सरपंच, पति और फर्जी उपसरपंच ने मिलकर किया मनरेगा में करोड़ों का गबन, बर्खास्तगी और फरारी के बावजूद धमकियां, कठोर कार्रवाई की मांग
Sarpanch husband and fake Deputy Sarpanch together embezzled crores of rupees in MNREGA issued threats despite dismissal and absconding demanded strict action
बिलासपुर/मस्तूरी : बिलासपुर जिले के मस्तूरी ब्लॉक में सरपंच, पति और फर्जी उप सरपंच के द्वारा मनरेगा में भारी भ्रष्टाचार. छत्तीसगढ़ के मस्तूरी ब्लॉक के सोन ग्राम पंचायत में करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है. ग्रामीणों और पंचों ने जिला कलेक्टर से शिकायत कर सरपंच श्यामलता और उनके पति अशोक कैवर्त पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शिकायत में बताया गया है कि फर्जी उप सरपंच और रोजगार सहायक के साथ मिलकर इन लोगों ने मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार कर करोड़ों की सरकारी राशि का गबन किया है.
ग्रामीणों और पंचों ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत लाखों रुपए की राशि का गबन किया गया. सरपंच श्यामलता और उनके पति ने फर्जी उप सरपंच और रोजगार सहायक के साथ मिलकर बिना कोई काम कराए करोड़ों की सरकारी राशि आहरित की. इनमें से कई योजनाओं में तो कोई काम ही नहीं किया गया. लेकिन कागजों में फर्जी बिल बनाकर रकम निकाल ली गई.
सरपंच श्यामलता को पहले ही भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया जा चुका है. जबकि उनके पति अशोक कैवर्त पुलिस से फरार है. फरारी के बावजूद सरपंच पति ग्रामीणों और पंचों को शिकायत वापस लेने की धमकी दे रहा है. कई बार पंचों को मारपीट की धमकी भी दी गई है. जिससे ग्रामीण असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
शिकायत में यह भी खुलासा हुआ है कि सोन ग्राम पंचायत में असली उप सरपंच राजकुमार गौड़ हैं. लेकिन सरपंच और उनके पति ने जितेन्द्र पटेल को फर्जी उप सरपंच घोषित कर दिया. इसके बाद, फर्जी उप सरपंच और सरपंच पति ने मिलकर शासकीय धन का दुरुपयोग किया और जनता के हित में एक भी काम नहीं कराया.
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मनरेगा योजना के तहत बिना कोई काम किए फर्जी बिल और बाउचर पेश कर लाखों रुपये का घोटाला किया गया. साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी हितग्राही से 5,000 से 10,000 रुपये तक कमीशन लिया गया. जो हितग्राही कमीशन देने में असमर्थ रहे. उनके नाम आवास योजना से काट दिए गए.
फर्जी बिलों के जरिए सरकारी धन का गबन:
स्लम कार्य: 72,000 रुपये
नाली सफाई और मरम्मत: 49,000 रुपये
डबरीपारा मुरुम कार्य: 49,000 रुपये
हैंडपंप मरम्मत: 49,000 रुपये
सामुदायिक शौचालय मरम्मत: 49,000 रुपये
इन कार्यों के लिए बिना कोई काम कराए सरकारी राशि का गबन किया गया. इसके अलावा, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, हैंडपंप खनन, रोड निर्माण, मंच निर्माण, और स्कूल पेयजल व्यवस्था जैसी योजनाओं में भी बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया.
ग्रामीणों के मुताबिक कोविड के दौरान खर्च का भी गलत विवरण दिया गया. सरपंच ने कोविड के नाम पर ढाई लाख रुपये खर्च होना बताया. जबकि हकीकत में यह राशि भी गबन कर ली गई.
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सरपंच श्यामलता, उनके पति अशोक कैवर्त, रोजगार सहायक मुकेश यादव और फर्जी उप सरपंच जितेन्द्र पटेल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई. तो ग्रामीण थाना और एसडीएम कार्यालय का घेराव करेंगे.
इस घोटाले से पंचायत व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. ग्रामीणों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई की जाए. ताकि इस तरह के भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके.
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