शादी की रस्मों के बीच प्रशासन की अचानक दबिश, आधार में बालिग और स्कूल रिकॉर्ड में नाबालिग निकला दूल्हा, सरकारी गाड़ी में हुई दुल्हन की विदाई

The administration made a surprise raid during the wedding ceremony, revealing the groom to be an adult in Aadhaar and a minor in school records, and the bride was sent off in a government vehicle.

शादी की रस्मों के बीच प्रशासन की अचानक दबिश, आधार में बालिग और स्कूल रिकॉर्ड में नाबालिग निकला दूल्हा, सरकारी गाड़ी में हुई दुल्हन की विदाई

बालोद : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है. जो किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है. डौंडी विकासखंड के ग्राम पंचायत भर्रीटोला 43 में खुशियों का माहौल था. शहनाइयां बज चुकी थीं और नई दुल्हन ससुराल की दहलीज पार कर चुकी थी. घर में 'धरम टीकावन' की रस्म की तैयारी चल रही थी कि तभी अचानक प्रशासन की "एंट्री" हुई और देखते ही देखते शादी का उल्लास सन्नाटे में बदल गया. यह मामला डौंडी ब्लॉक के ग्राम भर्रीटोला-43 का है.
इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ दूल्हे की उम्र का वह 'लोचा' है. जिसने प्रशासन को गांव तक दौड़ने पर मजबूर कर दिया. दरअसल योगेंद्र धनकर पिता हेमलाल धनक उम्र 20 साल 10 माह के आधार कार्ड के मुताबिक उसकी जन्मतिथि 13 जून 2002 दर्ज थी, जिसके मुताबिक वह शादी के लिए पूरी तरह बालिग था. लेकिन प्रशासन के पास पहुंची शिकायत में स्कूल के दाखिल-खारिज (एडमिशन) रजिस्टर का हवाला दिया गया. जहां उसकी जन्मतिथि 13 जून 2005 दर्ज थी.
कानून की तराजू पर जब दोनों दस्तावेजों को तौला गया. तो स्कूल रजिस्टर भारी पड़ा. इसके मुताबिक दूल्हे की उम्र 21 साल होने में महज 2 महीने कम रह गई थी. बस इसी 60 दिन के फासले ने कानूनन इस दूल्हे को 'नाबालिग' करार दे दिया.
महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम जब पुलिस बल के साथ भर्रीटोला पहुंची. तो परिजन हैरान रह गए. जिला अधिकारी समीर और देवेंद्र नेताम ने परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 की बारीकियां समझाईं.
उन्होंने साफ किया कि चूंकि दूल्हा अभी 21 वर्ष का नहीं हुआ है. इसलिए यह विवाह कानूनी रूप से अवैध यानी 'शून्य' माना जाएगा. शुरुआती हिचकिचाहट के बाद दूल्हे के पिता और परिजनों ने कानून का सम्मान करना बेहतर समझा. वे इस बात पर सहमत हो गए कि दुल्हन को वापस उसके मायके भेज दिया जाए.
आमतौर पर दुल्हन की विदाई डोली या फूलों से सजी कार में होती है. लेकिन यहां नजारा अलग था। प्रशासन की मौजूदगी में एक घोषणा पत्र तैयार किया गया. जिस पर दूल्हा-दुल्हन और अधिकारियों ने दस्तखत किए.
इसके बाद नई नवेली दुल्हन को महिला बाल विकास विभाग के सरकारी वाहन में पुलिस हिरासत के बीच वापस राजनांदगांव जिले के साल्हेटोला (मायके) भेजा गया.
इस मामले ने एक गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया है. दूल्हे के आधार कार्ड में जन्मतिथि वर्ष 2025 में अपडेट कराई गई थी. जिसमें उसे बालिग दिखाया गया. अब प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर किस आधार पर स्कूल रिकॉर्ड को दरकिनार कर आधार कार्ड में उम्र बदली गई.
भले ही अभी यह शादी टूट गई हो. लेकिन प्रेम और कानून के बीच एक बीच का रास्ता निकाला गया है. प्रशासन ने परिवार को सलाह दी है कि जैसे ही 2 महीने बाद युवक अपनी कानूनी उम्र 21 साल पूरी कर लेगा. वे दोबारा रीति-रिवाज से शादी कर उसका विधिवत पंजीकरण करा सकते हैं.
फिलहाल, पूरे बालोद जिले में इस "दो महीने की दूल्हा-दुल्हन" वाली कहानी की खूब चर्चा हो रही है. ग्रामीणों के लिए यह एक बड़ा सबक है कि शादी के जश्न में कागजों की मजबूती भी उतनी ही जरूरी है जितनी कि रिश्तों की.
बालोद का यह मामला सबक है कि कानून के आगे चालाकी नहीं चलती. आधार में उम्र बदलवाकर शादी तो कर ली गई. लेकिन स्कूल रिकॉर्ड ने पोल खोल दी. महज 2 महीने की कम उम्र ने कानूनी रूप से विवाह को 'शून्य' कर दिया. जिससे खुशियां सन्नाटे में बदल गईं और दुल्हन को सरकारी गाड़ी में वापस जाना पड़ा.
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