बजट में 22,360 करोड़ के भारी-भरकम बजट के बावजूद अधिकारी द्वारा फर्द के नाम पर 150 से 300 ₹ की अवैध वसूली से शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन में भारी आक्रोश

Despite a massive budget of Rs 22,360 crore, the illegal collection of ₹150 to 300 by officials in the name of Fard has caused widespread anger among teachers and school management.

बजट में 22,360 करोड़ के भारी-भरकम बजट के बावजूद अधिकारी द्वारा फर्द के नाम पर 150 से 300 ₹ की अवैध वसूली से शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन में भारी आक्रोश

गरियाबंद/फिंगेश्वर : वर्ष 2026 के बजट में 22,360 करोड़ के भारी-भरकम बजट आबंटन के साथ शिक्षा विभाग के लिए कुबेर का खजाना खोलने के बावजूद विभागीय अधिकारियों की मुफलिसी कम होने का नाम नहीं ले रही है. साल दर साल शिक्षा विभाग के लिए बजट में बढ़ोतरी जारी है. वर्ष 2024 में यह 21,489 करोड़ 2025 में 22,356 करोड़ इस भारी भरकम बजट के बावजूद जहां नौनिहालों को जर्जर शाला भवनों, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत समस्याओं के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है तो वहीं शाला संचालन के लिए जिम्मेदार शिक्षकों को विभागीय कार्यों के सुचारू संचालन - संपादन के लिए अपनी जेबें भी ढीली करनी पड़ती है. कम दर्ज संख्या वाले शालाओं की स्थिति और भी पतली है. शिक्षकों की माने तो अफसरो को मिली सियासी सरपरस्ती ने शिक्षा विभाग की चूले हिला, विभागीय दशा और दिशा को बेपटरी कर दिया है शिक्षकों को आज युक्तियुक्तकारण, संलग्नीकरण अवकाश अवधि के वेतन भुगतान, सेवा पुस्तिका संधारण एवं सत्यापन, अवकाश स्वीकृती, लंबित देयको के भुगतान आदि के लिए बेखौफ हो चले अफसरों के द्वारा ईजाद नए सिस्टम के तहत भारी आर्थिक और मानसिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं.
प्रदेश में शायद ही ऐसा कोई दिन जाता होगा जिसमें शिक्षा विभाग के किसी डीईओ- बीईओ की कार गुजरियां सुर्खियां न बनती हो. विभागीय सूत्रों की माने तो जिला एवं ब्लॉक स्तर के कार्यालय को विभागीय कार्यों के संचालन के लिए उच्च कार्यालय द्वारा पर्याप्त धनराशि आवंटित की जाती है. लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा फर्जी आहरण -,वितरण, कमीशनखोरी के चक्कर में स्तरहीन गैरउपयोगी सामग्रियों के खरीदी आदि में खपा दी जाती है. परिणाम स्वरूप अधीनस्थ शालाओं के संचालनकर्ताओं को एक खासी रकम जेब से लगानी पड़ती है. सरकार के जीरों टॉलरेंस की दुदुंभियां बजाने वाली सरकार मैं नैतिकता और ईमानदारी की पाठ पढ़ाने वाला शिक्षा विभाग आज भ्रष्टाचार का एक जीता जागता सोख्ता गढ्ढा नजर आता है.
विकासखण्ड फिंगेश्वर में केंद्रीय कृत कक्षा पांचवीं एवं आठवीं बोर्ड परीक्षा के फर्द (दस्तावेज) बनाने के नाम पर कथित रूप से अवैध वसूली का मामला सामने आया है. जानकारी के मुताबिक विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय द्वारा संकुल समन्वयवकों के जरिए सभी विद्यालय से 150 से 300 रुपये तक की रकम वसूली जा रही है. जबकि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा परीक्षा व्यय के लिए लाखों रुपए का बजट दिया जाता है. उसके बावजूद इस तरह से वसूली करने से शिक्षकों एवं स्कूल प्रबंधन में आक्रोश व्याप्त है.
बताया जा रहा है कि संबंधित विद्यालयों द्वारा पहले ही छात्रों के फर्द की तीन-तीन प्रतियां नियमानुसार जमा कर दी गई हैं. इसके बावजूद फिर राशि की मांग को शिक्षक अनावश्यक और नियम के खिलाफ बता रहे हैं. शिक्षकों का कहना है कि जब सभी जरुरी दस्तावेज पहले ही जमा किए जा चुके हैं तो अतिरिक्त शुल्क लेने का औचित्य समझ से परे है.
