प्रदेश भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस, महिलाओं का किया गया सम्मान, निकाली गई भव्य शोभायात्रा
World Tribal Day was celebrated with enthusiasm across the state women were honoured a grand procession was taken out
गरियाबंद/मैनपुर : विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर तहसील मुख्यालय मैनपुर नगर में सर्व आदिवासी समाज द्वारा भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. दोपहर 12 बजे मैनपुर नगर में विशाल रैली निकाली गई.
इस रैली में आदिवासी समाज के लोग अपने संस्कृति अनुसार पाम्परिक वेशभुषा में शामिल हुए. इस दौरान रंगारंग आदिवासी नृत्य के साथ नगर सहित क्षेत्र के आदिवासी समाज के हजारों लोग रैली में शामिल होकर एक तीर एक कमान सारे आदिवासी एक समान जैसे गनगभेदी नारे लगाए. रैली जनपद पंचायत मार्ग होते हुए विश्राम गृह पहुंची. जहां बिन्द्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव भी रैली में शामिल हुए.
यह रैली बस स्टैण्ड नेशनल हाईवे, ग्राम पंचायत मस्जिद गली, गांधी चौक होते हुए सामुदायिक भवन पहुची जहां आदिवासी महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया.
इस कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि बिन्द्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव एवं समाज के प्रमुखों ने विधिवित पुजा अर्चना कर किया. इस दौरान कई आदिवासी आश्रम छात्रावासों के छात्र छात्राओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम देर शाम तक प्रस्तुत किया गया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि बिन्द्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने कहा कि आदिवासी समाज का काफी गौरवशाली इतिहास रहा है. आज इस कार्यक्रम में पुरे क्षेत्र से हजारों की संख्या में समाज के लोग शामिल हुए है. पुरे विश्व में आज आदिवासी दिवस धुमधाम के साथ मनाया जा रहा है. ध्रुव ने कहा जल जंगल जमीन का असली मालिक यहां के मूलनिवासी आदिवासी है. आदिवासी समाज प्रदेश और देश का गौरव है.
विशेष अतिथि हेमसिंह नेगी ने कहा कि मैनपुर एक ऐसा विकासखण्ड है जहां आदिवासी समाज के लोग अपने त्यौहारो को पूरी परंपरा और रीति रिवाज के अनुसार मनाते हैं.
आदिवासी नेता खेदू नेगी, टीकम कपील, ईश्वर नागेश ने कहा आदिवासी काफी सीधे सरल व सज्जन स्वभाव के होते हैं. समाज के बच्चे अच्छे शिक्षा हासिल कर परिवार समाज और राष्ट्र के विकास मे योगदान देंगें.
आदिवासी महोत्सव के दौरान कई स्कूल छात्रावासों के छात्र छात्राओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिन्हे विधायक जनक ध्रुव के हाथों नगद व शिल्ड तथा प्रमाण पत्र पुरस्कार के रुप में दिया गया. आदिवासी समाज के कार्यक्रम में सर्व समाज के लोग शामिल हुए. जिन्हे आदिवासी समाज के द्वारा पीला चांवल से तिलक एवं गमछा भेंट कर सम्मान किया गया.
