बजट सत्र में लंबित मामलों व मिनी उद्योगों के बंद होने का उठा मुद्दा, जल जीवन मिशन को लेकर हुआ सवाल, महंत ने बंद कारखानों पर उद्योग मंत्री को घेरा

The issue of pending cases and closure of mini industries was raised in the budget session, questions were raised about Jal Jeevan Mission, Mahant surrounded the Industry Minister on closed factories

बजट सत्र में लंबित मामलों व मिनी उद्योगों के बंद होने का उठा मुद्दा, जल जीवन मिशन को लेकर हुआ सवाल, महंत ने बंद कारखानों पर उद्योग मंत्री को घेरा

रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन की कार्रवाई हुई. प्रश्नकाल के दौरान कई मुद्दों पर सदन गरमाया. विधानसभा में ज्यादातर सवाल प्रदेश में चल रहे जल जीवन मिशन को लेकर था. पीएच ई मंत्री अरुण साव इसका संतोषप्रद जवाब नहीं दे पाए जिससे असंतुष्ट होकर विपक्ष के सभी सदस्यों ने सदन की कार्यवाही से वॉकआउट कर दिया.
सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपने ही मंत्री पर सवालो की झड़ी लगा दी. भाजपा विधायकों ने कहा कि इस महत्वाकांक्षी योजना में जमकर अनियमितता हुई है. दोषी अफसरों और ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग इन विधायकों ने की. विभागीय मंत्री ने इसका सर्वे कराकर दोषी ठेकेदार का भुगतान रोकने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने की घोषणा सदन में की.
कुरुद से भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत ऐसे गांवों की जानकारी चाही. जहां जल स्रोत नहीं होने के बावजूद टंकी और पाइप लाइन बिछा दी गई. इसके जवाब में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बताया कि 653 जहां जल स्रोत नहीं है और वहीं टंकी और पाइप लाइन बन गई. जब योजना का डीपीसी की गई थी. तो उस दौरान प्रत्येक गांवों में जल स्रोत की व्यवस्था थी, लेकिन योजना की शुरुआत होने में देरी की वजह से ये दिक्कत आई है. ये योजना 2019 की थी. लेकिन जल स्रोत का काम 2023 में शुरु हुआ. इसकी वजह से ज्यादा दिक्कत आई.
कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंस ने जांजगीर चांपा में सड़क निर्माण का मुद्दा उठाया. उन्होंने पामगढ़ में सड़क निर्माण के स्थगित होने के बारे में सवाल पूछा. PWD मंत्री अरुण साव ने सड़कों के बारे में दी जानकारी. उन्होंने कहा कि प्राथमिकता में सड़कों का निर्माण किया जा रहा है.
वहीं सदन में चरणदास महंत ने पूछा कि सरकार ने औद्योगिक नीति बनाई. कहा कि उद्योगों को क्षमता विकास के लिए अनुकूल अवसर दिए जाएंगे. एक साल में राजनांदगांव के 5 उद्योग बंद हो गए. ये वित्तीय कारणों से बंद होना बताया गया. इनको सहयोग क्यों नहीं दिया गया?
मंत्री लखनलाल ने जवाब दिया- जो बंद 5 उद्योग के बारे में बोला गया है. उनको भी उद्योग विभाग के नियमों के मुताबिक सब्सिडी दी गई. उनको ब्याज अनुदान में 5 को 75 लाख 31 हजार और 60 लाख की मदद दी गई है. 2023 में भी कांग्रेस के समय 18 उद्योग बंद हुए हैं. हमारा प्रयास है कि उद्योगों को लाभ मिले.
