जायदाद के लिए प्रेमिका का कत्ल, मां-पिता समेत 7 की हत्या, लोहे के बक्से में शव को भरकर बना दिया सीमेंट का चबूतरा, बच्ची की गुमशुदगी ने खोला राज

Girlfriend murdered for property; seven people, including parents, killed; bodies encased in cement inside an iron box to form a platform; disappearance of a child exposed the crime.

जायदाद के लिए प्रेमिका का कत्ल, मां-पिता समेत 7 की हत्या, लोहे के बक्से में शव को भरकर बना दिया सीमेंट का चबूतरा, बच्ची की गुमशुदगी ने खोला राज

रायपुर : छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित सीरियल किलिंग मामले में रायपुर के कुकुरबेड़ा निवासी अरुण चंद्राकर का नाम सबसे ऊपर आता है. वर्ष 2005 से 2012 के बीच उसने अपने पिता, पत्नी, साली, मामा ससुर, मकान मालिक समेत 7 लोगों की हत्या कर दी.
उसकी क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई लोगों को उसने पहले बेहोश किया और फिर जिंदा गड्ढे में दफना दिया. 6 साल तक किसी को इन हत्याओं की भनक तक नहीं लगी. पुलिस भी अलग-अलग गुमशुदगी के मामलों को जोड़ नहीं पाई. आखिरकार जनवरी 2012 में एक बच्ची की गुमशुदगी की जांच ने पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया.
चोरी की आदत ने घर से निकाला, अपराध की दुनिया में उतरा
अरुण मूल रूप से दुर्ग जिले के गुंडरदेही क्षेत्र के कचांदुर गांव का रहने वाला था. बचपन से ही उसे चोरी की लत थी. परिवार ने कई बार समझाया. लेकिन आदत नहीं बदली. आखिरकार 1994 में उसके पिता ने उसे घर से निकाल दिया. इसके बाद वह रेलवे स्टेशन पर रातें गुजारने लगा. छोटे-मोटे अपराध करता और जेल जाता रहा. पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वह 24 से ज्यादा बार जेल जा चुका था. जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात कई अपराधियों से हुई. वहीं से उसने अपराध को आसान कमाई का रास्ता मान लिया.
प्यार हुआ, शादी की…फिर जायदाद के लिए पत्नी को मार डाला
2008 में अरुण ने कुकुरबेड़ा की रहने वाली लिली से लव मैरिज की. दोनों ने नया घर बसाया और साथ रहने लगे. शुरुआत में सब नॉर्मल था. लेकिन कुछ ही समय बाद अरुण की नजर पत्नी और उसके रिश्तेदारों की संपत्ति पर पड़ गई.
उसने एक-एक कर अपने सबसे करीबी लोगों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया. पहले भरोसा जीतता था. फिर उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश करता था. इसके बाद पहले से खोदे गए गड्ढे में डालकर मिट्टी से ढंक देता. पुलिस के मुताबिक कई लोग उस वक्त जिंदा थे. लेकिन अरुण ने उन्हें तड़पकर मरने के लिए छोड़ दिया.
पिता को चलती ट्रेन से फेंका, रिश्तेदारों को लिखता रहा चिट्ठियां
अरुण ने सिर्फ जिंदा दफनाने तक खुद को सीमित नहीं रखा. उसने अपने पिता की हत्या चलती ट्रेन से धक्का देकर की. बाद में पत्नी और अन्य मृतकों के नाम से रिश्तेदारों को चिट्ठियां लिखता रहा. चिट्ठियों में लिखा होता कि सब ठीक है. चिंता मत करना. इसी वजह से परिवार वालों को सालों तक लगा कि उनके अपने लोग कहीं बाहर रह रहे हैं.
एक बच्ची की गुमशुदगी ने खोला पूरा राज
जनवरी 2012 में एक बच्ची के लापता होने की जांच के दौरान पुलिस का शक अरुण पर गया. पूछताछ में वह टूट गया. उसकी निशानदेही पर पुलिस ने अलग-अलग जगहों से कंकाल बरामद किए. एक-एक कर सात हत्याओं का खुलासा हुआ. अदालत ने पत्नी, साली और मकान मालिक की हत्या के मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई. पिता की हत्या के मामले में भी उसे अलग से सजा मिली. बाकी मामलों की भी सुनवाई हुई.
