मरीज बनकर हॉस्पिटल पहुंच गए कलेक्टर, औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की जांच, इधर सरकारी के बजाय निजी अस्पताल भेजे जाने की शिकायत
The Collector arrived at the hospital posing as a patient, conducting a surprise inspection of health services, and complaining of being sent to a private hospital instead of a government hospital.
मरीज बनकर हॉस्पिटल पहुंच गए कलेक्टर
सुकमा : नए कलेक्टर अमित कुमार ने अलग अंदाज में जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने आम मरीज की तरह खुद पर्ची कटवाई और इलाज की प्रक्रिया को नजदीक से देखा. कलेक्टर ने अस्पताल में भर्ती मरीजों से सीधे बातचीत कर उनके स्वास्थ्य, इलाज और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली.
निरीक्षण में अस्पताल परिसर की साफ-सफाई और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया. कलेक्टर अमित कुमार ने अस्पताल में निकलने वाले अपशिष्ट कचरे के वैज्ञानिक और व्यवस्थित निस्तारण के निर्देश दिए. ताकि मरीजों और स्टाफ के लिए स्वच्छ व सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके.
इसके बाद कलेक्टर ने एनआरसी (न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर) का भी दौरा किया. उन्होंने वहां भर्ती बच्चों का हालचाल जाना और केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं की विस्तार से जानकारी ली. बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और पोषण उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया.
कलेक्टर अमित कुमार ने निर्देश दिया कि जिले के सभी पुनर्वास, स्वास्थ्य और बाल देखभाल केंद्रों में कार्य गुणवत्ता, संवेदनशीलता और समयबद्धता के साथ किया जाए. ताकि आम लोगों को बेहतर और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें.
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सरकारी के बजाय निजी अस्पताल भेजे जाने की शिकायत
कोरबा : सरकारी के बजाय प्राइवेट अस्पताल पहुंचाने का चल रहा धंधा” के बारे में स्व बिसाहू दास महंत स्मृति मेडिकल कॉलेज प्रबंधन द्वारा गंभीरता से संज्ञान लिया गया है. इस बारे में मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. के. के. सहारे ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि समाचार में उल्लेखित मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई. जिसमें किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता नहीं पाई गई.
डीन डॉ. सहारे ने कहा कि अस्पताल परिसर में मरीजों को प्राइवेट अस्पताल भेजने जैसी गतिविधियां पूरी तरह अस्वीकार्य हैं. इस तरह की संभावना को रोकने के लिए अस्पताल परिसर में किसी भी प्राइवेट एजेंसी या निजी एम्बुलेंस को खड़े होने की अनुमति नहीं देने संबंधी सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं.
उन्होंने बताया कि सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि अगर भविष्य में किसी भी तरह की संलिप्तता पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए सहायक अस्पताल अधीक्षक एवं उप-अस्पताल अधीक्षक को लगातार मॉनिटरिंग करने तथा ऐसी किसी भी पुनरावृत्ति को रोकने के निर्देश दिए गए हैं.
डीन ने यह भी कहा कि मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध अस्पताल में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध कराना संस्था की सर्वोच्च प्राथमिकता है. और मरीजों के हितों से समझौता करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
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