फर्जी ट्रांसफर आदेश मामले में गिरफ्तारी के बाद BJP की बड़ी कार्रवाई, जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और उपाध्यक्ष पुनीराम पटेल 6 साल के लिए निष्कासित

Major action by the BJP following arrests in the fake transfer order case: District General Secretary Krishna Awasthi and Vice President Puniram Patel expelled for six years.

फर्जी ट्रांसफर आदेश मामले में गिरफ्तारी के बाद BJP की बड़ी कार्रवाई, जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और उपाध्यक्ष पुनीराम पटेल 6 साल के लिए निष्कासित

बलौदाबाजार : फर्जी स्थानांतरण आदेश तैयार कर एक सरकारी कर्मचारी को मनचाही जगह पर पदस्थ कराने के मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने दो पदाधिकारियों के खिलाफ बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की है. भाजपा प्रदेश कार्यालय ने बलौदाबाजार जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और जिला उपाध्यक्ष पुनीराम पटेल को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है. दोनों नेताओं के निष्कासन का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है.
फर्जी स्थानांतरण आदेश के इस मामले में पुलिस अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है. गिरफ्तार आरोपियों में भाजपा के तत्कालीन जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी, जिला उपाध्यक्ष पुनीराम पटेल, ग्रामीण चिकित्सा सहायक करण कुमार देवांगन, रवि कुमार सेन, निजी कंप्यूटर ऑपरेटर प्रणव अवस्थी और प्रखर कश्यप शामिल हैं.
पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच करते हुए फर्जी आदेश तैयार करने और उसे सरकारी कार्यालय में प्रस्तुत करने में हर आरोपी की भूमिका की पड़ताल कर रही है.
पूरा मामला पलारी विकासखंड के ग्राम रोहांसी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ ग्रामीण चिकित्सा सहायक करण कुमार देवांगन के स्थानांतरण से जुड़ा है. पुलिस के मुताबिक करण कुमार देवांगन ने 17 अगस्त 2026 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी के खंड चिकित्सा अधिकारी के समक्ष एक कथित स्थानांतरण आदेश पेश किया था. इस आदेश में उसका स्थानांतरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहांसी से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मोपर, विकासखंड भाटापारा किए जाने का उल्लेख था.
प्रस्तुत आदेश में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय बलौदाबाजार-भाटापारा का आदेश क्रमांक NHM/AR/2026-27/1359 और 14 अगस्त 2026 की तारीख अंकित थी। विभागीय स्तर पर आदेश के संबंध में संदेह होने के बाद इसकी जांच की गई. प्रारंभिक जांच में आदेश कथित रूप से फर्जी पाया गया, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई.
पुलिस कार्रवाई और दोनों भाजपा पदाधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद पार्टी की जिला इकाई ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी. इसके आधार पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के निर्देश पर 25 अगस्त को कृष्णा अवस्थी और पुनीराम पटेल के अलग-अलग निष्कासन आदेश जारी किए गए। आदेश में कहा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों में उनकी कथित संलिप्तता से संगठन की छवि धूमिल हो रही थी और उनका आचरण पार्टी अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है.
कृष्णा अवस्थी और उनके पुत्र प्रणव अवस्थी की गिरफ्तारी के बाद बलौदाबाजार जिले में मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है. स्थानीय स्तर पर कई अन्य आरोप और चर्चाएं भी सामने आ रही हैं. आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ ग्राम पंचायतों के सरपंचों से विकास कार्य या अन्य काम दिलाने के नाम पर कथित रूप से रकम ली गई थी. इसके अलावा बेरोजगार युवाओं को जिले के आसपास संचालित सीमेंट संयंत्रों में नौकरी दिलाने और सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर भी पैसे लेने के आरोप लगाए जा रहे हैं.
हालांकि इन अतिरिक्त आरोपों की अभी तक स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. सभी कथित पीड़ितों द्वारा पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराए जाने की जानकारी भी सामने नहीं आई है. इसलिए इन आरोपों को जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित नहीं माना जा सकता. अगर संबंधित लोग दस्तावेज और साक्ष्यों के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हैं, तो जांच का दायरा बढ़ सकता है.
इसी बीच एक युवती द्वारा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन दिए जाने का मामला भी सामने आया है. आवेदन में आरोप लगाया गया है कि प्रणव अवस्थी ने आबकारी विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर उससे 50 हजार रुपये लिए थे. शिकायतकर्ता युवती के महासमुंद क्षेत्र की निवासी होने की जानकारी सामने आई है। उसे संबंधित क्षेत्र में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दिए जाने की बात कही जा रही है. आवेदन में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और उस पर पुलिस द्वारा की गई आगे की कार्रवाई की स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है.
बलौदाबाजार जिले में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित वसूली का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले महिला एवं बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर के पद पर नौकरी लगवाने के नाम पर बड़ी रकम लेने के आरोप सामने आए थे. उस मामले में विभाग में कार्यरत मेवा चोपड़ा के खिलाफ कार्रवाई की गई थी. कुछ भाजपा जनप्रतिनिधियों की कथित भूमिका को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं हुई थीं. लेकिन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और अलग-अलग व्यक्तियों पर की गई कार्रवाई की पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी थी.
ताजा खबर से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें
https://chat.whatsapp.com/CvTzhhITF4mGrrt8ulk6CI?