धान बेचने को लेकर 2 सगे भाइयों में में खूनी संघर्ष, छोटे भाई की पीट-पीटकर मौत के घाट, महिला समेत लोगों की हालत नाजुक, पहुंचे विधायक
Two brothers clash over the sale of paddy, the younger brother is beaten to death, and the condition of others, including a woman, is critical. The MLA arrives.
सूरजपुर : सूरजपुर जिले के रामानुजनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत पटना में जमीन विवाद ने खूनी रुप ले लिया. 2 सगे भाइयों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच मंगलवार को धान बेचने को लेकर दोनों परिवारों में हिंसक झड़प हो गई. इसमें आनंद सिंह की मौके पर ही मौत हो गई. जबकि दूसरा भाई समेत 3 लोग गंभीर रुप से घायल हो गए. 2 लोगों को नाजुक हालत में अंबिकापुर रेफर किया गया है. वहीं खबर पर पुलिस की टीम मौके पर पहुंचीं. विधायक भी अस्पताल पहुंचे. उन्होंने प्रशासन व पुलिस को मामले में निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं.
रामानुजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम पटना निवासी भोले सिंह और आनंद सिंह सगे भाई थे. दोनों के बीच पुश्तैनी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था. मंगलवार को समर्थन मूूल्य पर धान बेचने को लेकर एक पक्ष द्वारा आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद विवाद भडक़ उठा और देखते ही देखते मारपीट होने लगी. दोनों तरफ से जमकर लाठी-डंडे चले. इसमें छोटे भाई आनंद सिंह की मौके पर ही मौत हो गई.
जबकि बसंती, चित्रांग और भोले सिंह गंभीर रुप से घायल हो गए. चित्रांग और भोले सिंह की हालत नाजुक होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए अम्बिकापुर रेफर किया गया है. जबकि बसंती का सूरजपुर जिला अस्पताल में इलाज जारी है.
वारदात की खबर मिलते ही पुलिस के अलावा प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी जिला चिकित्सालय पहुंचे. और हालचाल जाना. उनके साथ भाजपा जिला अध्यक्ष मुरली मनोहर सोनी, जिला महामंत्री शशिकांत गर्ग, जिला कोषाध्यक्ष संदीप अग्रवाल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि राजलाल राजवाड़े, धर्मवीर सोनी, नीरज कुमार गुप्ता, पवन साहू सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता भी मौजूद रहे.
विधायक मरावी ने मृतक के परिजन से भेंट कर संवेदना व्यक्त की और चिकित्सकों को निर्देश दिया कि घायलों को त्वरित व बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए. वहीं दूसरी तरफ विधायक ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है.
ग्रामीण भारत में जमीन सिर्फ संपत्ति नहीं, पहचान और अस्तित्व का सवाल है. लेकिन जब वही जमीन भाई-भाई के बीच खून-खराबे की वजह बन जाए तो यह व्यवस्था और समाज दोनों के लिए चेतावनी है. इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि समय रहते मध्यस्थता, राजस्व स्तर पर त्वरित निस्तारण और संवाद की कमी कैसे जानलेवा बन सकती है. प्रशासन को चाहिए कि ऐसे संवेदनशील विवादों में पूर्व-हस्तक्षेप, काउंसलिंग और त्वरित कानूनी समाधान को प्राथमिकता दे. पंचायत स्तर पर मजबूत विवाद-निवारण तंत्र और राजस्व रिकॉर्ड की पारदर्शिता ही ऐसी त्रासदियों को रोक सकती है.
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