डेयरी का अपशिष्ट कर रहा जल को प्रदूषित, गंभीर बीमारियों के खतरे के साए में जीने को मजबूर ग्रामीणों ने किया धरना प्रदर्शन, दी आंदोलन की चेतावनी

Dairy waste is polluting the water, villagers forced to live under the threat of serious diseases staged a sit-in protest and warned of agitation

डेयरी का अपशिष्ट कर रहा जल को प्रदूषित, गंभीर बीमारियों के खतरे के साए में जीने को मजबूर ग्रामीणों ने किया धरना प्रदर्शन, दी आंदोलन की चेतावनी

महासमुंद : महासमुंद की नगर पंचायत तुमगांव में सैकड़ों महिला पुरुषों ने तुमगांव स्थित वामा डेयरी प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ सड़कों पर उतर के आंदोलन कर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंप कर 10 सूत्रीय मांगों को पूरा करने की मांग की है. ग्रामीणों का आरोप है कि वामा डेयरी से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी से खेत बंजर हो रहे हैं, पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है. वहीं दूषित पानी पीने से आसपास के पशु-पक्षी और जंगली जानवर मर रहे हैं.
विकास की अंधी दौड़ में अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों की अनदेखी हो जाती है. और इसका खामियाजा वहां रहने वाले सीधे-सादे लोग भुगतते हैं. ऐसा ही एक मामला तुमगांव में स्थापित वामा डेयरी (दूध फैक्ट्री) से निकलने वाले बदबूदार और विषैले अपशिष्ट जल का है. जिससे तुमगांव नगर पंचायत और आसपास के गांवों के लोग न सिर्फ परेशान हैं. बल्कि गंभीर बीमारियों के खतरे के साए में भी जी रहे हैं.
तुमगांव के अध्यक्ष बलराम कांत साहू ने नगर के आम नागरिकों के साथ वामा डेयरी (दूध फैक्ट्री) के सामने धरना प्रदर्शन पर बैठे. धरना प्रदर्शन में बड़ी तादाद में ग्रामीणजन एवं जनप्रतिनिधिगण मौजूद रहे.
नगर पंचायत तुमगांव के अध्यक्ष बलराम कांत साहू ने कड़े शब्दों में कहा कि अगर शासन प्रशासन और फैक्ट्री का मालिक तत्काल वामा डेयरी (दूध फैक्ट्री) से निकलने वाली जहरीले पानी का समाधान नहीं करता तो उग्र आंदोलन किया जाएगा और उग्र प्रदर्शन के दौरान कहीं कोई अप्रिय घटना घट गई तो उसकी पूरी जवाबदारी शासन प्रशासन एवं फैक्ट्री मालिक की होगी.
तुमगांव नगर पंचायत अध्यक्ष बलराम कांत साहू नें शासन प्रशासन से कहा कि जनहित को देखते हुऐ तत्काल नगर वासियों विषैले पानी के प्रकोप से जो इस फैक्ट्री से निकलने वाली बदबूदार एवं विषैले पानी से परेशान हैं इससे निजात दिलाया जाए.
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित वामा डेयरी (दूध फैक्ट्री) दूध प्रोसेसिंग यूनिट्स अपने उत्पादन के दौरान बड़ी मात्रा में अपशिष्ट जल उत्पन्न करती हैं. यह जल फैक्ट्री में दूध धोने, प्रसंस्करण, बॉटलिंग आदि प्रक्रियाओं के दौरान निकलता है, जिसमें कई प्रकार के रसायन, वसा, और अन्य जैविक तत्व घुले होते हैं. उचित उपचार के बिना जब यह अपशिष्ट जल सीधे नालों या खेतों में छोड़ा जाता है. तो यह मिट्टी, जल और वायु को प्रदूषित करता है.
तुमगांव एवं आसपास के क्षेत्र में वामा डेयरी (दूध फैक्ट्री) से फैली बदबू न सिर्फ असहनीय है. बल्कि यह हवा में मौजूद हानिकारक गैसों — जैसे मीथेन, अमोनिया और सल्फर डाइऑक्साइड — के कारण स्वास्थ्य के लिए भी बेहद नुकसानदेह है. ग्रामीणों में सांस की बीमारियाँ, त्वचा रोग, आंखों में जलन, और पेट से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ती जा रही हैं. बच्चों और बुजुर्गों पर इसका बुरा असर सबसे ज्यादा पड़ रहा है.
वामा डेयरी (दूध फैक्ट्री) से निकलने वाली दूषित जल खेतों में पहुंचने से मिट्टी की उर्वरता घट रही है। जलस्रोत — जैसे तालाब, नहरें और भूमिगत जल — भी इस जल से प्रभावित हो रहे हैं. ग्रामीणों के पीने और सिंचाई के पानी का स्रोत भी खतरे में आ गया है.
स्थानीय प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निष्क्रियता भी इस समस्या को और गहरा बना रही है. कई बार शिकायतों के बावजूद न तो फैक्ट्री मालिकों पर कोई कार्रवाई होती है और न ही किसी प्रकार की निगरानी या नियंत्रण प्रणाली लागू की जाती है.
समाधान की दिशा में कदम
इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) की स्थापना सभी दूध फैक्ट्रियों में अनिवार्य की जानी चाहिए.
स्थानीय प्रशासन को नियमित रूप से जल और वायु की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए.
जनजागरण के माध्यम से ग्रामीणों को प्रदूषण के प्रभाव और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए.
कानूनी कार्रवाई कर ऐसे उद्योगों को दंडित किया जाना चाहिए जो पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं करते.
वामा डेयरी (दूध फैक्ट्री) से निकलने वाला बदबूदार दूषित जल एक गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन चुका है. अगर इस पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया. तो इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक महसूस किया जाएगा. अब समय आ गया है कि हम सभी शासन, समाज और उद्योग — मिलकर इस संकट का समाधान निकालें.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
ttps://chat.whatsapp.com/LNzck3m4z7w0Qys8cbPFkB

