भाजपा सरकार में आडिट के पहले क्या सच जलाया गया!, आबकारी भवन में आग लगना दाल में कुछ काला, शराब घोटाला के राज दफ्न! -धनंजय

What truth was burnt before the audit in the BJP government? Fire in the Excise building is something fishy, ​​the secrets of the liquor scam are buried - Dhananjay

भाजपा सरकार में आडिट के पहले क्या सच जलाया गया!, आबकारी भवन में आग लगना दाल में कुछ काला, शराब घोटाला के राज दफ्न! -धनंजय

रायपुर : राजधानी रायपुर के लाभांडी स्थित आबकारी भवन में शनिवार-रविवार की दरमियानी रात लगी आग ने छत्तीसगढ़ की सबसे अहम राजस्व एजेंसी छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन को लेकर बड़े और असहज सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस तीसरी मंज़िल पर यह आग लगी. वहीं उस कॉरपोरेशन का दफ्तर है. जहां सरकारी शराब की खरीदी-बिक्री से जुड़ा पूरा लेखा-जोखा और इस साल की बिक्री से संबंधित अहम फाइलें रखी गई थीं.
संयोग या साजिश है कि आग ठीक उसी वक्त लगी जब सोमवार से ऑडिट शुरु होना था. अंदेशा है कि आग में वे कागजात जलकर राख हो गए जिनके आधार पर ऑडिट होना था. और अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब रिकॉर्ड ही नहीं बचे तो ऑडिट आखिर किस आधार पर होगा.
मिली जानकारी के मुताबिक रात करीब 9 बजे आबकारी भवन की तीसरी मंज़िल से धुआं और आग की लपटें दिखाई दीं. फायर ब्रिगेड को खबर दी गई और आग बुझाने में आधी रात लग गई. लेकिन तब तक हॉलनुमा कमरे में रखी फाइलें और दस्तावेज पूरी तरह जल चुके थे. आज भी दूसरे और तीसरे माले की आग के काले निशान सड़क से साफ दिखाई दे रहे हैं. इसके बावजूद आबकारी विभाग के अफसरों की चुप्पी रहस्य को और गहरा करती है.
हैरानी की बात यह है कि आग लगने की औपचारिक सूचना पुलिस तक नहीं पहुंची थी. या यूं कहें कि पहुंचाई ही नहीं गई. यह लापरवाही है या जानबूझकर उठाया गया कदम.. यह सवाल भी अपने आप में गंभीर है.
आबकारी विभाग से राज्य को राजस्व का एक बड़ा हिस्सा मिलता है. सरकारी शराब की खरीदी, भंडारण और बिक्री का पूरा तंत्र इसी कॉरपोरेशन के जरिए चलता है. ऐसे में रिकॉर्ड का नष्ट होना सिर्फ एक प्रशासनिक घटना नहीं. बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और संभावित जांचों पर सीधा हमला है.

उठती रही थी बेवरेज कार्पोरेशन में गड़बड़ी की बातें
सूत्रों का दावा है कि शुरुआती दो साल में आबकारी व्यवस्था के भीतर भारी गड़बड़ियां हुईं. जमकर “काला-पीला” चला और सत्ता और संगठन से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर भीतरखाने सवाल उठते रहे हैं. ऐसे माहौल में ऑडिट से ठीक पहले आग लगना महज़ इत्तेफाक मान लिया जाए. यह बात हजम नहीं होती.
भाजपा सरकार बनने के बाद लंबे समय तक स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ब्रेवरेज कार्पोरेशन की अध्यक्षता करते रहे. कुछ ही महीने पहले श्रीनिवास राव मद्दी को कॉरपोरेशन का नया अध्यक्ष बनाया गया. ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नेतृत्व परिवर्तन के बाद पुराने रिकॉर्ड और लेन-देन का ऑडिट किसी के लिए असहज होने वाला था. क्या इसी आशंका के बीच वे दस्तावेज आग की भेंट चढ़ गए?, जिनसे कई परतें खुल सकती थीं.

स्कूल शिक्षा विभाग के दफ्तर में भी लगी थी आग 
यह पहला मौका नहीं है जब किसी अहम सरकारी दफ्तर में आग लगने की घटना सामने आई हो. हाल ही में स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ के कार्यालय में भी आग लगने की घटना ने कई सवाल खड़े किए थे. ऐसे में यह सवाल और ज्यादा तीखा हो जाता है कि आखिर सरकारी दफ्तरों में आगजनी की घटनाएं लगातार क्यों बढ़ रही हैं. क्या यह महज़ सुरक्षा मानकों की अनदेखी है या फिर जांच, ऑडिट और जवाबदेही से बचने का एक सुविधाजनक तरीका बनता जा रहा है.

