सदन में गूंजा अफीम की खेती का मुद्दा, 44 हजार किसान नहीं बेच पाए धान, दिव्यांगजनों की पदोन्नति पर तीखी बहस, सभी कांग्रेसी विधायक निलंबित

The issue of opium cultivation resonated in the House, 44,000 farmers were unable to sell their paddy, a heated debate erupted over the promotion of the disabled, and all Congress MLAs were suspended.

सदन में गूंजा अफीम की खेती का मुद्दा, 44 हजार किसान नहीं बेच पाए धान, दिव्यांगजनों की पदोन्नति पर तीखी बहस, सभी कांग्रेसी विधायक निलंबित

अफीम की खेती का मुद्दा

रायपुर : विधानसभा बजट सत्र के दौरान सोमवार को शून्य काल के दौरान विपक्ष ने दुर्ग में सामने आई भाजपा नेता के खेत में अफीम की खेती का मुद्दा उठाया. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने मामले पर स्थगन प्रस्ताव पेश करते हुए सरकार पर दोषियों को बचाने का प्रयास करने का आरोप लगाया. इसके साथ ही कांग्रेस ने सरकार पर ‘धान के कटोरा’ को ‘अफीम का कटोरा’ बनाने की बात कही.
पूरे मामले पर सदन में सत्ता पक्ष ओर विपक्ष के बीच जोरदार हंगामा हुआ. इसके साथ सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई.नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि राजधानी से 50 किलोमीटर की दूरी पर विनायक ताम्रकार नाम का व्यक्ति अपनी निजी भूमि पर अफीम की खेती करने में लगा हुआ है. पूरा छत्तीसगढ़ सुलझे नशे से बर्बाद हो रहा है. और जिस ट्रैक से दूसरे तरफ किसानों के धान की खरीदी नहीं की जा रही ऐसे में हमे यह लगता है कि शायद आप लोग यही चाहते हैं कि पूरे छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती हो. छत्तीसगढ़ जो धान का कटोरा है. उसे आप लोग अफीम का कटोरा बनान चाहते है. इसमें पूरे शासन के लोग शामिल हैं. यह सामूहिक संरक्षण में किया जा रहा है.
इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि मै तो यही कहूंगा कि इसमें कांग्रेस शामिल है. नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री का नाम लिया. इसका असली तथ्य कहां है? यह खेती आज से नहीं चालू है. यह खेती 4 साल से हो रही है. वहां की दूरी पाटन से 40 किलोमीटर है. भूपेश बघेल ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह होली के ठीक पहले की घटना है. गांव के लोग लकड़ी इकट्ठा करने गये थे, वहां चने के खेत से होते हुए उन लोगों ने यह खेती देखी. कलेक्टर का कहना है कि विनायक ताम्रकार के खेत में अफीम की खेती हो रही है, लेकिन एफआईआर में नौकर को मुख्य आरोपी बताया गया है. जो मुख्य आरोपी है, उसका नाम तीसरे नंबर पर है. इसे सबका संरक्षण है, इसलिए दूसरी बात इसमें रकबा नहीं है. कुल मिलाकर लीपापोती करने की कोशिश की जा रही है. एफआईआर आखिर इतना लाचार क्यों बनाया गया है. इसे ग्राहय कर इसमें चर्चा कराएं. पहले तो पंजाब जैसे जगहों से सिर्फ नशे के पदार्थ का आना-जाना चलता था. लेकिन अब तो अफीम की यानी नशे की खेती हो रही है.
उप मुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने अपने जवाब में कहा कि दुर्ग पुलिस को 6 मार्च को मुखबिर से खबर मिली थी. किसी सरपंच से ऐसी खबर नहीं मिली थी. खबर मिली थी कि अवैध तरीके से समोद गांव के फॉर्म हाउस में अफीम की खेती की जा रही है. फौरन वाहन टीम पहुंची. एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्यवाई की गई. दूसरे दिन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की मौजूदगी में जप्ती की कार्रवाई की गई. दोषियों को मौके से ही गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया. 6 हज़ार 242 किलोग्राम अफीम जप्त की गई थी.
उन्होंने कहा कि बीते दो साल में दो हज़ार से ज़्यादा प्रकरण में से पाँच हज़ार से ज़्यादा आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है. शासन ने सभी जिलों में टास्क फ़ोर्स का गठन किया है. आरोपी और सप्लायरों के ख़िलाफ़ फाइनेशियल इन्वेस्टिगेशन अलग से किया जा रहा है. आरोपियों की 16 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति जप्त की गई है. 2024-25 में ड्रग्स डिपॉस्जल कमेटी का गठन कर बड़े पैमाने पर ड्रग्स डिस्पोज किया गया है. मानस पोर्टल नम्बर 1933 का व्यापक प्रचार प्रसार किया जा रहा है.
नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरणदास महंत ने कहा कि गृहमंत्री ने कहा कि मुखबिर ने इसकी खबर दी थी. अजय चंद्राकर ने कहा कि 4 साल से खेती हो रही थी. राज्य के कई हिस्सों में अफ़ीम की खेती की खबर आती रही है. मैं 1993 में इस विभाग का मंत्री रहा हूँ. कैसे अफ़ीम बनता है ये सब मुझे पता है. अफ़ीम की खेती जो शुरु हुई है, ये बड़ा ख़तरनाक हो सकता है. छत्तीसगढ़ के गांवों में यदि इस तरह का नशा पैदा करेंगे, तो हमारे बच्चों का क्या होगा.
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सदन में कवासी ने की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी, मंत्री को किया चारोखाने चित्त, विपक्ष का बहिर्गमन

