फर्जी मानव अधिकार संगठन बनाकर वसूली करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, धमकी देकर अवैध वसूली, ग्रामीणों के घरों में जबरन घुसपैठ, 6 आरोपी गिरफ्तार
A gang involved in extortion using fake human rights organizations has been exposed. Six accused have been arrested for extorting money through threats and forced entry into villagers' homes.
सरगुजा सरगुजा जिले से कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाला मामला सामने आया है. यहां खुद को एक तथाकथित “मानव अधिकार संगठन” का सदस्य बताकर निर्दोष ग्रामीणों को डराने-धमकाने और उनसे मोटी रकम वसूलने वाले एक शातिर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. थाना सीतापुर पुलिस ने गिरोह के 6 सक्रिय सदस्यों को रंगे हाथों धर दबोचा. आरोपियों के पास से वसूली की गई नगदी और वारदातों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक लग्जरी इनोवा गाड़ी जब्त की है. यह गिरोह पिछले काफी समय से क्षेत्र में सक्रिय था और लोगों के मन में कानूनी कार्रवाई का भय पैदा कर वसूली का काला कारोबार चला रहा था.
डरा-धमकाकर अवैध वसूली:– ग्रामीणों के घरों में जबरन घुसपैठ
घटना की शुरुआत तब हुई जब प्रार्थी सुरेंद्र कुमार ने थाने में अपनी आपबीती सुनाई. शिकायत के मुताबिक 6 अज्ञात व्यक्ति अचानक उनके घर में घुस आए और खुद को मानवाधिकार संगठन का बड़ा पदाधिकारी बताने लगे. इन आरोपियों ने सुरेंद्र पर अवैध गतिविधियों में संलिप्त होने का झूठा आरोप लगाया और उन्हें जेल भेजने तथा भारी-भरकम कानूनी केस में फंसाने की धमकी दी. इस कार्रवाई से बचने के एवज में गिरोह ने 20 हजार रुपये की मांग की. डरे हुए प्रार्थी ने खुद को बचाने के लिए मौके पर ही 4 हजार रुपये उन्हें थमा दिए. आरोपियों का दुस्साहस इतना बढ़ गया था कि वे दिन-दहाड़े लोगों के निजी जीवन में हस्तक्षेप कर वसूली कर रहे थे.
महिला क्लीनिक संचालक पर दबाव:– एक लाख रुपये की भारी मांग
प्रार्थी सुरेंद्र को शिकार बनाने के बाद इस गिरोह का लालच और बढ़ गया। वे उसी गांव के एक अन्य घर में जा घुसे. जहां बिंदु महंत नामक महिला एक छोटा क्लीनिक संचालित करती हैं. आरोपियों ने महिला को गैर-कानूनी ढंग से क्लीनिक चलाने का डर दिखाया और उस पर भारी दबाव बनाते हुए 1 लाख रुपये की मांग की. गिरोह की धमकियों से महिला इस कदर भयभीत हो गई कि उसने अपनी सुरक्षा के लिए तुरंत 1 हजार रुपये उन्हें दे दिए. आरोपियों ने उन्हें चेतावनी दी थी कि अगर बाकी रकम का इंतजाम नहीं हुआ. तो उनका क्लीनिक बंद करा दिया जाएगा और उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा.
पुलिस की सक्रियता:– गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर हुई घेराबंदी
इस मामले की गंभीरता और गिरोह के बढ़ते हौसलों को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए. सीतापुर पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई. जिसने क्षेत्र में साक्ष्यों का संकलन शुरू किया. गवाहों के बयानों और संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखने के बाद पुलिस ने सुनियोजित तरीके से घेराबंदी की. लगातार दी गई दबिश के परिणामस्वरूप पुलिस ने सभी 6 आरोपियों को हिरासत में ले लिया. पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कबूल किया कि वे सिर्फ डराने के लिए मानवाधिकार संगठन के नाम का सहारा लेते थे ताकि लोग पुलिस के पास जाने के बजाय उन्हें पैसे दे दें.
विस्तृत नेटवर्क का खुलासा:– कई इलाकों में फैला था ठगी का जाल
कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उन्होंने कबूल किया कि वे सिर्फ सीतापुर तक ही सीमित नहीं थे. बल्कि सरगुजा जिले के कई अन्य थाना क्षेत्रों जैसे बतौली और लुंड्रा में भी दर्जनों ग्रामीणों को अपना शिकार बना चुके थे. पुलिस ने इनके कब्जे से कुल 5 हजार रुपये नगद और इनोवा वाहन बरामद किया है. आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत मामला पंजीकृत कर उन्हें अदालत में पेश किया गया. पुलिस अब इस गिरोह के अन्य संभावित फरार साथियों की तलाश में जुटी है. इस कार्रवाई से क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है.
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