राजभवन में शिक्षकों का सम्मान नहीं अपमान हुआ -कांग्रेस, एनएचएम कर्मियों की बर्खास्तगी, मितानिनों पर अत्याचार सरकार की तानाशाही -दीपक बैज

Teachers were not respected but insulted in Raj Bhawan - Congress, Dismissal of NHM workers, atrocities on Mitanins is dictatorship of the government - Deepak Baij

राजभवन में शिक्षकों का सम्मान नहीं अपमान हुआ -कांग्रेस, एनएचएम कर्मियों की बर्खास्तगी, मितानिनों पर अत्याचार सरकार की तानाशाही -दीपक बैज

राजभवन में शिक्षकों का सम्मान नहीं अपमान हुआ

रायपुर : शिक्षक दिवस के राजभवन में शिक्षकों का सम्मान नहीं अपमान किया गया. प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि शिक्षक दिवस के दिन प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों का सम्मान किये जाने की राजभवन में परंपरा है. यह सम्मान इन शिक्षकों की शिक्षा के प्रति समर्पण सेवा भाव और राष्ट्र निर्माण की प्रतिबद्धता के लिये सालों से दिया जाता है. छत्तीसगढ़ के राजभवन में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की उपस्थिति में जिस तरह से शिक्षकों का सम्मान किया गया वह बेहद ही आपत्तिजनक था. सम्मानित किये जाने वाले गुरुजी लोगों के हाथ में पहले से प्रमाण पत्र स्मृति चिन्ह पकड़ा दिया गया और वे बारी-बारी से अपना सम्मान पत्र खुद लेकर राज्यपाल महोदय के पास पहुंचते गए और महामहिम ने उनके सम्मान पत्र पर हाथ लगाकर फोटो खिचवाने की औपचारिकता निभाई.
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि यह पूरा मंजर सम्मान का कम अपमान का ज्यादा था. राजभवन और शिक्षा विभाग के कार्यक्रम आयोजनों के पास इतना भी सामान्य शिष्टाचार नहीं था कि वे शाल, मोमेंटो, सम्मान पत्र आदि को राज्यपाल मुख्यमंत्री या शिक्षा मंत्री के हाथो सम्मानित होने वाले शिक्षकों को दिलवाते. लंगर में खाना लेने वालो की तरह शिक्षकों को लाइन में लगवाया गया.
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राजभवन में शिक्षकों के साथ जो हुआ वह भाजपा सरकार और राजभवन के सामंती आचरण को दिखाता है. मंच पर बैठे लोग भूल रहे है कि उनकी पद प्रतिष्ठा भी जनता ने दिया है. वे मंच पर हैं तो यह देश के प्रजातंत्र की देन है. शिक्षक समाज का सबसे सम्मानित वर्ग होता है. सम्मानित करने के बहाने बुलाकर अपमानित किया जाना आपत्तिजनक है. राजभवन और सरकार अपने इस आचरण के लिये प्रदेश के शिक्षकों से माफी मांगे.
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एनएचएम कर्मियों की बर्खास्तगी, मितानिनों पर अत्याचार सरकार की तानाशाही -दीपक बैज

रायपुर : भाजपा की सरकार ने छत्तीसगढ़ को हड़ताल का गढ़ बना दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार क्रूर और अत्याचारी बन गई है. जिस तरह से पिछले 20 दिनों से ज्यादा हो गए एनएचएम और मितानिन बहने हड़ताल पर हैं. और भाजपा सरकार उन पर बर्बरतापूर्वक कार्यवाही कर रही है. लाठी चार्ज कर रही है और जेल भेजने की धमकी दे रही है और 25 से ज्यादा एनएचएम कर्मचारियों को बर्खास्त करने का कार्यवाही की गयी है. कांग्रेस उसकी निंदा करती है यह सरकार की तानाशाही है. मोदी की गारंटी के नाम से भाजपा ने झूठ बोलने का काम किया है.
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के समय एनएचएम कर्मचारियों, मितानिनों को नियमित करने का काम किया था. अब सरकार उनकी मांगे मानने के बजाए प्रताड़ित कर रही है. सरकार को इनकी मांगो को पूरा करना चाहिए. सरकार इस तरह से बर्बरतापूर्वक कार्यवाही करेगी तो निश्चित रुप से एनएचएम और मितानिन बहनों के लिये जरुरत पड़े तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी सड़क पर उतरने पीछे नही हटेगी. कांग्रेस पूरी तरह से इस आंदोलन का समर्थन करती है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मितानिनें और एनएचएम कर्मचारियों को मिलाकर करीब एक लाख स्वास्थ्य से जुड़े कर्मचारी हड़ताल पर हैं. जिसकी वजह से प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाएं तकरीबन बंद हो चुकी हैं. टीकाकरण, प्रसूता देखरेख, डिलवरी और सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए आम जनता परेशान हो रही है. सरकार को न जनता के स्वास्थ्य की चिंता है और न ही हड़ताली कर्मचारियों की.. इस हड़ताल की वजह से पूरे प्रदेश में स्थितियां अराजक और चिंताजनक हो चुकी है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मितानिनें, एनएचएम के कर्मचारी 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि, जॉब की गारंटी, 10 लाख की कैशलेस बीमा, नियमितीकरण, स्थानांतरण की सुविधा, अनुकंपा नियुक्ति, ग्रेड पे का निर्धारण और महिला कर्मचारियों के लिए विशेष अवकाश की मांग कर रहे हैं. यह उनका जायज अधिकार है. इसे पूरा करने में सरकार पीछे क्यों हट रही है? आखिर सरकार एनएचएम के कर्मचारियों को डरा क्यों रही है? मोदी की गारंटी के नाम से जब वादा किया गया था तब क्या भाजपा के नेताओं को पता नहीं था कि यह वादा पूरा नहीं कर पाएंगे तो सिर्फ वोट लेने के लिए झूठा वादा किया गया था?
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