शासकीय सड़क भूमि की अवैध बिक्री, धमतरी कलेक्टर से FIR की मांग, पटवारी को सस्पेंड करने की डिमांड, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
Illegal sale of government road land, demand for FIR from Dhamtari Collector, demand for suspension of Patwari, questions raised about the functioning of the Revenue Department
धमतरी : धमतरी। जिले में सरकारी जमीन की कथित अवैध खरीदी-बिक्री का एक गंभीर मामला सामने आया है. रिसाईपारा धमतरी निवासी मोहम्मद राशीद ने कलेक्टर को शिकायत सौंपकर ग्राम सिहाद स्थित शासकीय सड़क भूमि को धोखाधड़ीपूर्वक बेचने का आरोप लगाया है और पूरे मामले में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.
शिकायत के मुताबिक प्रार्थी ने खसरा नंबर 1137/1 की भूमि को 11 दिसंबर 2023 को उप पंजीयक कार्यालय धमतरी में रजिस्ट्री के जरिए खरीदा था. यह जमीन धरमिनबाई, अरुण, रोहित, लुकेश, रुपेश और द्रोपति (सभी पिता मोतीलाल) से खरीदी गई थी. प्रार्थी का आरोप है कि विक्रेताओं और जमीन दलाल गौतम सोनी ने उसे जमीन दिखाकर सौदा कराया. जबकि उक्त भूमि शासकीय सड़क के रुप में उपयोग में थी.
मोहम्मद राशीद ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री से पहले संबंधित पटवारी हेमंत चंद्राकर द्वारा खसरा पर डिजिटल हस्ताक्षर किया गया. जबकि उन्हें पहले से इस बात की जानकारी थी कि जमीन सरकारी है. और इस पर विवाद चल रहा है. इसके बावजूद रजिस्ट्री कराई गई.
बाद में नामांतरण प्रक्रिया के दौरान तहसील कार्यालय भखारा में जांच करने पर प्रार्थी को जानकारी मिली कि उक्त जमीन को सरकारी जमीन मानते हुए नामांतरण 12 फरवरी 2024 को निरस्त कर दिया गया है.
साथ ही, यह भी सामने आया कि ग्राम पंचायत सिहाद के तत्कालीन सरपंच द्वारा उक्त जमीन को शासकीय सड़क बताते हुए सुधार के लिए आवेदन दिया गया था. जिस पर राजस्व न्यायालय में सुनवाई चल रही थी.
इस मामले में अपर कलेक्टर न्यायालय ने भी गंभीर सवाल उठाए हैं. जिनमें सरकारी जमीन को निजी नाम पर दर्ज करने, खसरे के विभाजन और नामांतरण प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. प्रार्थी का दावा है कि इन सभी तथ्यों की जानकारी संबंधित पटवारी को थी. इसके बावजूद जानबूझकर रजिस्ट्री कराई गई.
शिकायतकर्ता ने मांग किया है कि पटवारी हेमंत चंद्राकर को फौरन सस्पेंड किया जाए, और विक्रेताओं और जमीन दलाल के खिलाफ सरकारी जमीन की अवैध बिक्री के आरोप में एफआईआर दर्ज की जाए.
इस पूरे मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल प्रशासन की तरफ़ से जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई साफ हो सकेगी.
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