सच बोलना पड़ा भारी!, SDM ने महिला सरपंच को किया बर्खास्त, पंचायत में मचा बवाल, बर्खास्तगी के विरोध में 20 पंचों ने दिया सामूहिक इस्तीफा

Speaking the truth proved costly! SDM dismisses female Sarpanch; uproar ensues in the Panchayat; 20 Panches resign en masse in protest against the dismissal.

सच बोलना पड़ा भारी!, SDM ने महिला सरपंच को किया बर्खास्त, पंचायत में मचा बवाल, बर्खास्तगी के विरोध में 20 पंचों ने दिया सामूहिक इस्तीफा

सूरजपुर/प्रतापपुर : छत्तीसगढ़ में सूरजपुर जिले के मदननगर ग्राम पंचायत में सोमवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ. यहां बर्खास्त सरपंच सुंदरी बाई के समर्थन में पंचायत के 20 निर्वाचित पंचों ने सामूहिक रूप से पद से इस्तीफा दे दिया. पंचों का आरोप है कि सरपंच को पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के तहत आवाज उठाने की सजा मिली है. यह मामला एसईसीएल भटगांव ओपनकास्ट कोयला परियोजना के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण से जुड़ा बताया जा रहा है.
क्या है मामला?
दरअसल पंचों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी, प्रतापपुर को सौंपे इस्तीफा पत्र में आरोप लगाया कि सरपंच सुंदरी बाई को छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 40(1)(ख) के तहत विधि-विरुद्ध तरीके से पद से हटाया गया है.
उनका कहना है कि सरपंच क्षेत्र के आदिवासी किसानों की समस्याओं और प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के दौरान पांचवीं अनुसूची एवं पेसा कानून के प्रावधानों के पालन की मांग उठा रही थीं. इसी वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई की गई. विरोध स्वरूप सभी पंचों ने स्वेच्छा से त्यागपत्र सौंपते हुए प्रशासन से उसे फौरन कबूल करने की मांग की है.
कोयला परियोजना के विरोध से जुड़ा मामला
उल्लेखनीय है कि मदननगर, कनकनगर और जगन्नाथपुर क्षेत्र में प्रस्तावित एसईसीएल भटगांव ओपनकास्ट कोयला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण एवं डीजीपीएस सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है. प्रशासन के मुताबिक 2 और 3 अप्रैल 2026 को सर्वेक्षण के दौरान विरोध प्रदर्शन हुआ था. जिसमें सुंदरी बाई पर ग्रामीणों का नेतृत्व करते हुए सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का आरोप लगा. 
इस मामले की सुनवाई के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) प्रतापपुर ने 8 जुलाई 2026 को मिले सबूतों के आधार पर उन्हें पद से अलर करने का आदेश जारी किया था. सुनवाई के दौरान सुंदरी बाई ने आरोपों से इंकार करते हुए कहा था कि ग्रामसभा को सर्वेक्षण की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी और उन्होंने किसी भी तरह से ग्रामीणों को उकसाया नहीं. उनका यह भी कहना था कि पंचायत पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आती है. जहां पेसा कानून के तहत ग्रामसभा की सहमति और भूमिका अहम है. हालांकि प्रशासन ने मिले सबूतों के आधार पर उनकी दलीलों को मंजूर नहीं किया. और सरपंच को बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया.
इस्तीफा देने वाले पंचों के नाम
सामूहिक इस्तीफा देने वालों में शामिल हैं: सुनीता बेक, अमृता केसरी, हिरामती बेक, रामविनोद खाखा, धनसाय खेस, नन्की आयम, छोटेलाल कुजूर, अजय मिंज, कालीचरण, राधिका करसायल, फूलकुमारी सांडिल्य, मानती खलखों, धरमजीत मिंज, दीपा टोप्पो, बीगन गिद्ध, करीमन, गीता गिद्ध, अमिला मिंज, करमु खलखों और बिसनी किस्पोट्टा. इन पंचों ने प्रशासन से इस्तीफे तत्काल स्वीकार करने की मांग की है.
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