों के बीच तीसरी आधिकारिक बैठक थी, जो एक तटस्थ स्थल पर आयोजित की गई.
इस उच्चस्तरीय बैठक में सरकार की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और पीएमओ राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह शामिल हुए। वहीं दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी का प्रतिनिधित्व उसके राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास, आशुतोष रंका और एक अन्य युवा प्रतिनिधि ने किया. आपको बता दें कि इससे पहले 20 जुलाई को भी मंत्री के आवास पर जेपी नड्डा और सौरभ दास के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका के बीच दो बैक-टू-बैक बैठकें हो चुकी हैं.
बैठक के बाद मीडिया और एक्स (X) पर सामने आए बयानों में CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रंका ने पूरी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उनकी मुख्य मांग पर विचार करने के लिए कल शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है. CJP को पूरी उम्मीद है कि सरकार जल्द ही उन्हें इस पद से हटा देगी.
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार ने नीट परीक्षा के दौरान आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने और छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर व कानूनी मुकदमे वापस लेने की दोनों मांगों पर अपनी इन-पर्ल (सैद्धांतिक) मंजूरी दे दी है.
CJP की अन्य प्रमुख मांगें क्या हैं?
भले ही सरकार ने कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया हो, लेकिन CJP ने साफ कर दिया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते. तब तक उनका जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन इसी तरह जारी रहेगा. इस्तीफे की मांग के अलावा CJP की प्रमुख मांगों में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर जवाबदेही तय करना, देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाना, नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का भारी मुआवजा देना और आंदोलन में शामिल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी कानूनी कार्रवाइयों व एफआईआर को पूरी तरह से वापस लेना शामिल है.
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देश की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है. रोजगार, शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दों पर लगातार सड़कों पर उतर रहा युवा अब सत्ता से सीधे जवाब मांग रहा है. कई जगह हुए छात्र आंदोलनों ने यह संदेश दिया है कि नई पीढ़ी अपने भविष्य के सवालों पर चुप रहने को तैयार नहीं है.
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि जेन-जी और युवाओं के बीच बदलाव की चाह पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है. विपक्षी दलों का दावा है कि देश का बड़ा युवा वर्ग मौजूदा सरकार की नीतियों से असंतुष्ट है और इसका असर आने वाले चुनावों में दिखाई दे सकता है.
हाल के विरोध प्रदर्शनों, भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे विवादों और छात्रों के आंदोलनों ने सरकार पर कई सवाल खड़े किए हैं. विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि युवाओं की आवाज़ दबाने की कोशिश की जा रही है. जबकि सरकार इन आरोपों को खारिज कर अपनी योजनाओं और उपलब्धियों को सामने रख रही है.
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनावों में सबसे बड़ी भूमिका युवाओं की होगी. हालांकि “भाजपा का पूरे देश से सफाया तय है” या “80 प्रतिशत युवा एक ही दिशा में हैं” जैसे दावों की पुष्टि किसी आधिकारिक चुनाव परिणाम या सर्वमान्य सर्वेक्षण से नहीं हुई है. यह राजनीतिक दावे हैं. जिनका फैसला अंततः जनता मतदान के जरिए करेगी.
देश की राजनीति में माहौल गर्म है, आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं और युवा केंद्र में हैं. अब यह देखना होगा कि सड़कों पर दिख रहा आक्रोश मतदान केंद्रों तक पहुंचता है या नहीं. लोकतंत्र में आखिरी फैसला हमेशा जनता के वोट से ही होता है.
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