गरियाबंद पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद हाफिज खान ने प्रदेशवासियों को दी जश्न ए ईद मिलादुन्नबी की हार्दिक शुभकामनाएं
Gariaband East Block Congress President Mohammad Hafiz Khan extended warm greetings to the people of the state on the occasion of Eid-e-Milad-un-Nabi.
गरियाबंद पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद हाफिज खान ने प्रदेशवासियों को दी जश्न ए ईद मिलादुन्नबी की हार्दिक शुभकामनाएं

ईद मिलादुन्नबी के कार्यक्रमों में हजारों मुसलमान शिरकत करते हैं. इस दिन अपने कारोबार को बंद रख अपनी अकीदत का इजहार करते हैं. मुस्लिमों के मुताबिक, हजरत मुहम्मद साहब का पूरा जीवन अनुकरणीय है. उनके बाद कोई नबी या पैगम्बर (अवतार या दूत) नहीं आने वाला है. अल्लाह ने उनको सबसे आखिर में अपना दूत बनाकर भेजा. मुहम्मद साहब ने अल्लाह का पैगाम दुनिया वालों तक पहुंचा दिया. इसलिए मुहम्मद साहब का पैगाम न सिर्फ मुसलमानों के लिए है बल्कि रहती दुनिया तक अन्य लोगों के लिए भी है.
क्या है आखिरी पैगम्बर के संदेश
जिस वक्त मुहम्मद साहब की मक्का में पैदाइश हुई, उस वक्त के दौर को ‘जाहिली दौर’ यानी अंधकार युग कहा जाता है. 40 साल की आयु में मुहम्मद साहब को अल्लाह ने अपना दूत बनाया. हजरत मुहम्मद साहब 23 साल तक लोगों को अल्लाह का पैगाम सुनाते रहे. जिसमें एक अल्लाह की इबादत, उसके साथ किसी को शरीक नहीं करना, उनको अल्लाह का आखिरी रसूल मानना है. कहा जाता है कि उन पर ईमान लाने वाले साथियों ने दुनिया से अंधकार युग का खात्मा किया. क्योंकि कुरआन में है, पढ़ो अपने रब के नाम से.
कोई छोटा, कोई बड़ा नहीं, काले-गोरे सब बराबर हैं
बतौर अल्लाह के दूत (अवतार) अपने 23 साल की जिंदगी में पैगंबर-ए-इस्लाम ने दुनिया को 1450 साल पहले ये संदेश दिया के अल्लाह (ईश्वर) के सामने कोई बड़ा, कोई छोटा नहीं है. उनका साफ और सीधा संदेश था कि न गोरे काले से बेहतर हैं, न काले गोरे से बेहतर हैं, बल्कि सब बराबर हैं. अल्लाह के नजदीक एक इंसान दूसरे इंसान से नस्ल या क्षेत्र की बुनियाद पर बड़ा या छोटा नहीं है.
औरतों को संपत्ति में हक दिया
मुहम्मद साहेब के दौर में बच्चियों को ज़िंदा दफ्ना दिया जाता था, उस दौर में उन्होंने इसपर न सिर्फ रोक लगाई बल्कि औरतों को बराबरी का हक दिया. माता-पिता की संपत्ति में हिस्सेदार बनाया.
बेगुनाह इंसान के कत्ल को पूरी इंसानियत का कत्ल मुहम्मद साहब ने जमीन पर किसी भी तरह की हिंसा को नाजायज़ करार दिया. उनका संदेश था कि धरती पर किसी बेगुनाह का कत्ल पूरी इंसानियत (मानवता) का कत्ल है.
पैगंबर साहब की कहानी
पैगंबर मुहम्मद का जन्म लगभग 570 ईस्वी में मक्का में हुआ था. पैंगबर मोहम्मद इस्लाम के संस्थापक थे. पैगंबर मोहम्मद को एकेश्वरवाद (यानी ईश्वर एक है) का अंतिम पैगंबर माना जाता है, जो आदम, ईसा और अब्राहम जैसे अन्य पैगंबरों के बाद आए. पैगंबर मुहम्मद छह साल की उम्र में अनाथ हो गए थे, मोहम्मद साहब का पालन-पोषण उनके दादा और फिर चाचा अबू तालिब ने किया था. जब वह 40 साल के थे, तब उन्हें हीरा गुफा में फरिश्ता जिब्रील अलैहिस्सलाम से अल्लाह का पहला संदेश मिला. पैगंबर मोहम्मद को जो संदेश जिब्रील अलैहिस्सलाम से मिला, वही कुरान की पहली आयत है. यह घटना पैगंबर के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ थी. इसके बाद उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी अल्लाह का संदेश फैलाने में बिताया.
शुरुआत में मुहम्मद के मानने वाले बहुत कम थे. उन्हें मक्का के बहुदेववादियों (अनेक देवताओं में विश्वास करने वाले) से कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. 615 ईस्वी में पैगम्बर मोहम्मद और उनके मानने वालों को मक्का के लोगों से बहुत तकलीफ और जुल्म सहना पड़ा. इस वजह से पैगंबर मोहम्मद ने अपने कुछ साथियों को सुरक्षित जगह भेज दिया. पैगंबर मोहम्मद के मानने वाले अक्सुम साम्राज्य चले गए. वहां उस ईसाई हकूमत थी. यह इलाका आज के उत्तरी इथियोपिया और इरिट्रिया में आता है.
सात साल बाद 622 ई. में, पैगंबर मुहम्मद और उनके मानने वाले मक्का से 300 किलोमीटर उत्तर में मदीना शहर चले गए. कथित तौर पर हत्या के डर से पैगंबर मुहम्मद के मक्का से मदीना पलायन की. इस विशेष घटना को "हिजरा" कहा जाता है. यह इस्लामी हिजरी कैलेंडर की शुरुआत मानी जाती है.
पैगंबर मुहम्मद ने मदीना पहुंचने के बाद एक "मदीना चार्टर" तैयार किया, जिसे मदीना का संविधान भी कहा जाता है. ये चार्टर अलग-अलग कबीलों को एकजुट करता था. 630 ईस्वी में मुहम्मद ने एक 10,000 की सेना के साथ मक्का पर चढ़ाई की. इस जंग में पैगंबर मोहम्मद और उनकी फौज की जीत हुई. इसके बाद मक्का में बहुसंख्यक आबादी ने इस्लाम धर्म अपना लिया.
632 ईस्वी में, पैगंबर मुहम्मद ने हज (तीर्थयात्रा) की थी, जिसे भविष्य की सभी मुस्लिम तीर्थ यात्राओं के लिए एक मिसाल माना जाता है. हज के बाद पैगबंर मोहम्मद मदीना लौट आए. मदीना में वह कई दिनों तक बीमार रहे. 632 ई. में उन्होंने पर्दा ले लिया.