कार्यक्रम मे प्रमुख रुप से सर्व आदिवासी समाज तहसील अध्यक्ष ईश्वर नागेश, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकृष्ण ध्रुव, खेंदू नेगी, हेमसिंह नेगी, प्रियंका कपील, टीकम कपील, सियाराम ठाकुर, जन्मजय नेताम, गुमान सिंह ठाकुर, नाथुराम धुर्वा, चैनसिंह नेताम, देवन नेताम, नोकेलाल ध्रुव,रामसिंह नेताम, पिलेश्वर सोरी, डी.एस. नागवंशी, विश्राम नागेश, दिनेश शाडिल्य, राजकुमार धुर्वा, शिवशंकर हुर्रा, प्रेम ध्रुव, भावेश ध्रुव, कुशल ध्रुव, अघन सोरी, नरेश नाग, उधोराम ध्रुव, सरपंच जिलेन्द्र नेगी, खेलन दीवान, सहदेव साण्डे, रामसिंह नागेश, गयचन्द्र कोमर्रा, मुकेश कपील, सोहन नागेश, नेयाल नेताम, नयन सिंह नेताम, फणीन्द्र ठाकुर, धनसाय नागेश, दुलेन्द्र नेगी, राकेश ठाकुर, रोहन मरकाम, देवीसिंह कमलेश, शिशुपाल नायक, पवन ठाकुर, लोकेश नागेश, नीरा कपील, कलेन्द्री मरकाम, खोलूराम कोमर्रा, पवन दीवान, कोमल सिंह ठाकुर, थानुराम पटेल, मोहित द्विवेदी, रुपेश साहू, जय ठाकुर, बरिहा सर, मुकेश कपील, अशोक दुबे, योगेश शर्मा, दुलार सिन्हा, मनोज मिश्रा, डाकेश्वर नेगी, संतोष पटेल, गेंदु यादव, गोविद पटेल, संतोष ध्रुव, गोपी नेताम, दामोदर नेगी सहित हजारों की तादाद में क्षेत्र भर से लोग शामिल हुए. कार्यक्रम का संचालन कुशल ध्रुव ने किया. और आभार प्रदर्शन जन्मजय नेताम ने किया.
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विश्व आदिवासी दिवस पर महिलाओं का सम्मान
रायगढ़ : विश्व आदिवासी दिवस पर प्रदेश अध्यक्ष शालिनी राजपूत के मार्गदर्शन पर महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष शोभा शर्मा ने वार्ड नं 9 रियापारा में आयोजन के दौरान महिलाओं का शाल श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया.
इस दौरान वार्ड की महिलाओ से चर्चा कर उन्हें बहुत सी योजनाओं की जानकारी दी गई. महिलाओ ने वार्ड नं 9 रियायरा स्थित एक मात्र सामुदायिक भवन के तोड़े जाने पर होने वाली परेशानियों से अवगत कराया. इस भवन के तोड़े जाने पर वार्ड की महिलाए आक्रोशित नजर आई जिस पर उन्हें आश्वस्त किया गया कि प्रशासन से सार्थक चर्चा कर जल्द ही निर्माण कार्य शुरु कराया जाएगा.
आयोजन के दौरान कार्यालय मंत्री चंपा माली नगर मंडल अध्यक्ष मेहरूनिशा भाजपा नेत्री बिमला अगरिया मायावती उरांव,लक्ष्मीन नागवंशी, दशमति उरांव, द्रुपति नागवंशी, पार्वती नागवंशी, आरती निषाद, मंगली प्रमिला उरांव जगोबाई उरांव संतोषी नागवंशी अनिता चौहान की मौजूदगी रही.
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बलौदाबाजार में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस
बलौदाबाजार-भाटापारा : बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कलेक्टोरेट परिसर में शुक्रवार को विश्व आदिवासी दिवस हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया. इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर दीपक सोनी और आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने बड़ा देव की पूजा-अर्चना किया और शहीद वीर नारायण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया.
इस कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लोग पारम्परिक परिधान और वेश-भूषा के साथ शामिल हुए. इस दौरान मल्लखम्भ प्रशिक्षण के 20 प्रतिभागियों को ड्रेस किट का वितरण किया गया. इसके साथ ही निःशुल्क पौधा वितरण भी किया गया.
कलेक्टर सोनी ने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनायें देते हुए कहा कि ऐसा मौका एक दूसरे के साथ जुडने और जानने समझने के लिए होता है. एक दूसरे से जुड़ेंगे तो समाज के बारे में जानकारी मिलेगी. समस्या या सुझाव मिलेंगे जिससे समाज की बेहतरी के लिए रास्ते निकलेंगे.
उन्होंने कहा कि अपनी समस्या या बात रखने में संकोच न हो. अपनी बोली भाषा में भी बिना झिझक के समस्या या सुझाव के बारे में बता सकते हैं. समाज के विकास के लिए नवाचार पहल होनी चाहिए जिससे प्रशासन के सहयोग से आगे बढ़ाया जा सके. उन्होंने बताया कि जिले में मल्लखम्ब खेल प्रशिक्षण की शुरुआत हुई है. जिला प्रशासन द्वारा प्रशिक्षण के माध्यम से हुनर तराशने का प्रयास किया जा रहा है.
सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष भूपेंद्र ध्रुवंशी ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस सभी मूल निवासियों के लिए गौरव का दिन है. आदिवासियों को प्रकृति के सान्निध्य में जीवन यापन करने का सौभाग्य मिला है. हमें सांवैधानिक अधिकार भी दिए गए हैं. इन अधिकारों के तहत हमें अपने समाज को आगे ले जाना है.
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उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया विश्व मूलनिवासी दिवस
दंतेवाड़ा : सर्वविदित है कि विश्व मूलनिवासी दिवस मनाने का असल मकसद मूल निवासियों के अधिकारों, संस्कृति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना इस कड़ी में संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर मुताबिक 21 वीं सदी में भी विश्व के कई देशों में जनजातीय समाज अपनी उपेक्षा, गरीबी, अशिक्षा, स्वास्थ्य सुविधा का अभाव, बेरोजगारी एवं बंधुआ मजदूर जैसे समस्याओं से ग्रसित हैं. जनजातीय समाज के उक्त समस्याओं के निराकरण के लिए विश्व के ध्यानाकर्षण के लिए वर्ष 1994 में ’’संयुक्त राष्ट्र संघ’’ के महासभा द्वारा हर साल 9 अगस्त को ’’विश्व के स्वदेशी लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस’’ मनाने का फैसला लिया गया.
इस कड़ी में विश्व आदिवासी दिवस पर आज जिले के मां दंतेश्वरी मंदिर के प्रांगण स्थित ’’मेढ़का डोबरा’’ में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस मौके पर सर्व प्रथम पारंपरिक ढंग से जनजातीय झंडा वंदन कर, सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया.
इस मौके पर मुख्य अतिथि क्षेत्र के परगना प्रमुख श्री अर्जुन मांझी, प्रदेश अध्यक्ष ललित नरेटी, सुरेश कर्मा एवं अन्य समाज प्रमुखों सहित जनप्रतिनिधिगण, कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, पुलिस अधीक्षक गौरव राय, जिला पंचायत सीईओ कुमार विश्वरंजन, एसडीएम जयंत नाहटा, अपर कलेक्टर राजेश पात्रे, आदिवासी विकास विभाग उपायुक्त के.एस. मसराम सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद थे.
विश्व मूलनिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए मुख्य अतिथि सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि अपने संबोधन में समाज के सर्वागीण विकास के लिए शिक्षा सर्वाधिक जरुरी बताया. साथ ही जल जंगल जमीन की रक्षा करने के लिए सचेत रहने का आव्हान करते हुए आदिवासी हितों और अधिकारों के प्रति जागरुकता लाने के लिए समाज को एकजूट होने को कहा.
इस मौके पर वन अधिकार पत्र भी वितरित किये गए. इसके तहत 57 हितग्राहियों को व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र 190 हितग्राहियों को सामुदायिक वन अधिकार मान्यता पत्र, सामुदायिक वन संसाधन मान्यता पत्र के अन्तर्गत 6 और सामुदायिक वन संसाधन मान्यता पत्र (नगरीय निकाय) 1 हितग्राही को प्रमाण पत्र दिये गए.
कार्यक्रम में अन्य राज्यों जैसे झारखण्ड और ओडिशा से आए लोकनृत्यक दलों द्वारा पारंपरिक लोक नृत्यों का प्रदर्शन भी किया गया.
इसके पूर्व समाज के युवा वर्ग द्वारा गीदम बाईपास से एसबीआई चौक तक बाइक रैली निकाली गई. इसके अलावा संध्या ’’दायरा जादू बस्तर’’ म्यूजिकल बैंड द्वारा गीत संगीत कार्यक्रम भी आयोजित किया गया.
इस मौके समाज प्रमुख मंगल सिंह बघेल, महादेव नाग, अर्जना कारम, आर.एन. साय, बी. के. एक्का, त्रिपुरारी सिंह मंडावी राज ओयामी, सोमडू भास्कर, सुकालू मुड़ामी, मार्का सोढ़ी, जितेंद्र वेट्टी आदि मौजूद थे.