डॉ. महंत ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर पंडरिया में शक्कर कारखाना शुरु हुआ था. 28 फ़रवरी को इसे बंद कर दिया गया. क्योंकि गन्ने का भुगतान नहीं किया गया. भोरमदेव का शक्कर कारखाना और बालोद का शक्कर कारखाना भी बंद कर दिया गया है.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने एक रिवॉल्विंग फण्ड बनाया था. जिससे भुगतान होता है. अगर कारखाने इस तरह से बंद होते रहे. तो कैसी औद्योगिक नीति बना रहे हैं. उद्योग बंद होने पर कारखाना अधिनियम में मुआवजा देने का प्रावधान है. क्या मजदूरों को मुआवजा का भुगतान किया गया है? इस पर उद्योग मंत्री लखन देवांगन ने कहा कि श्रम अधिनियम के अनुसार मजदूरों के भुगतान की प्रक्रिया की जाएगी. जो नियम में होगा वैसा किया जाएगा.
डा चरणदास महंत ने कहा कि पंडरिया में शक्कर कारखाना खुला था। गन्ना उत्पादक किसानों को आपने पैसा नहीं दिया. उपज का उचित मूल्य ना मिलने के कारण किसानों ने गन्ना लगाना ही बंद कर दिया. भोरमदेव शक्कर कारखाना भी बंद है. सूरजपुर जिले की शुगर फैक्ट्री भी बंद है. यह लगातार बंद होते जा रहे हैं तो ऐसे में राज्य सरकार की नई उद्योग नीति का मतलब ही क्या है. डा महंत ने फिर सवाल दागा और पूछा कि मिनी स्टील प्लांट जितने बंद हुए है इसमें 2024 से 2025 के दौरान क्या एक भी नया स्टील प्लांट खुला है?
मंत्री देवांगन ने सवाल का जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल प्रदेश में एक भी स्टील प्लांट नहीं खुले हैं. इस बारे में अलग-अलग उद्योगपतियों से चर्चा हो रही है.
डा महंत ने प्रदेश में जिन उद्योगों को बंद किया गया है वहां कार्यरत कर्मचारियों के नियोजन का मामला उठाया. उद्योग मंत्री से पूछा कि अब तक कितने कर्मचारियों का नियोाजन किया गया है. नियोजन के अलावा भुगतान की समुचित प्रबंध किया गया है या नहीं. मंत्री ने कहा कि अब तक एक भी कर्मचारियों को भुगतान नहीं किया गया है. श्रम विभाग के नियमानुसार जो भी प्रावधान होगा उसे पूरा किया जाएगा.
मंत्री को घिरते देखकर स्पीकर डा रमन सिंह ने नेता प्रतिपक्ष से कहा कि आप सवाल से हटकर यह सब पूछ रहे हैं. शक्कर कारखाना और मिनी स्टील प्लांट के सवालों तक आप सीमित रहें. नेता प्रतिपक्ष की व्यवस्था के बाद डा महंत ने सवाल दागते हुए कहा कि उद्योग बंद होने पर बेरोजगार कर्मचारियों को श्रम अधिनियम के तहत मुआवजा देने का प्रावधान है. श्रम अधिनियम के तहत मुआवजा दिया गया है या नहीं.
मंत्री ने बताया कि मुआवजा नहीं दिया गया है. स्पीकर ने मंत्री देवांगन से कहा नेता प्रतिपक्ष का सवाल है कि बेरोजगार कर्मचारियों को मुआवजा नहीं दिया है तो क्या करेंगे. इस पर मंत्री देवांगन कहा कि श्रम अधिनियम व प्रावधान के तहत मुआवजा दिया जाएगा. जो नियम में होगा उसे करेंगे.
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विधानसभा में प्रदेश के तहसील और संभागीय दफ्तरों में लंबित राजस्व प्रकरणों का मामला गूंजा. ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर और विपक्ष के उमेश पटेल ने यह मामला उठाते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न राजस्व न्यायालयों में 1 लाख 79 हजार मामले लंबित हैं. किसान और भूस्वामी इसके सुधार के लिए राजस्व कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं. ऐसे मामलों के निराकरण के लिए सरकार क्या प्रयास कर रही है. विभागीय मंत्री ने कहा कि जल्द ही प्रदेश भर में शिविर लगाकर इन प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा.