आधी रात बर्खास्त महिला शिक्षाकर्मियों को रोड पर घसीटा, कपड़े फटे, खून से हुई लतपथ, घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में कराया गया भर्ती

Dismissed female teachers were dragged on the road at midnight, clothes torn, blood soaked, injured were admitted to the hospital for treatment

आधी रात बर्खास्त महिला शिक्षाकर्मियों को रोड पर घसीटा, कपड़े फटे, खून से हुई लतपथ, घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में कराया गया भर्ती

रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आधी रात को घटित एक शर्मनाक घटना ने प्रदेश में कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बर्खास्त शिक्षाकर्मियों के आंदोलन के दौरान पुलिस की बर्बरता का शिकार हुई पांच महिला शिक्षिकाओं को डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया. इनमें से तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है. यह घटना राजधानी के सिविल लाइंस क्षेत्र की है. जहां शिक्षाकर्मी अपनी बर्खास्तगी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे.
रात करीब 11 बजे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई. प्रदर्शन के दौरान पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला शिक्षकों के साथ बदसलूकी की. इस दौरान कई महिलाओं को गंभीर चोटें आई. लक्ष्मी जुर्री नामक शिक्षिका ने बताया कि चार पुरुष पुलिसकर्मी मुझे जबरन हमें उठाने लगे. वे मेरे ऊपर गिर गए. जिससे मुझे गंभीर चोटें आईं. मेरी हालत नाजुक है. इस दौरान महिला शिक्षक रोती रही. टीचर्स ने पुलिस पर कपड़े फाड़ने और बैड टच करने का आरोप लगाया है.
एक अन्य शिक्षिका, मेनका उसेंडी ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि मुझे पेट में लात मारी गई और फिर घसीटते हुए ले जाया गया. मैंने सोचा कि मैं वहीं मर जाऊंगी. वहीं, सीमा तिग्गा को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया और अब तक उनकी हालत स्थिर नहीं हो सकी है.
प्रदेश में शिक्षाकर्मियों की बर्खास्तगी का मुद्दा लंबे समय से विवाद का विषय रहा है. हजारों शिक्षाकर्मी अपनी नौकरियां बचाने के लिए आंदोलित हैं. सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर कई शिक्षाकर्मियों को बर्खास्त किया गया है. लेकिन इनमें से कई लोग इसे अन्यायपूर्ण और पक्षपातपूर्ण मानते हैं.
रायपुर में रविवार को इन शिक्षाकर्मियों ने रात भर धरना प्रदर्शन किया. जब प्रशासन ने प्रदर्शन खत्म करने के लिए दबाव बनाया. तब यह विवाद हिंसक झड़प में बदल गया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें जायज हैं और वे सिर्फ अपना हक मांग रहे थे.
महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल
इस घटना ने राज्य में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर फिर से बहस छेड़ दी है. यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पुरुष पुलिसकर्मी महिलाओं से इस तरह का व्यवहार कर सकते हैं? कानून व्यवस्था के नाम पर ऐसी घटनाएं न सिर्फ संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं. बल्कि यह सामाजिक मूल्यों को भी चोट पहुंचाती हैं.
महिला सुरक्षा और कानूनी प्रावधान
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 और 21 महिलाओं को समानता और जीवन का अधिकार देता है.
महिला प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी जरुरी है.
सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के मुताबिक रात 6 बजे के बाद महिलाओं की गिरफ्तारी के लिए विशेष परिस्थितियों में अनुमति लेनी होती है.
सरकार और पुलिस ने दी सफाई
इस घटना पर पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि प्रदर्शनकारियों को बार-बार हटने का आग्रह किया गया था. पुलिस का कहना है कि हालात को कंट्रोल में लाने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा. वहीं, सरकार का कहना है कि इस मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और दोषी पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी.
विपक्ष का हमला
विपक्ष ने इस घटना पर सरकार को आड़े हाथों लिया. कहा कि सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था चरमरा गई है. पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “शिक्षाकर्मियों के साथ ऐसा बर्ताव अस्वीकार्य है. यह घटना सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाती है.
दीपक बैज ने कहा कि, कांग्रेस सहायक शिक्षकों की मांगों का पूरा समर्थन करती है. सरकार का दायित्व है कि सेवाएं सुरक्षित रखी जाएं. सरकार चाहे तो रास्ता निकाल सकती है. नौकरी से सीधे हटा देना पूरी तरह गलत है. राज्य में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं. फिर भी सहायक शिक्षकों को बाहर करना गलत है.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया. भूपेश बघेल भी गए थे धरनास्थल 2 जनवरी को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी धरनास्थल पहुंचे थे. बीजेपी कार्यालय घेरने गए 30 सहायक शिक्षकों की गिरफ्तारी का विरोध करते हुए उन्होंने कहा था कि जो 30 सहायक शिक्षक जेल में हैं. उनके साथ हम सब जेल जाएंगे. डरने की कोई बात नहीं है. आजादी की लड़ाई में भी जेल से हुई थी. उन्होंने कहा कि NSUI और यूथ कांग्रेस के छात्र भी बर्खास्त शिक्षकों के साथ आंदोलन पर बैठेंगे.
आंदोलन का विस्तार
बर्खास्त शिक्षाकर्मियों का आंदोलन अब और तेज होने की संभावना है. घटना के बाद शिक्षाकर्मी संघ के नेताओं ने बयान जारी करते हुए कहा कि पुलिस की बर्बरता ने उन्हें और ज्यादा मजबूती दी है. उन्होंने सरकार से तुरंत कार्रवाई और बर्खास्तगी रद्द करने की मांग की है.
अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि शिक्षिकाओं की हालत नाजुक है. लेकिन डॉक्टर उनकी जान बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. घटना के बाद अस्पताल के बाहर शिक्षाकर्मियों और उनके परिवार वालों की भीड़ जुट गई.
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