छत्तीसगढ़ के सबसे सनसनीखेज मर्डर केसों में रायपुर के सुंदर नगर निवासी उदयन दास का नाम हमेशा लिया जाएगा. यह ऐसा मामला था. जिसने सिर्फ रायपुर या भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे देश को झकझोर दिया था. बाहर से देखने पर उदयन एक पढ़ा-लिखा, आधुनिक और अमीर युवक दिखाई देता था.
फेसबुक और ऑरकुट पर उसकी प्रोफाइल देखकर लोग उसे अमेरिका में रहने वाला, संयुक्त राष्ट्र (UN) में काम करने वाला और IIT दिल्ली का पढ़ा-लिखा इंजीनियर समझते थे. लेकिन उसकी असली दुनिया चार दीवारों के भीतर दफन थी.
साल 2010 में उसने अपने पिता बी.के. दास और मां इंद्राणी दास की हत्या कर दी. दोनों के शव घर के आंगन में बने सेप्टिक टैंक के नीचे दफना दिए. 6 साल बाद उसने भोपाल में अपनी लिव-इन पार्टनर आकांक्षा शर्मा की भी हत्या कर दी.
प्रेमिका के शव को लोहे के बक्से में सीमेंट से भरकर कमरे के अंदर ही दफना दिया और महीनों तक उसी चबूतरे पर सोता रहा. जब इस केस का खुलासा हुआ तो पुलिस अफसर भी उसकी बेरहमी देखकर हैरान रह गए.
बचपन से सामान्य जिंदगी…लेकिन सपनों की दुनिया में जीता था
उदयन का परिवार पढ़ा-लिखा और संपन्न था. उसके पिता बी.के. दास भेल में फोरमैन थे. जबकि मां इंद्राणी दास सरकारी विभाग में एनालिस्ट के पद से रिटायर हुई थीं. परिवार के पास रायपुर के अलावा दूसरी जगहों पर भी संपत्ति थी. आर्थिक रूप से किसी चीज की कमी नहीं थी.
उदयन ने रायपुर के स्कूल से सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई की थी. लेकिन सोशल मीडिया पर वह खुद को IIT दिल्ली का छात्र बताता था. कभी कहता कि वह अमेरिका में नौकरी कर रहा है. तो कभी रूस या पेरिस में होने का दावा करता. कई बार उसने खुद को संयुक्त राष्ट्र में कार्यरत भी बताया. उसकी बनाई हुई इस झूठी दुनिया पर कई लोग यकीन भी कर लेते थे.
मां-पिता से पैसों को लेकर शुरू हुआ विवाद
उदयन आलीशान जिंदगी जीना चाहता था. उसे महंगी कारें, महंगे गैजेट और लग्जरी लाइफ पसंद थी. इसके लिए वह अक्सर मां से पैसे मांगता था. लेकिन मां हर बार उसे जरूरत के हिसाब से ही पैसे देती थीं और फिजूल खर्ची का विरोध करती थीं.
उदयन को यह बात नागवार गुजरने लगी. उसकी मां उसे हर छोटी-बड़ी बात पर टोकती थीं. इसी बात से वह इतना नाराज हुआ कि उसने अपने ही माता-पिता को रास्ते से हटाने की प्लान बना ली.
एक ही घर में की दोनों की हत्या
साल 2010 में उदयन ने पहले अपने पिता और फिर मां की हत्या कर दी. हत्या के बाद उसने किसी को भनक तक नहीं लगने दी. घर के आंगन में सेप्टिक टैंक बनवाया और दोनों के शव उसमें दफना दिया. पड़ोसियों और रिश्तेदारों से वह कहता रहा कि उसके माता-पिता विदेश चले गए हैं और वहीं रह रहे हैं. चूंकि दोनों नौकरी से रिटायर हो चुके थे. इसलिए किसी को ज्यादा शक भी नहीं हुआ.
हत्या के बाद भी उदयन का लालच खत्म नहीं हुआ. वह हर महीने बैंक जाकर माता-पिता की पेंशन निकालता रहा. उनके संयुक्त खाते का इस्तेमाल करता रहा. बाद में रायपुर का मकान भी बेच दिया. पुलिस के मुताबिक उसे संपत्ति और अन्य स्रोतों से करीब दो करोड़ रुपए मिले. जिनसे उसने लग्जरी कारें खरीदीं और महंगे शौक पूरे किए.
