गरियाबंद के कोटरी नाला जलाशय में मछली पकड़ने गए युवक की डूबने से मौत, मौके से जाल और मछलियां बरामद, पांच साल का बच्चा हुआ अनाथ

A young man drowned while fishing in the Kotri Nala reservoir in Gariaband; a fishing net and fish were recovered from the scene, and a five-year-old child has been left orphaned.

गरियाबंद के कोटरी नाला जलाशय में मछली पकड़ने गए युवक की डूबने से मौत, मौके से जाल और मछलियां बरामद, पांच साल का बच्चा हुआ अनाथ

गरियाबंद/छुरा : गरियाबंद जिले के कोटरी नाला जलाशय में एक युवक की डूबने से मौत हो गई. हादसे की खबर पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है. मौके से मछली पकड़ने का जाल और पकड़ी गई मछलियां भी बरामद हुई हैं. यह मामला छुरा थाना क्षेत्र का है.
मिली जानकारी के मुताबिक मृतक माखन कमार उम्र 35 साल मूल रूप से कुरूभाठा का निवासी था. जबकि पिछले कई साल से परसदा खुर्द स्थित अपने ससुराल में रह रहा था. वह कोटरी नाला जलाशय में मछली पकड़ने गया. इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूबने से उसकी मौत हो गई. हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को खबर दी गई.
घटनास्थल से जाल और पकड़ी गई मछलियां भी बरामद हुई हैं. ग्रामीणों के मुताबिक मृतक जलाशय में मछली पकड़ने के मकसद से ही गया था. ऐसे में यह हादसा सिर्फ एक सामान्य डूबने की घटना नहीं रह जाती. बल्कि बंद ऋतु के दौरान प्रतिबंधित मछली आखेट की वास्तविक स्थिति को भी उजागर करती है.
प्रतिबंध अवधि में मछली पकड़ने पर उठे सवाल
गौरतलब है कि हर साल 15 जून से 15 अगस्त तक मछलियों के प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए मछली आखेट पर प्रतिबंध लगाया जाता है. इस अवधि में जलाशयों, बांधों, नदियों और अन्य जल स्रोतों में मछली पकड़ना नियम विरुद्ध माना जाता है. इसके बावजूद कई क्षेत्रों से लगातार जाल डालकर मछली पकड़ने की खबरें सामने आती रही हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पाबन्दी का प्रभावी पालन कराया जाता तो शायद इस तरह के हादसों को रोका जा सकता था.
क्षेत्रवासियों का कहना है कि बरसात के मौसम में जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ता है और पानी का बहाव भी सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा खतरनाक हो जाता है. इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर पानी में उतर रहे हैं. ऐसे हालात यह संकेत देते हैं कि प्रतिबंध अवधि के दौरान जागरूकता और निगरानी दोनों स्तरों पर अभी भी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं.
मृतक माखन कमार के परिवार की हालत इस हादसे के बाद बेहद दयनीय हो गई है. बताया जा रहा है कि मृतक की पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था. वह अपने पांच साल के बेटे के साथ ससुराल में रहकर जीवनयापन कर रहा था. अब उसकी मौत के बाद मासूम बच्चे के सिर से पिता का साया भी उठ गया है. गांव में हादसे के बाद शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
जांच में जुटी पुलिस
छुरा पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है. पंचनामा और पोस्टमार्टम की कार्रवाई पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है. पुलिस द्वारा घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है.
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