गौरतलब है कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को कई प्रशासनिक कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाता है. ऐसे में फर्द बनाने जैसे कार्य के लिए अलग से राशि वसूलना कई सवाल खड़े करता है.
सूत्रों के मुताबिक इस तरह की वसूली से विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है. इस मामले में कई शिक्षकों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि वे दबाव में राशि देने को मजबूर हैं. क्योंकि परीक्षा संबंधी कार्य प्रभावित होने का डर बना रहता है. हालांकि इस बारे में अभी तक विभाग की तरफ से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है.।स्थानीय शिक्षा जगत एवं अभिभावकों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि अगर वसूली की पुष्टि होती है. तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे.
मिली जानकारी के मुताबिक शाला अनुदान के रुप में मिलने वाली अल्प राशि में शाला प्रमुख को शासन द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन, परिसर में स्थित भवनों की रंगाई -पोताई, लघु मरम्मत कार्य, ग्रुप में भेजे पीड़ीएफ,निर्धारित प्रपत्रो का प्रिंट आउट निकलवाना, स्वच्छता सामाग्री की खरीदी करनी होती हैं. चूंकि अनुदान राशि का शालावार आबंटन छात्रों की दर्ज संख्या के हिसाब से किया जाता हैं ऐसी हालत में कम दर्ज संख्या वाले शाला प्रमुख को दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ती है. गौरतलब है कि इस सत्र में ब्लाक के कई शालाओ को शाला अनुदान के दूसरी किश्त की राशि अभी तक नही मिल पायी है. इसलिए ऐसे में गैरवाजिब वसुली पर शिक्षकों की नाराजगी स्वाभाविक है.
इस मामले पर अधिकारियों ने कहा मामले की जांच कराएंगे.... इस बारे में कोई आदेश जारी नही किया गया है. मामले पर मोबाइल संपर्क में शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव ने कहां फर्द के नाम से कई जा रही उगाही की जांच करवाएंगे. शिकायत पत्र हो तो भेज दीजिए. वही जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह धीर ने कहा इस बारे में कोई आदेश हमारे द्वारा नही जारी किया गया है.
जबकि इस बारे में वसुली कराने वाले प्रभारी बीईओ फिंगेश्वर हेमंत साहू ने कहा कि इसमें कोई दबाव वाली बात नही हैं. शिक्षक स्वेच्छा से चाहते है कि एक ही दस्तावेज में सुधार कर लिया जाए. जिससे कांट -छांट संभावना न रहे.
मामला तूल पकड़ते देख बीईओ फिंगेश्वर बैकफुट पर नजर आए दबाव रहित, स्वेच्छिक बता पल्ला झाड़ने का प्रयास किए. बीईओ की प्रतिक्रिया से परे मामला कुछ और दिखता है. मिली जानकारी मुताबिक राजिम पावर सेंटर से जुड़े और वसुली रैकेट में लिप्त संकुल स्तरीय गुर्गे ने सोमवार को वसुली के लिए एक महिला प्रधान पाठक पर वसुली के लिए फोन पर दबाव बनाने का प्रयास किया. तब उक्त प्रधान पाठिका ने रकम देने इंकार करते हुए इस धौंस बाजी की शिकायत अपने सहकर्मियों से की और यही से मामले में उबाल शुरु हुआ. बीईओ हेमंत साहू के स्वेच्छा वाले बयान भी शिक्षकों द्वारा साक्ष्य के रुप में उपलब्ध कराएं ग्रुपों मे प्रसारित वसुली संबंधी स्कीन शॉट से भी मेल नही खाता,आदेश स्वैच्छा या स्वैच्छिक कही नही लिखा गया हैं. विभागीय सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक शिक्षक( एलबी संवर्ग) से आठवें वेतनमान के लाभ के लिए सेवा पुस्तिका सत्यापन के नाम से विभाग के एक गैर कार्यालीन बाबू के जरिए 5 से 7 हजार रुपए वसुले जाने की बातें भी सामने आ रही है.
बहरहाल मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद जांच कब और कार्यवाही क्या होती है यह तो आने वाला समय ही बतायेगा?
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