चलती ई-रिक्शा में महिला ने बच्चे को दिया जन्म, दर्द से तड़पती प्रसूता को नहीं मिली महतारी एक्सप्रेस की मदद, छोड़कर भागी मितानिन

A woman gave birth in a moving e-rickshaw; the woman, writhing in pain, was denied the help of the Mahatari Express, and the nurse fled.

चलती ई-रिक्शा में महिला ने बच्चे को दिया जन्म, दर्द से तड़पती प्रसूता को नहीं मिली महतारी एक्सप्रेस की मदद, छोड़कर भागी मितानिन

कोरबा/अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक महिला ने चलती ई-रिक्शा में बच्चे को जन्म दिया.  एम्बुलेंस नहीं मिलने पर महिला को ई-रिक्शा से जिला कॉलेज अस्पताल ले जाया जा रहा था. इस दौरान उसने रास्ते में नवजात को जन्म दिया. अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य हैं. ये पूरा मामला दर्री थाना क्षेत्र के अयोध्यापुरी बस्ती का है.
परिजनों का आरोप है कि एम्बुलेंस (महतारी एक्सप्रेस- 102) को कॉल किया. लेकिन गाड़ी समय पर नहीं पहुंची. लेबर पेन भी बढ़ने लगा. ऐसे में महिला को ई-रिक्शा से लेकर पहुंचे. मितानिन पर भी लापरवाही का आरोप है. जिस पर स्वास्थ्य अधिकारी ने जांच कर कार्रवाई की बात कही है.
वहीं 4 दिन पहले अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के MCH वार्ड के टॉयलेट में एक गर्भवती महिला ने बच्चे को जन्म दिया. बच्चा कमोड में फंस गया. करीब 1 घंटे बाद टॉयलेट को तोड़कर बच्चे को बाहर निकाला गया. बच्चा सिर्फ 7 महीने का है और प्री-मैच्योर है.
मिली जानकारी के मुताबिक महिला शौचालय गई थी. कमोड पर बैठते ही उसके पेट में दर्द हुआ और बच्चा उसके गर्भ से बाहर गिर गया. वह शौचालय के कमोड पर ही अटका रहा. जब महिला ने शोर मचाना शुरु किया. तो लोगों को पता चला और बच्चे को बचाया गया.
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पहला मामला कोरबा का
दरअसल पति बाबूलाल विश्वकर्मा पेशे से राज मिस्त्री है. वह परिवार के साथ अयोध्यापुरी दर्री में रहता है. उसके दो बच्चे हैं. सुबह पत्नी सीमा विश्वकर्मा को लेबर पेन होने लगा. जिसके बाद उस स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया. वहां मौजूद स्टाफ ने जांच के बाद बताया कि महिला में खून की कमी है.
प्रसव के दौरान दिक्कत हो सकती है. इसलिए उसे जिला मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी. जिसके बाद एम्बुलेंस के लिए कॉल किया गया. काफी देर तक इंतजार के बाद एम्बुलेंस मौके पर पहुंची. इसके बाद स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी ने एक ऑटो चालक को कॉल कर बुलाया.
पति का कहना है कि मितानिन पत्नी की हालत देखकर मौके से अपने घर चली गई. मितानिन को बुलाने और कॉल करने के बावजूद वह उनके साथ जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल नहीं पहुंची.
इधर जब ई-रिक्शा से महिला को अस्पताल ले जाया रहा था तो उसने बुधवारी के पास स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया. जिसके बाद किसी तरह वे जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे और ऑटो गेट के पास खड़ी कर दी. फौरन प्रसूता और नवजात शिशु को अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उनका इलाज जारी है.
इस पूरे मामले में जिला स्वास्थ्य अधिकारी एसएन केसरी ने बताया कि महिला ने चलती ई-रिक्शा में नवजात को जन्म दिया है. उन्हें जिला कॉलेज अस्पताल भर्ती किया गया है. अगर मितानिन की तरफ से लापरवाही की गई है तो उसकी जांच की जाएगी. जो भी तथ्य सामने आएंगे. उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी.
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दूसरा मामला अंबिकापुर का
दरअसल सूरजपुर जिले के प्रतापपुर की रहने वाली रामपति बाई करीब 7 महीने की प्रेग्नेंट थीं. 13 नवंबर को प्रसव पीड़ा होने पर महिला को परिजनों ने प्रतापपुर सीएचसी में भर्ती कराया. महिला की हालत नाजुक होने पर उसे मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर कर दिया गया.
महिला को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एमसीएच अस्पताल के AMC-2 वार्ड में भर्ती किया गया था. शनिवार सुबह करीब 10:30 बजे प्रसूता टॉयलेट गई थी. इसी दौरान टॉयलेट में ही प्रसव हो गया.
इसके बाद महिला ने शोर मचाना शुरु किया. वहीं शोर सुनने के बाद वार्ड के नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टर मौके पर पहुंचे. इस दौरान पता चला कि महिला की डिलीवरी हो गई है. महिला से पूछताछ करने पर उसने बताया कि वह टॉयलेट करने गई थी. इसके बाद पता चला कि बच्चा कमोड में फंसा हुआ है.
टॉयलेट में महिला की डिलीवरी की जानकारी मिलते ही सफाई सुपरवाइजर आशीष साहू अपने सफाईकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे. टॉयलेट सीट को तोड़कर करीब 1 घंटे बाद बच्चे को बाहर निकाला. बच्चा एक घंटे तक कमोड में फंसा रहा. लेकिन बच्चे की सांस चल रही थी.
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टर्स के मुताबिक बच्चे को SNCU में वेंटिलेटर पर रखा गया है. रामपति बाई का यह दूसरा बच्चा है. बच्चा सिर्फ 7 महीने का है और प्री-मैच्योर है. डॉक्टर्स के मुताबिक कभी-कभी बैठने या पेट में दबाव पड़ने से बच्चा बाहर आ जाता है.
हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट और शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. जेके रेलवानी ने बताया कि बच्चा प्री-मैच्योर है. प्रसूता खतरे से बाहर है. लेकिन बच्चे की हालत नाजुक है. बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया है. डॉक्टर उसकी पूरी निगरानी कर रहे हैं.
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