फ्लोर टेस्ट से पहले विजय को झटका, एक वोट से चुनाव जीतने वाला TVK विधायक विश्वास प्रस्ताव में नहीं डाल सकेगा वोट, अदालत का आदेश

Ahead of the floor test, a setback for Vijay; a TVK MLA who won by a single vote will not be able to vote in the confidence motion, according to a court order.

फ्लोर टेस्ट से पहले विजय को झटका, एक वोट से चुनाव जीतने वाला TVK विधायक विश्वास प्रस्ताव में नहीं डाल सकेगा वोट, अदालत का आदेश

तमिलनाडु : तमिलनाडु में अभिनेता से नेता और अब मुख्यमंत्री बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को मंगलवार को फिर एक बड़ा झटका लगा है. यहां मद्रास हाईकोर्ट ने तिरुपत्तूर विधानसभा क्षेत्र से सिर्फ एक वोट के अंतर से जीते TVK विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति के विधानसभा कार्यवाही में शामिल होने पर रोक लगा दी है. अहम बात यह है कि इसके बाद श्रीनिवास फ्लोर टेस्ट में वोटिंग नहीं कर पाएंगे. जो विजय के लिए अच्छी खबर नहीं है.
दरअसल हाईकोर्ट में द्रमुक (DMK) के वरिष्ठ नेता के.आर. पेरियाकरुप्पन ने श्रीनिवास के एक वोट से जीत को चुनौती दी थी. इससे पहले 4 मई 2026 को आए नतीजों में पेरियाकरुप्पन सिर्फ एक वोट से चुनाव हार गए थे. पेरियाकरुप्पन ने आरोप लगाया है कि उनके निर्वाचन क्षेत्र का एक एक पोस्टल बैलट, गलती से दूसरे तिरुपत्तूर जिले में भेज दिया गया और वहां उसे खारिज कर दिया गया. इसके अलावा ईवीएम के आंकड़ों और चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दर्ज आंकड़ों में भी 18 वोटों का अंतर मिला है.
बता दें कि चुनाव में श्रीनिवास सेतुपति को 83,365 वोट मिले थे. जबकि पूर्व मंत्री पेरियाकरुप्पन को 83,364 वोट मिले हैं. इसके बाद सेतुपति को एक वोट के अंतर से विजयी घोषित किया गया था. अपनी याचिका में पूर्व मंत्री पेरियाकरुप्पन ने वोटों की दोबारा गिनती कराने और श्रीनिवास सेतुपति को विधायक के रूप में शपथ लेने से रोकने के लिए अंतरिम आदेश देने का अनुरोध किया था.
गौरतलब है कि सी जोसफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के शपथ ग्रहण के तीन दिन बाद बुधवार को विधानसभा में बहुमत परीक्षण का सामना करेगी. ऐसे में हाईकोर्ट का यह आदेश विजय के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है. फिलहाल 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में TVK गठबंधन के पास 120 विधायक हैं और बहुमत के लिए 118 का आंकड़ा चाहिए। सेतुपति के बाहर होने के बाद गठबंधन के पास सिर्फ 119 प्रभावी वोट बचेंगे. ऐसे में अगर आने वाले दिनों में गठबंधन का एक या दो विधायक भी इधर-उधर होता है. तो सरकार के लिए बहुमत साबित करना बेहद मुश्किल हो सकता है.
हाईकोर्ट ने क्या दिया आदेश?
याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्टोरिया गौरी और एन. सेंथिलकुमार की पीठ ने माना है कि इस मामले में पहली नजर में गड़बड़ी नजर आ रही है. हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि सेतुपति अगले आदेश तक विधानसभा की किसी भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकेंगे. वह विश्वास मत, अविश्वास प्रस्ताव या किसी भी ऐसे फ्लोर टेस्ट में वोट नहीं डाल पाएंगे. हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को तिरुपत्तूर निर्वाचन क्षेत्र के सभी दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और खारिज किए गए पोस्टल बैलट को सील कर सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है.
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एम विजय को एआईएडीएमके के एक गुट का मिला समर्थन
तमिलनाडु में जोसेफ़ विजय की अगुवाई वाली सरकार को अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के कुछ विधायकों ने समर्थन दे दिया है, चेन्नई के एमआरसी नगर में एआईएडीएमके नेता सीवी शनमुगम ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "बैठक में प्रस्ताव पास किया गया और मुख्यमंत्री विजय की सरकार को समर्थन देने का फ़ैसला लिया गया."
