तेंदुए ने ली सड़क किनारे आराम कर रहे बुजुर्ग की जान, जंगल में मिली लाश, इलाके में दहशत का माहौल, दो महीने बीमार 60 साल के हाथी की मौत

Leopard took the life of an old man resting on the roadside, dead body found in the forest, atmosphere of panic in the area, 60 year old elephant died after being ill for two months.

तेंदुए ने ली सड़क किनारे आराम कर रहे बुजुर्ग की जान, जंगल में मिली लाश, इलाके में दहशत का माहौल, दो महीने बीमार 60 साल के हाथी की मौत

तेंदुए ने ली बुजुर्ग की जान, जंगल में मिली लाश, इलाके में दहशत

धमतरी : धमतरी जिले में तेंदुए ने एक बुजुर्ग की जान ले ली. इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल है. तेंदुआ सड़क किनारे सो रहे बुजुर्ग को घसीटकर जंगल ले गया और उसे मौत के घाट उतार दिया.  यह घटना मगरलोड इलाके के ग्राम बेन्द्राचुआ गांव की है.
बताया जा रहा है कि सोनारिन दैहान निवासी मनराखन ध्रुव उम्र 62 साल सड़क किनारे आराम कर रहा था. तभी तेंदुआ आ धमका.. तेंदुआ बुजुर्ग को सड़क से घसीटते हुए जंगल की तरफ ले गया और मौत के घाट उतार दिया. घटना की खबर के बाद उत्तर सिंगपुर वन परिक्षेत्र के अधिकारी और मगरलोड पुलिस मौके पहुंचकर आगे की कार्रवाई में जुटी है.
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दो महीने बीमार 60 साल के हाथी की मौत

धरमजयगढ़ : वनमंडलाधिकारी धरमजयगढ़ वनमंडल ने बताया कि छाल परिक्षेत्र स्थित बेहरामार परिसर में 31 जनवरी 2025 को एक मखना हाथी (नर हाथी) की मौत हो गई. यह हाथी लगभग 60 साल का था और पिछले दो महीने से गंभीर रुप से बीमार था.
हाथी के शरीर पर कई स्थानों, विशेषकर चारों पैर, ऊपरी उदर भाग और पुष्ट भाग में गहरे घाव थे. जिनसे लगातार मवाद (पस) निकल रहा था. वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर, वन्यप्राणी चिकित्सकों ने 19 दिसंबर 2024 को करतला वन परिक्षेत्र (कोरबा वनमंडल) में इसका इलाज किया था. इसके बाद लगातार इसकी निगरानी की गई और चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार दवाएं दी जाती रहीं है.
मिली जानकारी के मुताबिक 2 जनवरी 2025 को यह हाथी करतला वन परिक्षेत्र से धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल परिक्षेत्र में प्रवेश कर गया. जहां इसकी हालत पर लगातार नजर रखी गई और दवाएं दी जाती रही. हाथी ट्रैकर्स, हाथी मित्र दल और वन विभाग के कर्मियों द्वारा लगातार उसकी गतिविधियों की निगरानी की गई. हालांकि कुछ दिनों तक स्वास्थ्य में सुधार दिखा, लेकिन बाद में हालत बिगड़ने लगी. 29 और 30 जनवरी 2025 को हाथी की गतिविधियों में कमी देखी गई और वह दिनभर 10-12 घंटे तक एक ही स्थान पर रहने लगा. बेहतर इलाज के लिए 30 जनवरी 2025 को सूरजपुर जिले के रमकोला हाथी राहत एवं पुनर्वास केंद्र से दो कुमकी हाथी मंगवाए गए.
31 जनवरी 2025 को बेहरामार परिसर (छाल परिक्षेत्र) में वन्यप्राणी चिकित्सकों की समिति द्वारा कुमकी हाथियों की सहायता से इलाज किया जा रहा था. इसी दौरान हाथी अचानक बैठ गया और गहरी सांसें लेने लगा. शाम 4 बजे वन्यप्राणी चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. शाम हो जाने की वजह शव विच्छेदन संभव नहीं था. इसलिए वनरक्षकों को सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात किया गया. 1 फरवरी 2025 की सुबह 9 बजे जिला स्तरीय पशु चिकित्सकों की टीम ने शव विच्छेदन किया.
इस रिपोर्ट के मुताबिक हाथी की मौत गंभीर संक्रमण की वजह हुई. इसके बाद नियमानुसार 10×10  फीट का गड्ढा खोदकर उसका दफन किया गया. धरमजयगढ़ वनमंडल एक हाथी प्रभावित क्षेत्र है. जहां वन विभाग हाथियों की सतत ट्रैकिंग और निगरानी की जा रही है.
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