जिस बर्तन में बनाते हैं आप खाना वही बन सकता है जान का दुश्मन, जानें रसोई के लिए कौन सा है बेस्ट बासन
Non-Stick dangerous effects on Health : आप जिस बर्तन में खाना बनाते हैं, उसके बारे में अच्छी तरह पड़ताल कर लीजिए क्योंकि हो सकता है कि जिस बर्तन में आप काना बनाते हैं, वही बर्तन आपकी सेहत के लिए दुश्मन बन जाए.
Non-Stick dangerous effects on Health : आप जिस बर्तन में खाना बनाते हैं, उसके बारे में अच्छी तरह पड़ताल कर लीजिए क्योंकि हो सकता है कि जिस बर्तन में आप काना बनाते हैं, वही बर्तन आपकी सेहत के लिए दुश्मन बन जाए. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के मुताबिक नॉन-स्टिक बर्तन में खाना बनाने से बेहद नुकसान हो सकता है. गलत बर्तन में खाना बनाना आपकी सेहत के लिए दुश्मन बन सकता है. हाल ही में इंडियन मेडिकल काउंसिल और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के भारतवासियों के लिए जारी डायट्री गाइडलाइन में यह बात कही है.
गाइडलाइन में पहले ही बताया कि देश में 56 प्रतिशत बीमारियों के लिए गलत खान-पान जिम्मेदार है और इसके लिए प्रत्येक भारतवासियों के लिए अपनी डाइट में सुधार करने की जरूरत है. गाइडलाइन में कहा गया है कि आप जिस बर्तन में खाना बनाते हैं, उसे अच्छी तरह समझ लें कि इस बर्तन से कोई नुकसान है या नहीं. एनआईएन ने बताया है कि ज्यादातर नॉन-स्टिक बर्तन सेहत के लिए दुश्मन जैसा है. इससे हानिकारक रसायन निकलते हैं जो खाना में मिल जाते हैं और कई बीमारियों को जन्म देते हैं. इसलिए ऐसे बर्तनों का इस्तेमाल न करें.
नॉन-स्टिक बर्तन बहुत बड़ा विलेन
एनआईएन के मुताबिक नॉन-स्टिक बर्तनों में खाना बनाना नुकसानदेह साबित हो सकता है. इस बर्तन से किसी फूड की जो पौष्टिकता है वह आपको बहुत कम प्राप्त होगा और उल्टा अगर इससे रसायन भोजन में मिल गया तो यह भारी नुकसान भी करेगा. इंडियन एक्सप्रेस की खबर में सीएमआई अस्पताल, बेंगलुरु की क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट एडविना राज बताती हैं कि आजकल बाजार में तेजी से नॉन-स्टिक बर्तन बिक रहे हैं. दावा किया जाता है कि यह बर्तन बहुत अच्छा होता है और इससे धुआं अंदर नहीं जाता है. दूसरी ओर इससे बर्तन भी खराब नहीं होता. लेकिन होता इसका उल्टा है. नॉन स्टिक बर्तन को कोटिंग करने के लिए टेफलॉन का इस्तेमाल किया जाता है.
टेफलॉन जैसे ही गर्म होता है उससे परफ्लूरोऑक्टानोक एसिड (PFOA) रिलीज होने लगता है. इसे पीएफओए कहा जाता है. पीएफओए बेहद हानिकारक रसायन है जिससे कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है. पीएफओए से थायरायड और बच्चों के जन्म में भी परेशानी होती है. हालांकि अब अधिकांश कंपनियां पीएफओए को अपने बर्तनों से हटाने की बात मान ली है. इसके बावजूद यदि नॉन-स्टिक बर्तन ज्यादा गर्म होने लगता है तो इसके कई खतरे हैं. ज्यादा गर्म नॉन-स्टिक बर्तन हानिकारक धुआं बनाता है जिससे फेफड़े पर असर पड़ता है और उससे पोलिमर फ्यूम फीवर का खतरा बढ़ जाता है. अगर नॉन-स्टिक बर्तन 170 डिग्री से ज्यादा गर्म होता है तो इसका खतरा कहीं अधिक बढ़ जाता है.
किसी भी चीज को किसी बर्तन में न रखें
एनआईएन ने बताया है कि चटनी और सांभर को एल्यूमिनियम, आयरन, ब्रास और कॉपर के बर्तन में न रखें क्योंकि इसकी अम्लता बढ़ जाएगी और इससे नुकसान होगा. वहीं अल्यूमिनियम के बर्तन भी खाना बनाने के लिए अच्छा नहीं माना गया है. इससे अल्यूमिनियम रिसकर भोजन में मिल सकता है. दूसरी ओर स्टील के बर्तनों में ये तत्व नष्ट होने लगते हैं और इससे निकले हानिकारक रसायन किडनी और लिवर फंक्शन को प्रभावित करते हैं.
मिट्टी के बर्तन सबसे बेस्ट
खाना बनाने के लिए स्टेनलेस स्टील के बर्तन को बेहद सुरक्षित माना जाता है. यह टिकाउ भी होता है और हाइजेनिक भी होता है. हालांकि मिट्टी का बर्तन खाना बनाने के लिए सबसे सुरक्षित और उत्तम है. यदि इसकी साफ-सफाई का बेहतर ढंग से ख्याल रखा जाए तो इसमें बने भोजन की पौष्टिकता नष्ट नहीं होती और इसमें ज्यादा तेल या घी नहीं लगता. यह पौष्टिकता को संघनित करता है. दूसरी ओर अगर आपका बर्तन सही नहीं है तो इससे खाने की पौष्टिकता तो नष्ट होगी ही, कई बीमारियां भी गले से लिपट जाएगी. इस लिहाज से मिट्टी के बर्तन इको-फ्रेंडली होते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मिट्टी के बर्तन में पहले से कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और आयरन मौजूद होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाने में फायदेमंद है. मिट्टी के बर्तन में बने भोजन की अम्लता बहुत कम होती है जिसके कारण यह इससे एसिडिटी नहीं होती है और कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कम हो जाता है.(एजेंसी)



