छग आबकारी ओवर टाइम घोटाला, 100 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी, फर्जी बिल बनाकर निकाली रकम, EOW‑ACB की कार्रवाई में सात डायरेक्टर गिरफ्तार
Chhattisgarh Excise Overtime Scam: More than 100 crore rupees in fraudulent bills withdrawn; seven directors arrested in EOW-ACB action
रायपुर : छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है. जांच एजेंसियों ने इस मामले में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया है. मैनपावर सप्लाई और ओवर ड्यूटी के नाम पर किए गए इस घोटाले ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए सात आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
EOW की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ आबकारी निगम में मैनपावर सप्लाई और कर्मचारियों की ओवर ड्यूटी के नाम पर भारी गड़बड़ी की गई. ओवरटाइम भुगतान के लिए फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर बिल तैयार किए गए. इन्हीं बिलों के आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान दिखाया गया और सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया.
कर्मचारियों तक नहीं पहुंची राशि, कमीशन में बंटी रकम
जांच में यह भी सामने आया कि ओवर ड्यूटी के नाम पर निकाली गई रकम का इस्तेमाल कर्मचारियों को भुगतान करने के बजाय आबकारी निगम से जुड़े अधिकारियों और निजी कंपनियों से जुड़े लोगों को कमीशन देने में किया गया. इस तरह सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया और एक संगठित तरीके से घोटाले को अंजाम दिया गया.
मैनपावर सप्लाई कंपनियां जांच के घेरे में
EOW और ACB ने जांच के दौरान कई मैनपावर सप्लाई कंपनियों की भूमिका को संदिग्ध पाया. इन कंपनियों के संचालकों और प्रतिनिधियों पर फर्जी बिलिंग, वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप लगे हैं. सबूत मिलने के बाद एजेंसियों ने गिरफ्तारी की कार्रवाई तेज की.
जांच जारी, और खुलासों की संभावना
EOW और ACB का कहना है कि यह घोटाला काफी बड़ा है और इसकी जांच अभी जारी है. आने वाले दिनों में और भी नाम सामने आ सकते हैं. एजेंसियां पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं. ताकि इस घोटाले से जुड़े हर व्यक्ति तक कार्रवाई पहुंचाई जा सके.
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घोटाले ने आबकारी निगम की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. करोड़ों रुपये की गड़बड़ी लंबे समय तक सामने न आना. सिस्टम की कमजोरियों की तरफ इशारा करता है. अब सबकी नजर जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और सरकार के रुख पर टिकी है. फ़िलहाल 7 आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के बाद जेल भेज दिया गया है.
आरोपी
(1) नीरज कुमार चौधरी, वित्त एवं कर सलाहकार (सी.ए.), ईगल इंटर साल्युशन लिमिटेड एवं अलर्ट कमाण्डोज प्रायवेट लिमिटेड
(2) अजय लोहिया, डायरेक्टर, अलर्ट कमाण्डोंज प्रायवेट लिमिटेड
(3) अजीत दरंदले, डायरेक्टर, सुमीत फैसीलिटिज कंपनी
(4) अमित प्रभाकर सालुंके, डायरेक्टर, सुमीत फैसीलिटिज लिमिटेड
(5) अमित मित्तल, चेयरमेन एवं डायरेक्टर, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड कंपनी
(6) राजीव द्विवेदी, डायरेक्टर, प्राईमवन वर्कफोर्स प्राईवेट लिमिटेड
(7) संजीव जैन, डायरेक्टर, प्राईमवन वर्कफोर्स प्राईवेट लिमिटेड
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