आदिवासी मुख्यमंत्री के राज में आदिवासियों की जमीन पर कब्जा? बिना मुआवजा सड़क निर्माण को लेकर सवालों के घेरे में धमतरी प्रशासन

Is tribal land being encroached upon under a tribal Chief Minister? The Dhamtari administration is under scrutiny for building roads without compensation.

आदिवासी मुख्यमंत्री के राज में  आदिवासियों की जमीन पर कब्जा? बिना मुआवजा सड़क निर्माण को लेकर सवालों के घेरे में धमतरी प्रशासन

धमतरी : छत्तीसगढ़ में जहां एक तरफ़ आदिवासी अस्मिता और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के संरक्षण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं. वहीं धमतरी जिले से सरकारी तंत्र की घोर संवेदनहीनता का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक तरफ 'भारतमाला प्रोजेक्ट' में रसूखदारों को करोड़ों का मुआवजा बांटा जा रहा है. तो दूसरी तरफ एक गरीब आदिवासी की जल-जंगल-जमीन पर बिना किसी सूचना के सीधे बुलडोजर चला दिया गया. जिला मुख्यालय के बेलर तहसील अंतर्गत ग्राम झूरानदी में स्थानीय आदिवासी ग्रामीण कृष्णा मंडवी की निजी पैतृक भूमि पर बिना मुआवजा सड़क निर्माण का कार्य जबरन शुरू कर दिया गया है.
सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि प्रदेश की कमान खुद एक आदिवासी मुख्यमंत्री के हाथों में है. इसके बावजूद धमतरी प्रशासन जमीनी स्तर पर आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को कुचलने में लगा है.
नियमों को ठेंगा दिखाकर बिना मुआवजा सड़क निर्माण, भीम आर्मी ने रखीं ये 4 प्रमुख मांगें
पीड़ित कृष्णा मंडवी के मुताबिक उनकी खसरा नंबर 286 की निजी भूमि पर बिना किसी पूर्व लिखित सूचना, वैधानिक अधिग्रहण प्रक्रिया या बिना सहमति से रातों-रात अधिग्रहण कर सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया. भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष मिलाप साहू ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300A (संपत्ति का अधिकार), अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन) का सीधा और स्पष्ट उल्लंघन बताया है.
संगठन एवं पीड़ित परिवार ने संयुक्त रूप से प्रशासन के सामने ये प्रमुख मांगें रखी हैं:
निष्पक्ष जांच: पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए.
निर्माण पर रोक: बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के जबरन किए जा रहे सड़क निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाए.
न्याय और मुआवजा: पीड़ित आदिवासी परिवार को मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना का न्याय मिले एवं बिना मुआवजा सड़क निर्माण की इस मनमानी को बंद कर उचित मुआवजा दिया जाए.
कानूनी प्रक्रिया का पालन: अगर जनहित में भूमि अधिग्रहण आवश्यक भी है. तो LARR Act 2013 के तहत नियमानुसार सभी कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जाएं.
भीम आर्मी और पीड़ित परिवार ने जिला कार्यालय (लिपिक पावती क्रमांक: 0536) में शिकायत के साथ भूमि संबंधी प्रामाणिक दस्तावेज (खसरा/बी-1), [Aadhaar Redacted] की प्रति और मौके पर चल रहे अवैध निर्माण के अकाट्य फोटोग्राफ्स भी संलग्न किए हैं. भीम आर्मी ने चेतावनी दी है कि अगर आदिवासी परिवार को तुरंत इंसाफ नहीं मिला तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगा.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI?mode=gi_t