खनिज विभाग ने किया 9 हाइवा और चेन माउंटेन मशीन जब्त, कार्रवाई खत्म, खेल शुरू! धड़ल्ले से चल रहा अवैध उत्खनन, रेत माफियाओं के आगे बेबस सिस्टम?
The Mining Department has seized nine Hyva trucks and chain-mounted machines—the official action is over, but the game begins! Illegal mining continues unabated; is the system helpless against the sand mafia?
गरियाबंद/राजिम : गरियाबंद जिले में अवैध रेत उत्खनन का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है. चौबेबांधा-सिंधौरी क्षेत्र में खनिज विभाग और राजिम पुलिस द्वारा संयुक्त कार्रवाई कर एक चैनमाउंटेन मशीन और एक हाइवा वाहन जप्त किए जाने के बाद कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े होने लगे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार कार्रवाई के कुछ ही समय बाद उसी क्षेत्र में दोबारा उत्खनन और परिवहन शुरू हो जाता है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार 9 जून से 15 अक्टूबर तक रेत खदानों का संचालन बंद है. इसके बावजूद जिले के कई नदी घाटों से अवैध उत्खनन और परिवहन की शिकायतें लगातार मिल रही हैं. ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शिकायतें, सीएम हेल्पलाइन में आवेदन और प्रशासन को खबर देने के बावजूद कई स्थानों पर अवैध गतिविधियां नहीं रुक रही हैं.
गौरतलब है कि हाल ही में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी हालत में अवैध खनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. ऐसे में गरियाबंद जिले में लगातार सामने आ रही शिकायतों ने प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर कार्रवाई के फौरन बाद फिर से खनन शुरू हो जाता है तो सिर्फ मशीन और वाहन जप्त करने से समस्या का समाधान नहीं होगा. जरूरत उन लोगों तक पहुंचने की है जो पूरे नेटवर्क को संचालित करते हैं. लोगों की मांग है कि जिले में सक्रिय अवैध रेत कारोबार की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि आखिर किन लोगों के संरक्षण में यह कारोबार लगातार जारी है.
हालांकि किसी जनप्रतिनिधि, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता का कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है. लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों और कार्रवाई के बाद भी जारी गतिविधियों ने जनता के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं. लोग यह जानना चाहते हैं कि जब मुख्यमंत्री खुद अवैध खनन के खिलाफ सख्ती के निर्देश दे चुके हैं. तब भी प्रतिबंध अवधि में रेत का अवैध कारोबार कैसे जारी है.
जिलेवासियों का मानना है कि अगर प्रशासन हकीकत में अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाना चाहता है तो सिर्फ औपचारिक कार्रवाई के बजाय लगातार निगरानी, नियमित छापेमारी, अवैध परिवहन पर सख्त नियंत्रण और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी. वरना हर बार की तरह जप्ती की खबरें सुर्खियां बनेंगी और कुछ समय बाद फिर वही हालात दिखाई देंगे.
अब जिले की जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं. सवाल सिर्फ अवैध खनन का नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन का भी है. जनता जानना चाहती है कि आखिर प्रतिबंध अवधि में जारी इस खेल पर स्थायी रोक कब लगेगी और मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना करने वालों पर जवाबदेही कब तय होगी.
बता दें कि 11 जून की देर रात से खनिज विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने राजिम थाना क्षेत्र के ग्राम चौबेबांधा-सिंधोरी बॉर्डर पर दबिश देकर अवैध खनन में उपयोग की जा रही एक चेन माउंटेन मशीन को जब्त किया. वहीं कार्रवाई के दौरान एक हाइवा वाहन को भी पकड़ा गया. जिसे आगे की कार्रवाई के लिए पांडुका थाना में रखा गया है. इसके अलावा एक अन्य जब्त वाहन को राजिम थाना परिसर में सुरक्षित रखा गया है.
चौबेबांधा की नदी इन दिनों शायद यही सोच रही होगी कि उसे बचाने के लिए बनाए गए नियम आखिर लागू कब होंगे. एक तरफ प्रशासन कार्रवाई के दावे कर रहा है, दूसरी तरफ खनन माफिया लगातार सक्रिय दिखाई दे रहे हैं. अब देखने वाली बात यह होगी कि मुख्यमंत्री के निर्देशों का वास्तविक असर जमीन पर कब दिखाई देता है या फिर चौबेबांधा में कार्रवाई और अवैध खनन का यह आंख-मिचौली खेल आगे भी इसी तरह चलता रहेगा.
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