जिलाबदर सरपंच आखिरकार बर्खास्त, पढ़िए- कारनामों का कच्चा चिट्ठा, मार-पीट, जान से मारने की धमकी, गाली-गलौज, छह साल तक चुनाव लड़ने पर लगी रोक

The district banned sarpanch was finally dismissed, read the full details of his exploits, assault, death threats, abuse, ban on contesting elections for six years

जिलाबदर सरपंच आखिरकार बर्खास्त, पढ़िए- कारनामों का कच्चा चिट्ठा, मार-पीट, जान से मारने की धमकी, गाली-गलौज, छह साल तक चुनाव लड़ने पर लगी रोक

बिलासपुर : बिलासपुर जिले में विकासखंड मस्तुरी के ग्राम पाराघाट के सरपंच को बर्खास्त कर दिया गया है. सरकारी और आबादी भूमि पर कब्जा कराने, गुंडागर्दी करने के आरोपो की जांच के बाद शिकायत की पुष्टि होने पर बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है. प्रदीप सोनी के 6 साल तक चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाई गई है. कलेक्टर उसे पहले भी रासुका के तहत जिलाबदर की कार्रवाई कर चुके हैं. सरपंच कई तरह जुर्म में शामिल था.
एसडीएम मस्तुरी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक ग्राम पंचायत पाराघाट के सरपंच प्रदीप सोनी पाराघाट के पटवारी हल्का न 22 के शासकीय मद की भूमि खसरा न. 525/1 और दूसरी सरकारी जमीनों में करीब 30-35 एकड़ जमीन को फ्लाई एश से पटाई करा दिया. जिससे गांव में चारागाह की जमीन खत्म हो गई.
सरपंच ग्राम पंचायत पाराघाट द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 के बनाए प्रावधानों का उल्लंघन कर इस अधिनियम के खिलाफ काम कर रहा है. पूरे मामले की जांच तहसीलदार मस्तूरी से कराई गई. संयुक्त जांच टीम ने ग्रामवासियों एवं शिकयतकर्ता की मौजूदगी में मौके का निरीक्षण किया.
ग्रामवासियों और सरकारी जमीन 525/1 पर अवैध कब्जाधारियों द्वारा बताया गया कि सरपंच प्रदीप सोनी द्वारा 525/1 शासकीय भूमि को आबादी भूमि खसरा न. 525/3 बताकर लोगों को आबादी पट्टा वितरण किया है. घास भूमि खसरा न. 525/1 पर ही निर्माण कार्य के लिए जमीन को चिन्हांकित कर उसी भूमि पर निर्माण के लिए कहा गया.
शिकायतकर्ता छहोरन वस्त्रकार ने बताया कि 45 वर्ष पुराने मेरे कब्जे की जमीन को गोचर जमीन कहते हुए उसे कब्जे से हटा दिया. शिकायतकर्ताओं ने कहा कि आबादी घोषित जमीन के अलावा सरकारी जमीन पर भी बेजा कब्जा करा दिया है. इसमें निर्माण कार्य भी कराया जा रहा है। सरपंच को ग्राम में बेजा कब्जा हटवाना चाहिए लेकिन वह खुद आबादी के साथ शासकीय जमीन को बेजा कब्जा करवा रहा है.
न्यायालय जिला दण्डाधिकारी द्वारा पारित आदेश के अनुसार सरपंच प्रदीप सोनी पिछले दस साल से आपराधिक कृत्यों से जुड़ा हुआ है. सरपंच ने वर्ष 2015 से अपने साथियों के साथ मिलकर मार-पीट, जान से मारने की धमकी देने, गाली-गलौच, गुंडागर्दी जैसे गंभीर अपराध घटित कर आम जन को आतंकित करने और उनके बीच डर पैदा करने में शामिल है. कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम 1992 की धारा (5) (क) (ख) के प्रावधानों के तहत सरपंच प्रदीप सोनी को 6 महीने की अवधि के लिए जिलाबदर करने का आदेश पारित किया है.
मामले में आए उपरोक्त तथ्यों, नायब तहसीलदार मस्तुरी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन, शिकायतकर्तागण का शपथपूर्वक कथन, जिला दण्डाधिकारी बिलासपुर द्वारा की गई जिला बदर की कार्रवाई से यह तथ्य प्रकट होता है कि सरपंच प्रदीप सोनी जनप्रतिनिधि होते हुए भी विधि खिलाफ क्रियाकलापों में शामिल रहकर समाज विरोधी तथ्यों को बढ़ावा देने जैसे गंभीर अपराध घटित कर आम जनों को आतंकित करने और उनके बीच डर पैदा करने में शामिल है.
पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत वे अपने कर्तव्यों के निर्वहन में अवचार के दोषी है. जिसके फलस्वरुप उनको उनके पद पर बना रहना लोकहित में अवांछनीय है. इसलिए धारा 40 की उपधारा (1)(क)(ख) का उल्लंघन साबित होने पर पाराघाट के सरपंच प्रदीप सोनी को मस्तूरी के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा सरपंच पद से अलग करते हुए 6 साल की कालावधि के लिए छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 (2) के अधीन निर्वाचन के लिए निर्हरित किया गया है.
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