जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को 20 साल बाद उम्र कैद की सजा, हाईकोर्ट ने सरेंडर करने के दिए निर्देश, बोले- मेरे साथ अन्याय हुआ, सुप्रीम कोर्ट की तैयारी

Amit Jogi sentenced to life imprisonment after 20 years in the Jaggi murder case; High Court directs him to surrender, says injustice done to me, preparing to approach the Supreme Court

जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को 20 साल बाद उम्र कैद की सजा, हाईकोर्ट ने सरेंडर करने के दिए निर्देश, बोले- मेरे साथ अन्याय हुआ, सुप्रीम कोर्ट की तैयारी

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है. इस फैसले के बाद अब यह सवाल तेज हो गया है कि क्या अमित जोगी को अब जेल जाना तय है? कोर्ट के इस आदेश ने लंबे समय से चल रहे इस मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है.
वहीं इस मामले में अमित जोगी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि आज उच्च न्यायालय ने बिना सुनवाई का मौका दिए मेरे खिलाफ CBI की अपील को सिर्फ 40 मिनट में कबूल कर लिया. मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था. उसे बिना सुनवाई का एक भी मौका दिए दोषी करार दिया गया. यह अप्रत्याशित है.
अमित जोगी ने कहा, अदालत ने मुझे 3 हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का समय दिया है. मुझे लगता है कि मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है. मुझे पूरा यकीन है कि सर्वोच्च न्यायालय से मुझे न्याय अवश्य मिलेगा. मैं न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास रखता हूं. मैं पूर्ण शांति, आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ रहा हूं. सत्य की जीत जरुर होगी.
सुप्रीम कोर्ट ही आखिरी उम्मीद
अमित जोगी ने साफ संकेत दिए हैं कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे. फिलहाल उन्हें तीन हफ्ते के भीतर सरेंडर करना है. लेकिन अगर इस बीच उन्हें शीर्ष अदालत से राहत मिलती है, तो स्थिति बदल सकती है. ऐसे में सबकी नजर अब सुप्रीम कोर्ट पर टिक गई है कि इस हाई-प्रोफाइल केस में अगला बड़ा फैसला क्या होगा.
राजनीतिक और कानूनी असर
इस फैसले का असर केवल कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक भी है. छत्तीसगढ़ की राजनीति में पहले से सक्रिय अमित जोगी के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है. अगर उन्हें राहत नहीं मिलती है. तो यह मामला राज्य की सियासत में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है. फिलहाल जग्गी हत्याकांड एक बार फिर सत्ता, कानून और न्याय के त्रिकोण में खड़ा नजर आ रहा है.
2003 में हुई थी एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या
4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे. जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे. अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी. हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था. रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया.
जानिए कौन थे रामावतार जग्गी
कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे. जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए. विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था.
ये पाए गए थे दोषी
जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे.
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