NH-53 बना मौत का हाईवे, तेज रफ्तार कार ने बुज़ुर्ग को रौंदा, अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे तुलसी राम, ग्रामीणों में नाराजगी
NH-53 became a death highway, a speeding car ran over an old man, Tulsi Ram battling for life in the hospital, villagers are angry
महासमुंद : महासमुंद जिला में झलप गांव के लिए सूरज एक साधारण दिन की तरह उगा था. लेकिन कुछ ही पलों में यह दिन त्रासदी में बदल गया. सुबह करीब 10 बजे झलय थाना क्षेत्र अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग-53 (NH-53) पर मिडिल स्कूल झलप के सामने हुए सड़क हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया. हादसे के शिकार बने हैं 57 साल के बुज़ुर्ग तुलसी रौतिया को उनके अपने परिजन और गांव वाले अब श्रेयांस अस्पताल रायपुर में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते देख रहे हैं.
मिली जानकारी के मुताबिक तुलसी रौतिया अपने भतीजे धनंजय युगरे और अन्य परिजन के साथ झलप बाज़ार से सामान खरीदकर लौट रहे थे. पैदल चलकर उन्हें झलय के बगलागारा पहुंचना था. जब सभी लोग सड़क पार कर रहे थे. तभी पिथौरा की तरफ से आ रही तेज रफ्तार TATA ALTROZ कार नम्बर OD 14 AD 6607 ने मौत का खेल रच डाला.
धनंजय और अन्य परिजन सड़क पार कर चुके थे. लेकिन पीछे चल रहे तुलसी रौतिया की जिंदगी उस क्षण तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग की भेंट चढ़ गई. कार ने उन्हें इतनी जोरदार टक्कर मारी कि वह सड़क पर बुरी तरह घायल होकर गिर पड़े.
चश्मदीदों ने बताया कि कार चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया था. कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि सड़क किनारे खड़े लोगों ने भी डर के मारे चीख पुकार मचाई. स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं. बल्कि चालक की जानलेवा लापरवाही का परिणाम है. अगर चालक सावधानी से गाड़ी चलाता तो आज तुलसी रौतिया अस्पताल में जिंदगी से जूझ नहीं रहे होते,” गुस्साए ग्रामीणों ने कहा..
तुलसी रौतिया के सिर और दोनों हाथों में गंभीर चोटें आई हैं. हादसे के बाद परिवारजन और ग्रामीणों ने फौरन प्राइवेट एम्बुलेंस की व्यवस्था की और उन्हें रायपुर स्थित श्रेयांस अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती कर लिया है और उनकी हालत अभी नाज़ुक बताई जा रही है. परिवार की आंखों में आंसू और दिल में डर है—“पता नहीं क्या होगा.”
धनंजय युगरे और भुनेवर मिरी जैसे चश्मदीदों ने हादसे का पूरा मंजर अपनी आखों से देखा. उन्होंने बताया कि हम सब सड़क पार कर चुके थे. लेकिन तुलसी काका पीछे थे. तभी अचानक तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी. आवाज इतनी भयावह थी कि हमें लगा जैसे उनकी वहीं मौत हो जाएगी.
गांव में यह खबर फैलते ही मातम का माहौल है. लोग NH-53 पर बढ़ते हादसों को लेकर नाराजगी जता रहे हैं. उनका कहना है कि यह राष्ट्रीय राजमार्ग अब “मौत का राजमार्ग” बन चुका है.
हादसे के बाद परिजनों ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है. रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि कार चालक की तेज रफ्तार और लापरवाही की वजह से ही यह हादसा हुआ है. पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी चालक पर कड़ी कार्रवाई हो. ताकि भविष्य में कोई और परिवार इस दर्द से न गुजरे.
ग्रामीणों का कहना है कि NH-53 पर आए दिन ऐसे हादसे होते हैं. लेकिन प्रशासन अब तक जागा नहीं है. न तो स्पीड ब्रेकर हैं. न ही यातायात पुलिस की सख्ती.. जब तक जिम्मेदार अफसर ध्यान नहीं देंगे, मासूमों और बुज़ुर्गों की जान यूं ही जाती रहेगी.
तुलसी रौतिया का परिवार मजदूरी कर अपना जीवन चलाता है. इस हादसे ने उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह से तोड़कर रख दिया है. उनके परिजन रोते हुए यही गुहार लगा रहे हैं—“हमें इंसाफ चाहिए.. दोषी चालक को सजा मिले और हमारे इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाए. फिलहाल कार चालक और कार मालिक के ऊपर पटेवा थाना में BNS की धारा 281 और 125 (a) के तहत मामला दर्ज हो गया है.
जनता का सवाल:-
कब तक NH-53 पर रफ्तार का कहर चलता रहेगा?
कब तक लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे?
कब तक प्रशासन सिर्फ रिपोर्ट दर्ज करने तक सीमित रहेगा?
यह हादसा सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं. बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि अगर लापरवाह चालकों और बेपरवाह प्रशासन पर अंकुश नहीं लगाया गया. तो NH-53 सचमुच मौत का हाईवे बन जाएगा.
आज तुलसी रौतिया अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि कल किसकी बारी होगी?
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