421 रुपए की पेमेंट स्लिप काटकर 250 रुपए दे रहे मजदूरी

आज सुबह 10 बजे तुमगांव नगर पंचायत अध्यक्ष बलराम कांत साहू के नेतृत्व में वामा डेयरी में काम करने वाली महिलाओं और ग्रामीणों ने डेयरी के संचालकों पर ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक रूप से शोषण करने का आरोप लगाया हैं.
ग्रामीण महिलाओं ने कहा है कि वामा डेरी के संचालकों द्वारा महिलाओं से काम लिया जा रहा है और 9 घंटे काम के बदले मात्र 250 रुपए रोजी दी जा रही है, जबकि पेमेंट स्लिप में 421 रुपए रोजी की रसीद में ग्रामीण महिलाओं से हस्ताक्षर लिया जा रहा है.
सरकार के द्वारा बनाए गए श्रम कानून का पालन वामा डेयरी में नहीं किया जा रहा हैं। नगर पंचायत तुमगांव के अध्यक्ष बलराम कांत साहू ने कहा है कि वामा डेयरी में दिहाड़ी मजदूरी करने वाली महिलाओं को उनका हक नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा.

जया निर्मलकर, जो वामा डेयरी में पिछले 2 सालों से काम कर रही हैं, कहती हैं:- “हम दिन भर मेहनत करते हैं, गंदगी साफ करते हैं, दूध उठाते हैं, लेकिन हमें हक की आधी मजदूरी मिलती है। स्लिप में कुछ और लिखा होता है, मिलता कुछ और है.”
धनेश्वरी निर्मलकर भी इसी तरह की आपबीती सुनाती हैं:- “हम बोलते हैं तो नौकरी से निकाल देने की धमकी मिलती है। कोई सुनने वाला नहीं है। अधिकारी आते हैं तो दिखावे का सीन बनता है, फिर सब वैसा ही..
भारत में श्रम कानून के अनुसार दिहाड़ी मजदूरों को न्यूनतम वेतन, काम के घंटे, और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार है। पर्यावरण कानूनों के तहत औद्योगिक संस्थाओं को अपशिष्ट प्रबंधन के मानक पालन करने होते हैं। यदि वामा डेयरी इन कानूनों का पालन नहीं कर रही है तो यह एक दंडनीय अपराध है.
तुमगांव में अब सवाल यह उठता है कि यदि वामा डेयरी इतने वर्षों से प्रदूषण और शोषण कर रही थी, तो जिला प्रशासन क्यों चुप रहा? क्या वामा डेयरी को कोई राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? क्या स्थानीय या संबंधित विभागों के अधिकारियों ने कभी इसका निरीक्षण किया? क्या वामा डेयरी में मजदूरी कर रही महिलाओं से जाकर पूंछा कि कोई समस्या तो नहीं हो रही डेयरी प्रबन्धन द्वारा? क्या महिला सुरक्षा को लेकर बीच-बीच में सम्बंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा औचिक निरीक्षण किया गया?
अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस जनता की पुकार सुनेगा या फिर यह प्रदर्शन उग्र रूप लेकर बड़े जनांदोलन का कारण बनेगा?
क्या तुमगांव में वामा डेयरी द्वारा हो रहे महिला शोषण में जिला प्रशासन कोई कार्यवाही करेगा या चुप्पी साधे बैठेगा?
क्या वामा डेयरी एन जी टी के नियमों का पालन कर रहा है ?
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
ttps://chat.whatsapp.com/LNzck3m4z7w0Qys8cbPFkB