उन्होंने कहा, "एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन एनडीए यह चुनाव हार गया है. यह गठबंधन असफल रहा है. जनता ने टीवीके को वोट दिया है. ख़ासकर मुख्यमंत्री विजय को. जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाने के लिए वोट दिया है. हम सिर झुकाकर इस फ़ैसले को स्वीकार करते हैं."
शनमुगम ने कहा, "हमारी लड़ाई डीएमके के ख़िलाफ़ रही है. लेकिन चुनाव के बाद एआईएडीएमके महासचिव (डप्पाडी पलानीस्वामी) ने कहा कि डीएमके के समर्थन से मुख्यमंत्री बनना चाहिए. हमने उनके इस प्रस्ताव का विरोध किया. किसी भी विधायक ने इसे मंज़ूर नहीं किया. लेकिन उन्होंने हमारी राय को स्वीकार नहीं किया."
शनमुगम ने बताया, "विधायकों की समिति की बैठक में एक प्रस्ताव पास किया गया. इसमें हमने कहा कि एआईएडीएमके को नया फ़ैसला लेना होगा. इसे फिर से मज़बूत करना होगा. एक नया गठबंधन बनाना होगा. बैठक में प्रस्ताव पास किया गया और मुख्यमंत्री विजय की सरकार को समर्थन देने का फ़ैसला लिया गया."
गौरतलब है कि जोसेफ़ विजय ने रविवार को सीएम पद की शपथ ली थी. अब उन्हें कल यानी 13 मई को विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश करना होगा. उन्हें पहले से ही कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और वाम दलों से समर्थन प्राप्त है.
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तमिलनाडु की राजनीति में आज के 5 बड़े घटनाक्रम
CM विजय ने तमिलनाडु में 717 शराब की दुकानें बंद करने का आदेश दिया: CM विजय ने मंगलवार को 717 शराब की दुकानें बंद करने का आदेश दिया है. अगले दो हफ्ते के अंदर पूजा स्थलों के पास की 276 दुकानें, शिक्षण संस्थानों के पास की 186 दुकानें और बस स्टैंड के पास की 255 दुकानें बंद कर दी जाएंगी.
TVK विधायक प्रभाकर तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर चुने गए
प्रोटेम स्पीकर एमवी करुप्पैया ने दिनभर के लिए विधानसभा बुलाई. इस दौरान प्रभाकर के नाम का प्रस्ताव मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने रखा था. स्पीकर पद के लिए सिर्फ उन्हीं का नामांकन मिला था. इसलिए उन्हें सर्वसम्मति से निर्विरोध चुन लिया गया.
AIADMK के एक गुट ने TVK को समर्थन देने का ऐलान किया
AIADMK पार्टी में दो हिस्सों में टूट गई है. पार्टी के नेता सीवी षणमुगम ने CM विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को समर्थन देने का आधिकारिक ऐलान कर दिया. कहा जा रहा है कि उनके साथ 30 विधायकों ने भी विजय को समर्थन देना स्वीकार किया है. षणमुगम ने यह भी कहा- मेरी AIADMK तोड़ने की कोई मंशा नहीं है. एडप्पादी पलानीसामी ही हमारे नेता हैं.
विजय ने अपने ज्योतिषी को OSD बनाया
राज्य सरकार के लोक विभाग ने रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को मुख्यमंत्री विजय के राजनीतिक मामलों के विशेष कार्य अधिकारी के रूप में नियुक्त किया है. रिकी ने ही विजय के CM बनने की भविष्यवाणी की थी. उनके शपथ ग्रहण का समय भी बदलवाया था.
सेतुपति मद्रास HC के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
TVK सरकार को 13 मई को फ्लोर टेस्ट देना है। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने TVK विधायक आर श्रीनिवास सेतुपति को विश्वास प्रस्ताव समेत किसी भी वोटिंग में हिस्सा लेने से रोक दिया. सेतुपति ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है
TVK कार्यकर्ता को पोस्टर-बैनर न लगाने के निर्देश
पार्टी के X हैंडल पर एक पोस्ट में सदस्यों के लिए नया निर्देश जारी किया गया है. इसमें कहा गया है- TVK की स्थापना सिर्फ तमिलनाडु के लोगों की भलाई के मकसद से की गई थी। इसलिए, कोई भी पार्टी साथी जन्मदिन, पारिवारिक कार्यक्रमों पर कहीं भी बैनर, पोस्टर नहीं लगाएगा.
सड़कों, पब्लिक प्लेस जहां लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हों, ऐसे तरीकों से जिससे लोगों की आवाजाही, ट्रैफिक में रुकावट आए और आम लोगों को परेशानी हो. कोई भी ऐसे किसी भी जश्न में शामिल नहीं होगा जिससे लोगों को किसी भी तरह से रुकावट हो.
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