प्रश्नकाल में कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए नजर आए. सदन में धान खरीदी के मुद्दे को लेकर जमकर हंगामा देखने को मिला. इस दौरान कांग्रेस ने सरकार पर किसानों के साथ छल करने का आरोप लगाया और सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर बहिर्गमन कर दिया.
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने बस्त के पांच जिलों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि बस्तर के पांच जिलों में 32,200 किसानों से इस साल धान खरीदी नहीं हुई है. किसान कर्ज लिए ​थे, बेटी की शादी करनी थी. धान बेचने की उम्मीद में पंजीयन भी कराया था. उनकी गिरदावरी भी हुई, फिर भी उनसे धान क्यों नहीं खरीदा गया. उन्होंने कहा कि अगर इन किसानों से धान खरीदी होती तो उन्हें करीब 206 करोड़ रुपए मिलते, जिससे वे अपना कर्ज चुका सकते थे. उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या अब सरकार किसानों का कर्ज चुकाएगी.
इस पर खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल ने जवाब देते हुए कहा कि किसान धान बेचने नही आए तो कैसे धान खरीदी करें. बस्तर में पिछले कार्यकाल से दुगुना, तिगुना धान खरीदी हुई. मंत्री के जवाब पर कवासी लखमा ने कहा, ये सदन में झूठ बोल रहे है. मंत्री ने कहा, जो किसान नहीं बेच पाए थे. उनके लिए दो दिन बढ़ाए थे. कवासी लखमा बोले, दो दिन में कितने धान लिए. उसका आंकड़ा बताएं. बीजापुर के किसानों ने कर्ज लिया है. या तो उनका कर्जा चुका दें, या धान खरीद लें.
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दिव्यांगजनों की पदोन्नति पर तीखी बहस: 3% आरक्षण का प्रावधान, लेकिन अब तक कोई लाभ नहीं; भूपेश बघेल ने मंत्री पर साधा तंज—’होली का नशा अभी उतरा नहीं’

छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के प्रश्नकाल में दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा. भाजपा विधायक प्रमोद मिंज ने सरकार से सवाल किया कि दिव्यांगजनों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ क्यों नहीं मिल रहा है.
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सदन में लिखित जवाब देते हुए कहा कि दिव्यांगजनों के लिए पदोन्नति में 3 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है. लेकिन अब तक किसी दिव्यांग कर्मचारी को पदोन्नति नहीं दी गई है.
इस पर विधायक प्रमोद मिंज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार दिव्यांगजनों को पदोन्नति में 4 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने इस दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. विभाग की तरफ़ से यह कहा जा रहा है कि पदोन्नति के लिए आवेदन नहीं आए. जबकि यह सही नहीं है. विधायक ने सरकार से पूछा कि पदोन्नति कब से शुरु होगी और इसकी समयसीमा क्या है?
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जवाब में कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों को अपने स्तर पर व्यवस्था करने का अधिकार दिया है. इसी के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने 3 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है. उन्होंने बताया कि अभी तक कोई दिव्यांग अधिकारी पदोन्नति लेना नहीं चाहता था. एक आवेदन आया भी था. लेकिन संबंधित अधिकारी ने बाद में उसे वापस ले लिया.
इस जवाब पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार पर करारा तंज कसते हुए कहा, “यह कैसा जवाब है कि कोई अधिकारी पदोन्नति नहीं लेना चाहता? लगता है होली का नशा अभी उतरा नहीं है. उसी का असर दिखाई दे रहा है.”
सदन में इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार की नीति पर सवाल उठाए और मांग किया कि दिव्यांग कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप 4 प्रतिशत आरक्षण का लाभ तुरंत दिया जाए. विपक्ष ने कहा कि दिव्यांगजनों के साथ भेदभाव हो रहा है और विभागीय लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
मंत्री ने सदन को आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराई जाएगी और योग्य दिव्यांग कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ देने के लिए जल्द प्रक्रिया शुरु की जाएगी.
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44 हजार किसान नहीं बेच पाए धान, कांग्रेस विधायकों के सवालों से घिरे खाद्य मंत्री, विपक्ष का वॉकआउट

छत्तीसगढ़ विधानसभा में बस्तर के दूरस्थ अंचलों में हजारों किसानों का धान नहीं खरीदने का मामला गूंजा. कांग्रेस विधायकों ने विभागीय मंत्री पर सवालों की झड़ी लगा दी. जिसका खाद्य मंत्री संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाए. इससे नाराज होकर विपक्ष के सभी सदस्यों ने सदन की कार्यवाही से वॉकआउट कर दिया.
प्रश्नकाल के दौरान सदन में विपक्ष के सदस्य कवासी लखमा और बघेल लखेश्वर ने यह मामला उठाते हुए बताया कि बस्तर के 44 हजार से ज्यादा किसान खरीदी केंद्र पहुंचने के बाद भी धान नहीं बेच पाए जिसमें से कई किसानो का टोकन भी कट चुका था. क्या सरकार इन किसानों का धान खरीदेगी. खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कबूल किया कि कुछ किसान धान नहीं बेच पाए हैं ये सभी ऐसे किसान हैं जो धान खरीदी केंद्र पहुंचे ही नहीं हैं.
मंत्री के इस जवाब के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार ऐसे किसानों का धान या तो खरीदे या उनका ऋण माफ करें. इस पर विभागीय मंत्री कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे आए जिस पर कांग्रेस विधायकों ने सदन की कार्यवाही का बहिर्गमन कर अपना आक्रोश दिखाया.
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