पटवारी ने खड़ी फसल रकबा को किया निरंक, कहा- दो हजार दो रकबा ठीक कराओ!, अब भटक रहे 40 से ज्यादा मजबूर किसान, जिम्मेदार कौन?

Patwari destroyed the standing crop area said get two thousand and two areas repaired Now more than 40 helpless farmers are wandering who is responsible

पटवारी ने खड़ी फसल रकबा को किया निरंक, कहा- दो हजार दो रकबा ठीक कराओ!, अब भटक रहे 40 से ज्यादा मजबूर किसान, जिम्मेदार कौन?

गरियाबंद/देवभोग : सरकार के समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरु हो गई है. ऐसे समय तहसील क्षेत्र देवभोग के पटवारी हल्का 23 के राजस्व ग्राम केंदूवन के 40 से ज्यादा किसान राजस्व विभाग के मनमानी का शिकार हो गए हैं.
फसल कटाई के बाद भी अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं. किसानों को अब दफ्तर और पटवारी का चक्कर काटना पड़ रहा है. क्योंकि राजस्व विभाग ने ना मुनादी कराया और ना ही किसान, ग्राम पटेल और कोटवार के मौजूदगी में फसल का गिरदावरी कराया. 40 में से बीस किसान ऐसे हैं जिनका राजस्व विभाग द्वारा जारी गिरदावरी रिपोर्ट में निरंक बताया गया है.
इधर उपार्जन  केन्द्र में भी धान खरीदी उसी रिपोर्ट के आधार पर हो रही है. जबकि उस रकबे में किसान ने फसल बोया था और अच्छी पैदावार भी हुई है. ऐसे में किसानों को अपनी फसल रकबे ठीक कराने पटवारी और दफ्तर का चक्कर काटना पड़ रहा है. ले देकर सुधार तो हो रहा है लेकिन इस काम को कराने उन्हें 15 सौ से 2 हजार खर्च करना पड़ रहा है.
केन्दुवन में चालीस ऐसे किसान हैं. जिनके फसल रकबा में गड़बड़ी देखी गई है. निरंक गिरदावरी रिपोर्ट वाले गोपनाथ, जगनो, बसंत कुमार दास, डमरुधर यादव, उद्धव तरुण, कामदेव समेत बीस से पच्चीस किसानों के रकबे का सुधार नहीं हो किसानों ने राजस्व विभाग के पटवारी पर सुधार के लिये पैसे का मांग करने का आरोप लगाया है. कुछ ने पैसे देकर ठीक करा लिए लेकिन कुछ किसान के पास पैसे नहीं होने की वजह से दफ्तर का चक्कर काट रहे हैं.
पिछले साल नदी पार के 36 गांव में सुखे की स्थिति थी. जिसमें केंदुवन भी शामिल था. बीते समय में बनाई गई रिपोर्ट में ज्यादातर किसानों का फसल रकबा निरंक बताया गया था. बस यही पर राजस्व पटवारी ने लापरवाही बरती. मौके पर गई नहीं और बना दी गिरदावरी रिपोर्ट. पिछले साल के रिपोर्ट को टु कापी कर दिया गया. जिसका खामियाजा केंदुवन के किसान भुगत रहे हैं. किसान जब धान बेचने को उपार्जन केन्द्र पहुंच रहे हैं तो वहां राजस्व विभाग द्वारा दिये गये गिरदावरी रिपोर्ट के आधार पर निरंक फसल रकबे वाले किसानों को सुधार कर लाने को कहा जा रहा है. ऐसे में किसान बहुत ज्यादा परेशान हैं.
इधर किसान रकबे के रिपोर्ट सुधारने 15 सौ से 2 हजार लगने की बात कर रहे हैं. किसान तो यहा भी कह रहे हैं हल्का पटवारी ने इस काम के लिये दो लोगों को रखा है तो उधर वर्तमान हल्का पटवारी नायडु लेन-देन से इंकार कर रहे हैं. वहीं पटवारी नाकेश्वर नायडू ने गिरदावरी रिपोर्ट में गड़बड़ी का जिम्मेदार पूर्व में पदस्थ पटवारी अंजली प्रधान पर डाल दिया. इस बारे में जब मिडिया ने पूर्व राजस्व पटवारी का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया.
नियमानुसार गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करते समय गांव में मुनादी होनी थी. फिर किसान, ग्राम पटेल और कोटवार की मौजूदगी में फसल के रकबे का आंकलन होना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. पटवारी ने घर से बैठ ही रिपोर्ट तैयार कर दिया और अब गांव के किसान अपने रकबे का रिपोर्ट देख ग्राम पटेल नियक राम यादवऔर कोटवार क्षेत्र मोहन बेहेरा पर नाराजगी जता रहे हैं. ऐसे में गांव में विवाद की हालात पैदा हो गए हैं. नाराज किसान पटेल और कोटवार पर मिलीभगत कर रिपोर्ट तैयार करने का आरोप लगा रहे हैं. जबकि ‌कोटवार और पटेल को भी इस बारे में जानकारी नहीं है और अपने रकबे में सुधार करने दफ्तर का चक्कर काटना पड़ा है.
गिरदावरी रिपोर्ट त्रृटि रहित बनाया गया है अगर किसान प्रभावित हैं तो निरीक्षण कराकर सुधार की जाएगी. लेन-देन का कोई मामला है तो पटवारी पर कारवाई की जाएगी -चितेश देवांगन तहसीलदार देवभोग
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