पाक महिना रमजान का ‘चांद’ आया नजर, दुनिया भर में कल 19 फ़रवरी को होगा मुकद्दस महीने का पहला रोजा, आज होगी पहली तरावीह की नमाज
The moon of the holy month of Ramadan has been sighted, the first fast of the holy month will be observed across the world tomorrow, February 19th, and the first Taraweeh prayer will be held today.
रायपुर : दुनिया भर के मुसलमानों को माह-ए-रमजान का बेसब्री से इंतजार रहता है. पवित्र माह रमजान उल मुबारक का चांद राजधानी रायपुर के साथ-साथ प्रदेश के अलावा देश भर में देखा गया है. जहां "पवित्र महिना रमजान का चांद नजर आया" ऐसे में कल से देश भर में 19 फ़रवरी जुमेरात को रमजान का पहला रोजा शुरु हो गया है. गरियाबंद पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद हाफिज खान ने रंजन शरीफ की मुबारकबाद पेश की है. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में चाँद देखा गया है. झारखंड के पटना में भी चाँद दिखने की खबर है. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मदरसा इस्लाहुल मुस्लेमीन की जानिब से बलरामपुर से तस्दीक लाने की कोशिश की जा रही है.
इस्लाम धर्म में रमजान शरीफ का महीना सबसे पाक और मुबारक माना जाता है. इस पूरे महीने मुसलमान रोजा रखते हैं और अपना ज्यादा वक्त अल्लाह की इबादत में बिताते हैं. हर बार 29 या 30 रोजे रखने के बाद मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए इस महीने के आखिर में ईद-उल-फितर मनाते हैं. जिसे मीठी ईद के नाम से भी जाना जाता है.
इस पाक महीने में मुसलमान दिन में रोजा रखने के साथ-साथ इशा की नमाज अदा कर मस्जिदों और मदरसों में तरावीह की नमाज आज से अदा करेंगे. इस पाक महीने में दुनिया भर की मस्जिदों को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है.
रमजान से पहले बाजारों में जरुरत की चीजों से सज गई हैं. जहां लोगों ने रमजान से पहले ही बाजार पहुंचकर जरुरत के सामान की खरीदने में लगे हुए थे. वहीं रमजान के इस पाक मौके पर कारीगरों ने फैनी वगैरा की तैयारी की है. रमजान में महिलाओं से लेकर बच्चे, युवा, और पुरुष अब खूब खरीदारी करने में लग जाएंगे. कपड़ा, जूते, साड़ी, ज्वैलरी वगैरह की खूब खरीदारी की जाएगी. बाजारों में त्योहार की रौनकें दिखाई देने लगी हैं. ऐसे में आज देश भर में रमजान का चांद दिखने पर शहरों और चौराहों, घरों पर लोगों ने एक दूसरे को मुबारकबाद दी है.
रमजान के पाक महीने में पूरे 30 दिन समाज के लोग रोजा इफ्तार से लेकर सुबह सेहरी तक इबादत करते हैं. इस दौरान सामूहिक इफ्तार और सेहरी के इंतजाम भी होते हैं. 30 रोजों के पूरे होने पर ईद का त्योहार मनाएगा.
नवापारा के पेश इमाम ने रमजान के महीने में बच्चों को कुरआन की तालीम देने के लिए कहा है. रमजान का महीना इतना पाक इसलिए भी माना गया है. क्योंकि इस महीने में लैलतुल-कद्र की रात को इस्लाम की सबसे पाक किताब कुरआन नाजिल हुई थी. रमजान के पाक महीने में अल्लाह तआला जहन्नुम के दरवाजे बंद कर देता है और जन्नत के दरवाजे अपने बंदों के लिए खोल देता है. माह-ए-रमजान को गुनाहों से मगफिरत का महीना भी कहा जाता है. जिसमें सच्चे दिल से तौबा करने वालों को जाने-अनजाने में किए गए हर गुनाह की माफी मिल जाती है.
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धमतरी मस्जिदों में ईशा की जमाअत व तरावीह
जामा मस्जिद सदर बाजार
ईशा की जमाअत 08:15
तरावीह 08:30
हाफिज जव्वाद अहमद साहब
हनफ़िया मस्जिद चमेली चौक
ईशा की जमाअत 08:15
तरावीह 08:30
मुफ्ती इरफ़ान अज़हरी साहब मरहरा शरीफ
मस्जिद ग़रीब नवाज़ रिसाई पारा
ईशा की जमाअत 08:15
तरावीह 08:30
हाफ़िज साबिर अली साहब
मदीना मस्जिद रज़ा नगर नवागांव
ईशा की जमाअत 08:15
तरावीह 08:30
हाफ़िज हम्माद अहमद साहब
मदरसा हनफ़िया सिहावा चौक
ईशा की जमाअत 08:15
तरावीह 08:30
हाफ़िज सग्गीर अहमद साहब
रोजा रखने के हैं कई वैज्ञानिक फायदे
दुनिया भर में मशहूर लाइफस्टाइल कोच ल्यूक कौटिन्हो के मुताबिक 'ड्राई फास्टिंग' स्वस्थ रहने का एक बेहतरीन तरीका है. ड्राई फास्टिंग को हम हिंदी में 'निर्जला उपवास' भी कह सकते हैं. यानी एक ऐसा उपवास जिसमें व्यक्ति खाना के साथ-साथ पानी भी छोड़ देता है.
