परिजनों ने छात्रा से छीना मोबाइल, पढ़ाई करने कहा तो रुम में जाकर नाराज नाबालिग लड़की ने लगाई फांसी, खतरे में बचपन

Family snatched mobile from the student, when asked to study, the angry minor girl went to her room and hanged herself, childhood in danger

परिजनों ने छात्रा से छीना मोबाइल, पढ़ाई करने कहा तो रुम में जाकर नाराज नाबालिग लड़की ने लगाई फांसी, खतरे में बचपन

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कक्षा 9वीं की छात्रा ने अपने परिजनों को चौंका देने वाला झटका दिया है. छात्रा से परिजनों ने मोबाइल छीना तो उसने सुसाइड कर लिया. मामला सरकंडा थाना क्षेत्र का है.
मिली जानकारी के मुताबिक वसंत विहा में कक्षा 9वीं की छात्रा से मोबाइल छीनकर परिजनों ने दूसरा मोबाइल दिया. तो ये बात छात्रा को बर्दास्त नहीं हुई. इस बात को लेकर वो तनाव में आ गई. अवसाद में चली गई और खुद को ही खत्म कर ली. छात्रा दूसरे कमरे में जाकर फांसी लगा ली. घटना की जानकारी मिलते ही परिजन छात्रा को अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.
वसंत विहार की यह दुखद घटना सिर्फ एक चेतावनी है कि कैसे मोबाइल की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं हमारे समाज में गंभीर समस्या हैं. यह जरुरी है कि हम इस विषय पर ध्यान दें. और बच्चों को डिजिटल दुनिया के साथ-साथ वास्तविक दुनिया में भी संतुलन बनाना सिखाएं. आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती. बल्कि संवाद और समझदारी से ही इन मुद्दों का समाधान निकाला जा सकता है.
आज की पीढ़ी मोबाइल और इंटरनेट पर अत्यधिक निर्भर हो गई है. यह न सिर्फ उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है. बल्कि उनके पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है. किशोरों में मोबाइल की लत की वजह मानसिक तनाव, चिंता, और अवसाद जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं.
मासूमों का बचपन मोबाइल छीन रहा है. बच्चों को बहलाने अक्सर माएं उन्हें मोबाइल पकड़ा देती हैं. वे मोबाइल देखते हुए दूध पीते हैं या खाना खाते हैं. मोबाइल न मिला तो उनके हलक के नीचे निवाला नहीं जाता है. यह आदत अब बच्चों को भारी पड़ रही है. गेम्स और रील के चक्कर में उनमें चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ रहा है. साइकेट्रिक ओपीडी में हर दिन कम से एक दर्जन ऐसे मामले पहुंच रहे है. जिनमें मां बच्चों में मोबाइल की लत से परेशान हैं.
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खिलौनों की जगह फोन की आदत एम्स में अब तक करीब 2000 ऐसे बच्चे इलाज के लिए आ चुके हैं. जिनमें फोन एडिक्शन को बीमारी के लक्षण दिखे. इनकी उम्र 2 से लेकर 3.5 साल हैं. इनमें खिलौनों की जगह फोन की आदत लग गयी. इनकर औसतन screen time 4 से 8 घंटे तक रहा.
अभिभावकों को सलाह:
Working couple अपने काम के चलते दो साल से छोटे बच्चों को बहलाने के लिए मोबाइल फोन न दें. उसे खिलौने दे। परिवार के अन्य सदस्यों को देखभाल के लिए कहें. बच्चों के सामने खुद मोबाइल के इस्तेमाल से बचें.
साइकेट्रिक opd में इलाज के लिए पहुंच रहे मासूमों में देर से बोलने में समस्या, सामाजिक और भावनात्मक विकास न होना और खानपान में परेशानी होना जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं. इसके अलावा मोटापा, सोने में परेशानी, फियर ऑफ मिसिंग आउट, गुस्सा, चिड़‌चिड़ापन, लैक ऑफ कंसंट्रेशन जैसी परेशानियां भी आम हैं.
एम्स की साइकेट्रिक ओपीडी में इलाज के लिए पहुंच रहे मासूमों में देर से बोलने में समस्या, सामाजिक और भावनात्मक विकास न होना और खानपान में परेशानी होना जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं. इसके अलावा मोटापा, सोने में परेशानी, फियर ऑफ मिसिंग आउट, गुस्सा, चिड़‌चिड़ापन, लैक ऑफ कंसंट्रेशन जैसी परेशानियां भी आम हैं.
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