NHM कर्मियों को मिली सरकार की धमकी, काम पर नहीं लौटने पर होगी नौकरी खत्म, हड़ताल के बीच स्वास्थ्यकर्मी की मौत, कर्मचारियों में आक्रोश
NHM workers receive government threat, job will be terminated if they do not return to work, health worker dies during strike, anger among employees
रायपुर : छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच एक दर्दनाक खबर सामने आई है. बस्तर जिले में 12 दिनों से हड़ताल पर शामिल स्वास्थ्यकर्मी बीएस मरकाम की हार्ट अटैक से मौत हो गई. इस घटना ने आंदोलन को और संवेदनशील और उग्र बना दिया है.
जगदलपुर में एनएचएम के ब्लॉक अकाउंट मैनेजर (BAM) पद पर कार्यरत बीएस मरकाम बीते 12 दिनों से हड़ताल में सक्रिय थे। गुरुवार देर रात उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा परिजन और साथी कर्मचारी उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे. लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. उनकी मौत की खबर से स्वास्थ्यकर्मियों में आक्रोश और शोक की लहर फैल गई है.
बता दें कि नियमितीकरण समेत अन्य मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे एनएचएम (NHM) कर्मचारियों पर अब गाज गिर सकती है. लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सभी जिलों के सीएमएचओ को सख्त आदेश जारी करते हुए कहा है कि अगर कर्मचारी फौरन काम पर नहीं लौटते हैं तो उनकी सेवा खत्म करने की कार्रवाई की जाएगी.
जारी आदेश में कहा गया है कि आदेश के बावजूद अधिकांश जिलों में NHM अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय नहीं पहुंच रहे हैं. यह लोकहित के खिलाफ और अनुचित है. ऐसे कर्मचारियों को तुरंत नोटिस जारी कर स्पष्ट कर दें कि गैरहाजिर रहने की हालत में उनकी सेवा खत्म कर दी जाएगी. साथ ही विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि अनुपस्थित कर्मचारियों का इस माह का वेतन “काम नहीं, वेतन नहीं” के सिद्धांत पर आहरित न किया जाए.
एनएचएम कर्मचारी संघ अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 12 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इनमें नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा शर्तों में सुधार जैसी प्रमुख माँगें शामिल हैं. सिर्फ बस्तर से ही करीब 190 स्वास्थ्यकर्मी इस आंदोलन का हिस्सा बने हुए हैं.
हड़ताल के चलते ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हो चुकी हैं. कई अस्पतालों में ताले लटक रहे हैं. प्रसव और गंभीर बीमारियों के मामलों में मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है. सबसे ज़्यादा मुश्किल गरीब और ग्रामीण मरीजों को झेलनी पड़ रही है.
कर्मचारी संघ ने भाजपा सरकार पर चुनावी वादों से मुकरने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि भाजपा ने चुनाव से पहले “मोदी की गारंटी” के तहत 100 दिन में नियमितीकरण पर कमेटी बनाने का वादा किया था. लेकिन 20 महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
मरकाम की मौत के बाद कर्मचारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन और उग्र होगा.
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