ऑरकुट पर हुई दोस्ती…फिर भोपाल में साथ रहने लगे
इधर, पश्चिम बंगाल की रहने वाली आकांक्षा शर्मा (श्वेता) की उदयन से ऑरकुट पर दोस्ती हुई. धीरे-धीरे दोनों करीब आए और वर्ष 2016 में आकांक्षा भोपाल पहुंच गई. वह उदयन के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी.
आकांक्षा ने अपने परिवार को बताया कि उसे अमेरिका में नौकरी मिल गई है. असल में वह भोपाल में उदयन के साथ रह रही थी. उदयन भी उसके परिवार से सोशल मीडिया और मैसेज के जरिए संपर्क बनाए रखता था. ताकि किसी को सच्चाई का पता न चले
प्रेमिका के सीने पर बैठा…तकिए से दबाया मुंह, फिर गला घोंटा
कुछ समय बाद दोनों के रिश्ते बिगड़ने लगे. आकांक्षा उदयन से दूर जाना चाहती थी. वह अपने दोस्तों से भी बात करती थी. जो उदयन को बिल्कुल पसंद नहीं था. 14 जुलाई 2016 की रात दोनों के बीच जमकर विवाद हुआ.
बहस इतनी बढ़ गई कि आकांक्षा ने गुस्से में उदयन को थप्पड़ मार दिया. इसके बाद वह सो गई. लेकिन उदयन पूरी रात जागता रहा. उसने उसी रात तय कर लिया कि अब आकांक्षा को जिंदा नहीं छोड़ेगा.
15 जुलाई की सुबह जब आकांक्षा सो रही थी. उदयन उसके सीने पर बैठ गया. उसने तकिए से उसका मुंह दबा दिया. जब आकांक्षा की सांसें कमजोर पड़ने लगीं. तब भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ. उसने हाथों से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी.
हत्या के बाद वह कई दिनों तक शव को घर में ही रखे रहा. उसे उम्मीद थी कि शायद आकांक्षा फिर से जिंदा हो जाएगी. जब शव से बदबू आने लगी. तब उसने उसे ठिकाने लगाने की तैयारी शुरू की.
लोहे के बक्से में शव रखा... सीमेंट भरकर बना दिया चबूतरा
उदयन ने घर में रखे एक बड़े लोहे के बक्से को खाली किया. उसमें आकांक्षा का शव रखा और ऊपर से सीमेंट का घोल भर दिया. इसके बाद कमरे के अंदर ही सीमेंट का चबूतरा बनाकर बक्से को उसमें दबा दिया.
सबसे डराने वाली बात यह थी कि वह रोज उसी चबूतरे पर गद्दा बिछाकर सोता था. बदबू छिपाने के लिए कमरे में परफ्यूम छिड़कता था. पुलिस अधिकारियों ने बाद में बताया कि आरोपी बिना किसी डर या पछतावे के उसी कमरे में सामान्य जिंदगी जीता रहा.
एक गुमशुदगी ने खोल दिया पूरा राज
आकांक्षा के परिवार से कई महीनों तक उसकी बात नहीं हुई. परिवार को शक हुआ तो उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. मोबाइल की लोकेशन भोपाल की मिली. जांच करते-करते पुलिस उदयन तक पहुंच गई.
शुरुआत में उदयन लगातार झूठ बोलता रहा. लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उसने आकांक्षा की हत्या की बात कबूल कर ली. पुलिस ने कमरे का चबूतरा तुड़वाया तो उसके नीचे से लोहे का बक्सा मिला. जिसमें आकांक्षा का शव सीमेंट में दबा हुआ था.
पूछताछ में खुला दूसरा राज... मां-बाप भी जिंदा नहीं थे
आकांक्षा हत्याकांड की पूछताछ के दौरान पुलिस ने उदयन से उसके माता-पिता के बारे में सवाल किए. हर बार वह अलग-अलग जवाब देता रहा. इससे पुलिस को शक हुआ. जब सख्ती बढ़ी तो उदयन ने बताया कि उसने कई साल पहले अपने माता-पिता की भी हत्या कर दी थी. इसके बाद रायपुर पुलिस ने सुंदर नगर स्थित घर की खुदाई कराई. आंगन में बने सेप्टिक टैंक के नीचे से दोनों के कंकाल बरामद हुए.
रायपुर और भोपाल में चले मुकदमों के बाद अदालत ने उदयन दास को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. आज वह जेल में है. लेकिन उसका केस आज भी देश के सबसे रहस्यमयी और सनसनीखेज हत्याकांडों में गिना जाता है.
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