जंगली सुअर के हमले में ग्रामीण घायल, वन विभाग सतर्क, इधर हाथी के हमले में 40 दिन के नवजात की मौत, ग्रामीणों में गहरा आक्रोश

A villager was injured in a wild boar attack, prompting the forest department to be on alert. Meanwhile, a 40-day-old infant died in an elephant attack, causing deep anger among the villagers.

जंगली सुअर के हमले में ग्रामीण घायल, वन विभाग सतर्क, इधर हाथी के हमले में 40 दिन के नवजात की मौत, ग्रामीणों में गहरा आक्रोश

जंगली सुअर के हमले में ग्रामीण घायल

रायगढ़ : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जंगली सुअर के हमले में एक ग्रामीण गंभीर रुप से घायल हो गया. यह घटना तमनार रेंज के कसडोल सर्किल के ग्राम गोढ़ी में हुई. घायल ग्रामीण अपने मवेशियों को चराने के लिए जंगल की तरफ गया था. तभी झाड़ियों से अचानक बाहर निकलकर जंगली सुअर ने उस पर हमला कर दिया।
मिली जानकारी के मुताबिक गोढ़ी निवासी भुवनेश्वर पटनायक उम्र 60 साल सोमवार दोपहर अपने मवेशियों को जंगल की तरफ चराने ले गए थे. इसी दौरान खेतों के पास झाड़ियों में छिपे जंगली सुअर ने अचानक हमला कर दिया। हमले में पटनायक गंभीर रुप से घायल हो गए और चीख-पुकार करने लगे.
ग्रामीणों की त्वरित प्रतिक्रिया से घटना का पता चला. पास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल की मदद के लिए वन विभाग को खबर दी. खबर मिलते ही वन अमला घटनास्थल पर पहुंचा और घायल को फौरन इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने उनके हाथ में गंभीर चोट की पुष्टि की.
तमनार रेंजर विक्रांत कुमार ने बताया कि घायल को फौरन अस्पताल पहुंचाया गया और प्राथमिक उपचार किया गया. उन्होंने कहा कि अब उनकी हालत में सुधार है और विभाग की तरफ से उन्हें प्रारंभिक सहायता राशि भी प्रदान की गई.
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में जंगली जानवरों की गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं. जिससे खतरा मंडरा रहा है. कई ग्रामीणों ने कहा कि मवेशी चराने के दौरान ऐसे हमले आम होते जा रहे हैं और इसके लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरुरत है.
रेंजर विक्रांत कुमार ने बताया कि वन्य जीवों के आवास क्षेत्र में प्रवेश करते समय सतर्कता बरतना जरुरी है और मवेशियों के चराने जाने के दौरान सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वन्य जीव हमलों की घटना को गंभीरता से लिया जा रहा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी.
विशेषज्ञों का कहना है कि जंगली जानवरों की संख्या बढ़ने और उनके आवास क्षेत्र में मानव गतिविधियों के कारण ऐसे हमले बढ़ सकते हैं. ग्रामीणों को सलाह दी जा रही है कि जंगल में अकेले न जाएँ और मवेशियों को चराने के लिए समूह में जाएँ. यह घटना ग्रामीण सुरक्षा और वन्य जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती को उजागर करती है. प्रशासन और वन विभाग द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया ने बड़ी दुर्घटना टलने में मदद की. लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में सुरक्षा के लिए और सख्त कदम उठाए जाने चाहिए. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में वन्य हमलों की बढ़ती घटनाओं ने ग्रामीणों में सतर्कता और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग बढ़ा दी है.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t

हांथी के हमले में 40 दिन के नवजात की मौत

सूरजपुर : सूरजपुर जिले के भटगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत चिकनी धरमपुर गांव में बीती रात एक दर्दनाक घटना हुई. जिसमें हाथी के हमले में 40 दिन का नवजात बच्चा मारा गया. घटना रात करीब 1 बजे हुई. जब उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से आए प्रवासी मजदूर दंपती अपने परिवार के साथ गुड़ फैक्ट्री के पास अस्थायी झोपड़ी में रह रहे थे.
मिली जानकारी के मुताबिक रात में सोनगरा जंगल से भटककर एक हाथी गुड़ की गंध से आकर्षित होकर झोपड़ी की ओर आया. हाथी ने झोपड़ी को तोड़ दिया. इस दौरान दंपती किसी तरह अपने साथ अपने बच्चों को लेकर बाहर निकलने में कामयाब रहे. लेकिन उनका 40 दिन का नवजात हाथी के पैरों तले कुचल गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई.
घटना की खबर ग्रामीणों ने वन विभाग को दी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय टीम घटना स्थल पर काफी देर बाद पहुंची. इस असंवेदनशीलता के कारण ग्रामीणों में विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश देखा गया. उनका कहना है कि अगर समय पर सूचना तंत्र और चेतावनी व्यवस्था सक्रिय होती तो इस हादसे को रोका जा सकता था. घटनास्थल पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने मृतक परिवार को 25 हजार रुपये की तत्काल सहायता राशि देने की बात कही. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि विभाग केवल घटना के बाद औपचारिकताएं पूरी करता है, जबकि हाथियों के हमलों की रोकथाम के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते.
स्थानीय जानकारों के मुताबिक क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष लगातार बढ़ रहा है. हाथियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर नहीं हैं. प्रभावी चेतावनी प्रणाली नहीं है और रात्रि गश्त की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है. इसी वजह से इस तरह की घटनाएं बार-बार हो रही हैं.
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग किया कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाएं. उन्होंने हाथियों के आवागमन वाले क्षेत्रों में बार्डर फेंसिंग, अलार्म सिस्टम, रात्रि गश्त और जागरूकता कार्यक्रम जैसी व्यवस्थाओं की सख्त जरुरत बताई.
इस घटना ने पूरे क्षेत्र में चिंता और डर का माहौल पैदा कर दिया है. लोगों का कहना है कि मानव-हाथी संघर्ष से न सिर्फ जान-माल का नुकसान होता है. बल्कि ग्रामीण जीवन भी असुरक्षित महसूस करता है. वन विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि वे हाथियों के आवागमन और ग्रामीणों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए ठोस योजनाएं बनाएं.
सुरक्षा उपायों में सुधार और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को तेज करने के लिए स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के बीच समन्वय जरुरी है. ग्रामीणों ने चेताया कि अगर भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए. तो वे खुद जागरुकता और सतर्कता के उपाय अपनाने पर मजबूर होंगे. इस तरह सूरजपुर जिले में मानव-हाथी संघर्ष की यह घटना न सिर्फ नवजात की असमय मौत का कारण बनी. बल्कि ग्रामीणों और वन विभाग के बीच संवाद और जिम्मेदारी के मुद्दे को भी उजागर कर गई. प्रशासन और वन विभाग को शीघ्र ही इस गंभीर समस्या का समाधान ढूंढना होगा ताकि भविष्य में किसी भी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/LEzQMc7v4AU8DYccDDrQlb?mode=ac_t