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विश्व आदिवासी दिवस पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा
सारंगढ़ : आदिवासी समाज के प्रमुख नेताओं के द्वारा पुष्प वाटिका स्थल से सामाजिक शोभा यात्रा निकाला गया. जो भारत माता चौक होते हुए तुर्की तालाब गार्डन तक पहुंचा वहां से सिनेमा हॉल होते हुए नगर के मुख्य मार्ग जयस्तंभ चौक, आजाद चौक होते हुए भारत माता चौक होकर पुष्प वाटिका पहुंची.
इस दौरान आदिवासी समाज के सरगुजिहा , बस्तरिहा और जशपुरिहा नृत्य के माध्यम से शहर वासियों को आदिवासी संस्कृति की जानकारी दी गई. पूरे शोभायात्रा में सारंगढ़ पुलिस विभाग मुस्तैदी के साथ पैदल मार्च करते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने में सफल रहा.
रामकुमार थुरियां ने कहा कि आदिवासी समुदायों , संवाद, उनकी संस्कृति और परंपराओं का सम्मान, उनके अधिकारों के लिए समर्थन जुटाने की गति विधियाँ इस शोभायात्रा के माध्यम से अभिव्यक्त किया है. शोभा यात्रा में नदी से कैसे सोने का कण निकाला जाता है. इस बात की जान कारी भी आदिवासी महिला पुरुष दे रहे थे. आदिवासी पोशाक उनका तीर कमान सब इस शोभा यात्रा में देखने के लिए मिला.
नपाउपाध्यक्ष रामनाथ सिदार ने कहा कि हमारे आदिवासी समाज की संस्कृति अत्यंत समृद्ध व विविधतापूर्ण है. जो जीवन के हर पहलू में दिखाई देती है. भारत और दुनिया भर के आदिवासी समुदायों की संस्कृति उनके पारंपरिक ज्ञान, रीति-रिवाजों, धार्मिक विश्वासों, कला, संगीत, नृत्य, और सामाजिक संरचनाओं में अभिव्यक्त होती है. आदिवासी संस्कृति की विशेषताओं को उजागर करते हैं. आदिवासी समाज का ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी मौखिक रुप से हस्तांतरित होता है. यह ज्ञान उनके पर्यावरण, चिकित्सा, कृषि व वन्य जीवन से जुड़ा होता है. आदिवासी समाज प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करता है. सतत विकास के सिद्धांतों को अपनाता है आदिवासी कला, जैसे कि मिट्टी के बर्तन, बांस की कारीगरी, धातु कला और चित्रकला, अद्वितीय व विशिष्ट होती है। प्रकृति, देवी- देवताओं और जीवन के विभिन्न पहलुओं का चित्रण होता है। भारत के मध्य प्रदेश का गोंड चित्रकला, ओडिशा का संथाल पेंटिंग, झारखंड का सोहराई कला इसके उदाहरण हैं.
जपं उपाध्यक्ष चंद्रकुमार नेताम ने कहा कि आदिवासी समाज में संगीत और नृत्य का विशेष महत्व होता है. ये धार्मिक अनुष्ठानों, पर्वों और सामाजिक समारोहों का अभिन्न हिस्सा होते हैं. जैसे, संथाल का जादुर नृत्य, उरांव का कर्मा नृत्य, और गोंड का ढोल-नृत्य प्रसिद्ध हैं. हमारे समाज, समुदायों का धर्म प्रकृति पूजा पर आधारित होता है , हम सूर्य, चंद्रमा, जल, वृक्षों, और अन्य प्राकृतिक तत्वों को पूजनीय मानते हैं. धार्मिक अनुष्ठान और पर्व प्रकृति के साथ हमारे गहरे संबंध को दर्शाते हैं. जैसे कि सरना पूजा, करमा पूजा और सोहराई. आदिवासी समाज के द्वारा निकल गई इस सामाजिक रैली में करीब 5000 लोग सम्मिलित थे. जिसमें महिला, पुरुष, युवा, युवती, बालक बालिका सम्मिलित रहे. कार्य क्रम स्थल पुष्प वाटिका जहां आदिवासी समाज के नेताओं के द्वारा उद्बोधन दिया गया तदुपरांत सामाजिक लोगों के भोजन की व्यवस्था की गई थी. आदिवासी समाज की शोभा यात्रा में सारंगढ़ पुलिस शांति व्यवस्था बनाने में पूरी तरह से सफल रही.
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