लंबी है सवालों की फेहरिस्त
अब सवालों की लिस्ट लंबी है. आग लगने का असली वजह क्या थी. शॉर्ट सर्किट या कुछ? और फायर सेफ्टी ऑडिट कब हुआ था? उसकी रिपोर्ट क्या कहती है? जब रिकॉर्ड जल गए तो क्या उनके डिजिटल बैकअप मौजूद थे? और अगर थे तो वे कहां हैं? पुलिस को अधिकृत सूचना क्यों नहीं दी गई और किसके निर्देश पर यह कदम उठाया गया. ऑडिट अब किन दस्तावेजों के आधार पर होगा और पिछले दो साल की खरीदी-बिक्री, स्टॉक और टेंडर की जांच आखिर कैसे संभव होगी. आग से पहले या बाद में फाइलों की आवाजाही हुई या नहीं, और उस दौरान के सीसीटीवी फुटेज कहां हैं? ये सभी सवाल जवाब मांगते हैं.

आग आबकारी दफ्तर में लगी है धुआं सिस्टम से उठ रहा है!
यह मामला अब सिर्फ एक आग की घटना तक सीमित नहीं है. बल्कि राज्य के राजस्व, सिस्टम की विश्वसनीयता और जनता के भरोसे से जुड़ा है. अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक था तो विभागीय अफसर चुप क्यों हैं? और अगर कुछ छुपाने की कोशिश हुई है, तो आग लगने से पहले आखिर ऐसा क्या था? जिसे जल जाना “ज़रूरी” समझा गया. अब जरुरत है स्वतंत्र जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की.. क्योंकि बिना जवाबों के यह धुआं सिर्फ इमारत से नहीं, पूरे सिस्टम से उठता रहेगा.
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आबकारी भवन में आग लगना दाल में कुछ काला, शराब घोटाला के राज दफ्न! -धनंजय

ऑडिट के पहले आबकारी भवन लाभांडी में लगी आग को भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार छिपाने षड्यंत्र करार देते हुए प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा भाजपा सरकार के दो साल में बेहिसाब शराब घोटाला हुआ है. मिलावटी शराब, खराब क्वालिटी का शराब, प्लेसमेंट कम्पनियों की गड़बड़ियां, राजस्व की बड़ी चोरी हुई है. जो ऑडिट में जनता के सामने उजागर हो जाती. क्या इससे बचने के लिये ऑडिट के पहले आबकारी विभाग की तीसरी मंजिल में आग लगा दी गई. ताकि ऑडिट के लिए रखी दस्तावेज जलकर खाक हो जाए और भ्रष्टाचार के सबूत नष्ट हो जाए. ये गम्भीर मामला है. इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए.
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा डबल इंजन की सरकार में हर विभाग में भारी गड़बड़ियां हो रही है. अभी कुछ दिन पहले रायपुर डीओ ऑफिस में भी आग लगी थी. जिसमे जरुरी दसतावेज जलकर खाक हो गए. इसके पहले गुढ़ियारी में बिजली विभाग के करोड़ो रुपया का ट्रांसफार्म जलकर खाक हो गया था. उसकी जांच रिपोर्ट भी संदिग्ध थी. जिम्मेदारों पर अब तक कोई कार्यवाही नही हुई है. अब आबकारी विभाग में भी आगजनी हो गई. ये सब घटनाये ऑडिट के पहले ही हो रही है. क्या आगजनी की घटना को हादसा बताकर भ्र्ष्टाचार के सबूत मिटाये जा रहे है.
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि साल के आखिर में विभागीय ऑडिट होती है. जिसकी जानकारी सदन के बजट सत्र में रखी जाती है. ऐसे में भ्र्ष्टाचार छिपाने गड़बड़ियों पर पर्दा करने आगजनी की घटनाये हो रही है. इसे शार्ट सर्किट बताकर जनता का ध्यान गड़बड़ियों से हटाया जाने का षडयंत्र रचा जा रहा है?. भाजपा सरकार शराब की काली कमाई कर रही है.और सरकारी दफ्तरों में आग लगवा रही है?.
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8 फरवरी 2026 की सुबह एक बार फिर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भवन का पुनः निरीक्षण किया गया. पुनः किए गए अवलोकन में यह पुष्टि की गई कि आग की इस घटना में किसी भी अहम दस्तावेज, रिकॉर्ड या फाइल को कोई नुकसान नहीं हुआ है. कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी इस घटना का कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा है.