श्री नारायणा हॉस्पिटल में डॉक्टर की लापरवाही बनी जानलेवा, गर्भाशय के सामान्य ऑपरेशन में चली गई जान, पूर्व सैनिक ने लगाई इंसाफ की गुहार
Doctor's negligence at Sri Narayana Hospital proves fatal; a woman died during a routine uterine operation; a former soldier pleads for justice.
रायपुर : शहर के श्री नारायणा हॉस्पिटल देवेंद्र नगर में कथित चिकित्सीय लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है. रायपुर के पूर्व सैनिक एस. देवराजू ने श्री नारायणा हॉस्पिटल, देवेंद्र नगर और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संजना खे्मका अग्रवाल पर गंभीर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि “एक साधारण सर्जरी” के बाद डॉक्टरों की लापरवाही और समय पर जांच न होने की वजह से उनकी पत्नी की मौत हुई.
देवराजू ने बताया कि उनकी पत्नी को 5 अक्टूबर को अस्पताल में भर्ती किया गया था. 7 अक्टूबर को गर्भाशय-उच्छेदन (हिस्टेरेक्टॉमी) की सर्जरी की गई. जो डॉक्टरों के मुताबिक कामयाब रही. लेकिन दो दिन बाद ही मरीज को तेज पेट दर्द, सूजन और पसीने की शिकायत होने लगी. परिजनों के बार-बार अनुरोध के बावजूद डॉक्टरों ने इसे “गैस की समस्या” बताकर हल्की दवाओं से इलाज जारी रखा. 10 से 12 अक्टूबर के बीच मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही. लेकिन न तो कोई जांच कराई गई और न ही एक्स-रे या सीटी स्कैन किया गया.
देवराजू का आरोप है कि इस दौरान सर्जन डॉ. खे्मका अस्पताल में मौजूद भी नहीं थीं और सिर्फ फोन पर ही सलाह दे रही थी. 13 अक्टूबर को जब हालत बेहद नाजुक हो गई. तब मरीज को आईसीयू में भर्ती कर आपातकालीन सर्जरी की गई. जांच में सामने आया कि पहले ऑपरेशन के दौरान आंत में छेद हो गया था. जो छह दिनों तक पहचाना ही नहीं गया. इससे पेट में संक्रमण (पेरिटोनाइटिस) और सेप्सिस फैल गया. जिसने धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर दिया. 17 अक्टूबर को एक और सर्जरी की गई, लेकिन तब तक संक्रमण पूरे शरीर में फैल चुका था. सभी प्रयासों के बावजूद 24 अक्टूबर 2025 को मरीज की मौत हो गई.
पूर्व सैनिक देवराजू ने 26 अक्टूबर को देवेंद्र नगर थाना, रायपुर में शिकायत दर्ज कराते हुए अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, मेडिकल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और रिपोर्ट जब्त करने और राज्य चिकित्सा परिषद से अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है.
उनका कहना है कि ये सिर्फ एक मेडिकल गलती नहीं, एक परिवार की बर्बादी है. अगर समय रहते जांच होती तो मेरी पत्नी की जान बच सकती थी. डॉक्टर की अनदेखी और दर्द से तड़पते हुए उसने आखिरी सांस ली. अस्पताल प्रशासन की तरफ से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
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