बालाजी गैस एजेंसी की मनमानी पर फूटा गुस्सा, बिना सिलेंडर मिले उपभोक्ताओं के खाते में आई सब्सिडी, तानाशाही वितरण और बदसलूकी के गंभीर आरोप

Anger erupts over Balaji Gas Agency's arbitrariness; consumers' subsidies credited without cylinders; serious allegations of arbitrary distribution and misbehavior

बालाजी गैस एजेंसी की मनमानी पर फूटा गुस्सा, बिना सिलेंडर मिले उपभोक्ताओं के खाते में आई सब्सिडी, तानाशाही वितरण और बदसलूकी के गंभीर आरोप

बिलासपुर : बिलासपुर जिले में गैस सिलेंडरों की किल्लत के बीच मगरपारा रोड स्थित बालाजी गैस एजेंसी से धांधली और भ्रष्टाचार की हैरान करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं. यहां न सिर्फ आम जनता को घंटों लाइन में लगाने के बाद खाली हाथ लौटाया जा रहा है. बल्कि उपभोक्ताओं के नाम पर फर्जी तरीके से सिलेंडर बुक कर उन्हें कालाबाजारी के लिए बेचा जा रहा है. हालत यह है कि लोगों को सिलेंडर मिला नहीं. लेकिन उनके मोबाइल पर सब्सिडी आने के मैसेज पहुंच रहे हैं.
न्यायधानी बिलासपुर के मगरपारा रोड स्थित बालाजी गैस एजेंसी इन दिनों भ्रष्टाचार और मनमानी का केंद्र बन गई है. स्थानीय निवासियों, विशेषकर महिलाओं ने एजेंसी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. आशा साहू और तबस्सुम जैसी कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी संचालक लोगों का पैसा जमा करवाकर उन्हें हफ्तों से चक्कर लगवा रहे हैं. सबसे बड़ी गड़बड़ी तब सामने आई जब कई लोगों के खाते में बिना गैस लिए ही सब्सिडी की राशि पहुंच गई. इसका सीधा मतलब है कि एजेंसी संचालकों ने कागजों पर सिलेंडर की बिक्री दिखाकर उसे बाहर ऊंचे दामों पर बेच दिया है. जब उपभोक्ता इसकी शिकायत लेकर दफ्तर पहुंचते हैं. तो उन्हें ‘सर्वर डाउन’ होने का बहाना बनाकर टाल दिया जाता है और कर्मचारियों द्वारा उनके साथ बदतमीजी की जाती है.
अहम बात यह है कि हाल ही में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिले में गैस वितरण व्यवस्था को लेकर समीक्षा बैठक की थी। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि किसी भी उपभोक्ता को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़े और शिकायत मिलने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी. यहां तक कि लाइसेंस निरस्तीकरण की चेतावनी भी दी गई थी. इसके बावजूद बालाजी गैस एजेंसी पर लगे आरोपों ने प्रशासनिक निर्देशों की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
वहीं तबस्सुम बेगम और बालकृष्णा चौधरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने सिलेंडर लिया ही नहीं. फिर भी उनके खातों में सब्सिडी आ गई और रिकॉर्ड में सिलेंडर उठाना दिखाया जा रहा है. उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वे इस गड़बड़ी की शिकायत करने जाते हैं. तो एजेंसी कर्मचारी उनके साथ बदतमीजी करते हैं और सर्वर डाउन होने का बहाना बनाते हैं.
​इस गंभीर मामले ने बिलासपुर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. आम जनता का आरोप है कि एजेंसी संचालक और बिचौलियों की मिलीभगत से गरीब और मध्यम वर्ग के हक का सिलेंडर पीछे के दरवाजे से ब्लैक मार्केट में जा रहा है. पीड़ित महिलाओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि या तो इस धांधली को रोका जाए. वरना ऐसी एजेंसियों का लाइसेंस रद्द कर उन्हें बंद कर देना चाहिए. प्रशासन को चाहिए कि वह न सिर्फ बालाजी गैस एजेंसी बल्कि शहर की हर एक गैस एजेंसी के स्टॉक और वितरण रिकॉर्ड की गहनता से जांच करे. जनता के साथ सरेआम धोखाधड़ी करने वाले इन रसूखदारों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. ताकि आम नागरिक को अपने हक की मूलभूत सुविधा के लिए इस तरह दर-दर न भटकना पड़े.
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