छत्तीसगढ़ में बड़ा कांड: सरकारी छात्रावास की दो नाबालिग समेत तीन छात्राएं गर्भवती, प्रबंधन पर मामला दबाने का आरोप, प्रशासन ने दिए जांच के संकेत

Major scandal in Chhattisgarh: Three students, including two minors, of a government hostel are pregnant; management accused of suppressing the case; administration hints at investigation.

छत्तीसगढ़ में बड़ा कांड: सरकारी छात्रावास की दो नाबालिग समेत तीन छात्राएं गर्भवती, प्रबंधन पर मामला दबाने का आरोप, प्रशासन ने दिए जांच के संकेत

बीजापुर : बीजापुर जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है. जहां गंगालूर स्थित पोटा केबिन छात्रावास की तीन छात्राएं गर्भवती पाई गई हैं. इन छात्राओं का गर्भ करीब पांच महीने का बताया जा रहा है.
सामने आई जानकारी के मुताबिक गर्भवती छात्राओं में से दो नाबालिग भी हैं. इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और पूरे मामले को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.
बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन छात्राओं के लिए गर्भवती कार्ड भी बनाया गया है. इससे यह संकेत मिलता है कि स्वास्थ्य विभाग को इस हालात की जानकारी थी और उनके स्वास्थ्य से जुड़ी प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी. हालांकि मामला सामने आने के बाद छात्रावास की अधीक्षिका ने कहा है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी. अधीक्षिका के इस बयान के बाद पूरे मामले को लेकर और भी सवाल उठने लगे हैं.
बीजापुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शिक्षा देने के लिए पोटा केबिन बनाए गए थे. लेकिन तीन छात्राओं के एक साथ गर्भवती होने की घटना ने सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है. पोटा केबिन में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित होता है और छात्राओं की सुरक्षा के लिए कड़े नियम होते हैं. ऐसे में यह घटना हॉस्टल परिसर के भीतर की है या छात्राएं जब घर गई थीं तब की. यह जांच का विषय है. फिलहाल इस शर्मनाक घटना ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
मामले के तूल पकड़ते ही अब स्थानीय स्तर पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है. सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने इसे मासूमों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है. कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं. पुलिस अब उन लोगों की पहचान करने में जुटी है. जो इस घिनौनी करतूत के पीछे हैं. नाबालिग छात्राओं के साथ हुए इस अपराध में पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.
बीजापुर की इस घटना ने प्रदेश के सभी आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों के लिए एक ‘अलार्म बेल’ बजा दी है. यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक बड़ी मानवीय विफलता भी है. अब देखना होगा कि शासन इस मामले में दोषियों को क्या सजा देता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं. फिलहाल, बीजापुर की इन बेटियों के साथ हुए अन्याय ने पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया है.
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