ल्यूक कौटिन्हो बताते हैं कि ड्राई फास्टिंग के द्वारा आप बड़ी से बड़ी बीमारी को ठीक करने में शरीर की मदद कर सकते हैं. इससे आपका पूरा शरीर और सिस्टम साफ हो जाता है. इससे वजन घटता है. इम्यूनिटी बढ़ती है और उम्र को रोकने (एंटी-एजिंग) में भी मददगार है.
खाने और पानी को कुछ समय के लिए छोड़ना शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है. हमारे बॉडी का सिस्टम बहुत समझदार है. इसीलिए जब हम बीमार पड़ते हैं. तो हमें भूख और प्यास कम लगती है. इसका कारण यह है कि खाने और पानी की मात्रा को घटाकर शरीर अपने आपको हील करने की कोशिश करता है. लेकिन लोगों में ये मिथ्या बात फैली हुई है कि बीमार पड़ने पर और ज्यादा खाना चाहिए. लेकिन कुछ दिनों के लिए खाना-पानी छोड़ना शरीर के लिए फायदेमंद है.
ल्यूक बताते हैं कि जब आप रोजा रखते हैं तो आपके शरीर की सारी गंदगी निकल जाती है. आपके सेल्स अपने आप ही अपने भीतर की गंदगी को बर्न करने लगते हैं. इससे बॉडी की ज्यादा बेहतर सफाई हो जाती है.
जब आप रोजा रखते हैं. तो आपके शरीर के सेल्स (कोशिकाएं) टॉक्सिन्स को बर्न करते हैं. इसी के साथ शरीर के भीतर मौजूद डेड सेल्स भी बर्न हो जाती हैं और उनकी जगह खाली हो जाती है. इससे होता यह है कि आपका शरीर ज्यादा स्टेम सेल्स बनाने लगता है. ये स्टेम सेल्स ही आगे चलकर आपके शरीर में नए सेल्स का निर्माण करती हैं. आपके शरीर में जितने ज्यादा नए सेल्स बनेंगे आप उतने समय तक जवान और खूबसूरत बने रहें.
रोजा के द्वारा शरीर को कैंसर और ट्यूमर जैसी बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है. इसका वैज्ञानिक कारण यह है कि जब आप पूरी तरह रोजा रखते हैं यानी पानी भी नहीं पीते हैं, तो आपका शरीर सबसे पहले बीमार सेल्स को बर्न करके एनर्जी बनाता है. ताकि स्वस्थ सेल्स को नुकसान न पहुंचे. ऐसे में अगर किसी व्यक्ति के शरीर में ट्यूमर है या सेल्स से जुड़ी कोई दूसरी बीमारी है. तो शरीर उस हिस्से के सेल्स को तेजी से बर्न करता है और बीमारी धीरे-धीरे खत्म होने लगती है.
रोजा शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने का सबसे अच्छा और पावरफुल तरीका है. इस तरह के रोजे से शरीर की इम्यूनिटी बढ़ती है और कई रोगों का खतरा कम होता है. रोजा के द्वारा शरीर में इंफ्लेमेशन घटता है. इंफ्लेमेशन ही वह कारण है, जो कैंसर, डायबिटीज, दिल की बीमारियों को बढ़ावा देता है. इसलिए रोजा रखने रखने से आप इन रोगों से बच सकते हैं.
अन्य फायदे
खून की सफाई होती है.
रक्त वाहिकाओं का ब्लॉकेज ठीक हो जाता है.
आंतों और आहार नली की अच्छी तरह सफाई हो जाती है.
आंतों में गुड बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ती है, जिससे पाचन सही रहता है.
रोज़ा रखने की दुआ (Roza Rakhne ki Dua In Hindi)
'व बि सोमि गदिन नवई तु मिन शहरि रमज़ान'
रोजा खोलने की दुआ हिंदी में (Roza Kholne ki Dua in Hindi)
'अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुमतु, व-बिका आमन्तु, व-अलयका तवक्कालतू, व- अला रिज़क़िका अफतरतू'
Dua e Qunoot In Hindi (दुआ इ क़ुनूत इन हिंदी)
अल्ला हुम्मा इन्ना नस्ता ईनु क व नास्तगफिरुका व नु’अ मिनु बिका व नतावक्कलु अलाइका वा नुस्नी अलैकल खैर व नशकुरुक वला नकफुरुका व नख्लऊ व नतरुकु मैंय्यफ-जुरूक अल्ला हुम्मा इय्याका नअबुदु व लका नुसल्ली व नस्जुदु व इलैका नस्आ व नहफिज़ु व नरजू रहमतका व नख्शा अज़ाबका इन्ना अज़ाबका बिल क़ुफ़्फ़ारि मुलहिक़
Safar ki Dua सफर की दुआ
सुब्हानल्लजी सख्ख-र-लना हाज़ा वमा कुन्ना लहू मुकरिनीन, व इन्ना इला रब्बिना लमुन्कलिबून
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